भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कब और कैसे खुलेगा, इस पर ईरानी राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित सिद्धांतों के तहत खोला जाएगा, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपनी नाकेबंदी और शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बंद करनी होंगी. इंडिया टुडे ग्रुप की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि ओमान के साथ एक विशेष समुद्री व्यवस्था पर बातचीत चल रही है और आगे अरब देशों के विदेश मंत्री भी ओमान के साथ बैठक करेंगे, ताकि इस पर समझौता हो सके.
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी आईएमओ इस स्थिति की घोषणा करेगा. यह जवाब उस सवाल पर आया, जिसमें पूछा गया था कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को यह भरोसा दिया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, क्योंकि भारत इस वजह से बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मौजूदा स्थिति पर पूछे गए एक दूसरे सवाल में कहा गया कि नाकेबंदी से दुनिया प्रभावित हो रही है और भारत भी इसकी गर्मी महसूस कर रहा है. इसी सवाल में राष्ट्रपति ट्रंप के इसे 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' नाम देने की बात और हूतियों, हिज्बुल्लाह और हमास की मदद से वहां की स्थिति पर भी सवाल किया गया.
इसके जवाब में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि न तो हिज्बुल्लाह ने और न ही ईरान ने इसकी शुरुआत की. उनके मुताबिक ये सभी समूह अपना बचाव कर रहे हैं और पहले हमला किसने किया, यह देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुश्मन हमला कर रहे हैं, क्षेत्र पर वार कर रहे हैं, रास्ते बंद कर रहे हैं और फिर उम्मीद करते हैं that ईरान कुछ न करे.
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राष्ट्रपति ने कहा, अगर हम जीवित हैं तो हमें जवाब देना होगा. जब हम मर जाएंगे, तब जवाब नहीं दे पाएंगे. इसलिए हम जीवित हैं और जवाब देंगे. उन्होंने साथ ही कहा कि अगर अमेरिका नाकेबंदी और प्रतिबंध खत्म करता है तो स्थिति बदल सकती है. उनके मुताबिक प्रतिबंधों का मतलब मरीजों को मारना, लोगों को बेरोजगार करना, गरीबी और असंतोष पैदा करना है.
अमेरिका को लेकर उन्होंने कहा कि अगर वह युद्ध करना चाहता है तो उसे सैन्य कर्मियों से युद्ध करना चाहिए, आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अब जब अमेरिका युद्ध के जरिए अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया तो वह आर्थिक गतिविधियों के जरिए ऐसा करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसमें भी असफल होगा. उनके अनुसार ब्रिक्स ऐसा मंच है जो इस बंद रास्ते को खोल सकता है और व्यापार तथा आपसी संपर्क को बढ़ावा दे सकता है.
कुल मिलाकर ईरानी राष्ट्रपति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का रास्ता बातचीत, समुद्री व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय घोषणा से जोड़ा है, लेकिन साथ ही साफ कर दिया कि इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए अमेरिका को नाकेबंदी और शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बंद करनी होंगी. उन्होंने क्षेत्रीय हालात, जवाबी कार्रवाई, प्रतिबंधों और ब्रिक्स की भूमिका पर भी अपनी बात विस्तार से रखी.