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भारत की इस पार्टी से खफा चाइनीज मीडिया, नाम लेकर कहा- संबंधों को हाईजैक न होने दें

चीन की सरकारी मीडिया ने लिखा है कि भारत की घरेलू राजनीति में सीमा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल अक्सर राजनीतिक फ़ायदे के लिए किया जाता रहा है. ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक्सपर्ट के हवाले से कहा है कि भारत को इन संबंधों के बहाने आपसी रिश्तों को हाईजैक नहीं होने देना चाहिए.

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ग्लोबल टाइम्स ने बॉर्डर मुद्दे पर लंबा लेख प्रकाशित किया है. (Photo: ITG)
ग्लोबल टाइम्स ने बॉर्डर मुद्दे पर लंबा लेख प्रकाशित किया है. (Photo: ITG)

चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत-चीन बॉर्डर विवाद पर प्रतिक्रिया दी है. इस अखबार ने एक लेख में कहा है कि भारतीय मीडिया और क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों ने चीन-भारत सीमा पर कथित झड़प के आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश की है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि सीमा से जुड़े दावों को सनसनीखेज बनाने से दोनों देशों के संबंधों में बना मोमेंटम टूट सकता है. अखबार ने कहा कि दोनों देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सीमा का मुद्दा उनके व्यापक संबंधों को हाईजैक न कर ले. 

ग्लोबल टाइम्स ने अरुणाचल प्रदेश को 'तथाकथित' कहकर संबोधित किया. अखबार ने लिखा है कि हाल की अटकलें, 'तथाकथित अरुणाचल प्रदेश की पीपुल्स पार्टी (PPA) के दावे के बाद शुरू हुईं. ये एक क्षेत्रीय पार्टी है. 

अखबार ने आगे लिखा, "स्थानीय भारतीय अखबार 'द अरुणाचल टाइम्स' के अनुसार, पूर्व मंत्री और पार्टी सलाहकार काहफ़ा बेंगिया की अगुवाई में PPA की चार सदस्यों वाली "फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग कमेटी" ने 10 जुलाई को तथाकथित "टैक्सिंग इलाके" का दौरा किया और बाद में आरोप लगाया कि भारतीय सेना को कई पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक जाने से रोका गया था."

पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल अरुणाचल प्रदेश की एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है. अगस्त 2026 में पार्टी ने ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताक्सिंग क्षेत्र में चीनी पीएलए की कथित घुसपैठ का मुद्दा उठाया. पार्टी ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई, जिसने बताया कि चीनी सैनिक कुछ भारतीय गश्त बिंदुओं तक पहुंच रोक रहे हैं. 

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बता दें कि चीन अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता. वह इसे “जंगनान” (Zangnan) या “दक्षिणी तिब्बत” कहता है और इस पर अपना क्षेत्रीय दावा करता है. 

हालांकि भारत स्पष्ट रूप से कहता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है. यह एक निर्विवाद सच्चाई है, जिसे कोई भी दावा या नाम बदलने से बदला नहीं जा सकता. 

चीन के विदेश मंत्रालय ने पीपुल्स पार्टी की इस दावे पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया. बुधवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने बॉर्डर पर स्थिति को सामान्य बताया था. लेकिन सीमा पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी बढ़ने पर कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहा था. 

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार त्सिंहुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रैटेजी इंस्टीट्यूट के रिसर्च डिपार्टमेंट के डायरेक्टर कियान फेंग ने गुरुवार को ग्लोबल टाइम्स को बताया कि दोनों पक्षों का तय चैनलों के ज़रिए बातचीत जारी रखना यह दिखाता है कि बॉर्डर पर हालात उस तरह नहीं बिगड़े हैं जैसा कुछ भारतीय मीडिया ने दिखाया है. 

ग्लोबल टाइम्स ने 7 अगस्त को भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों के लिए "स्टैंडर्ड" नामों की घोषणा की चर्चा की है. और इसे भारत का बेकार कदम बताया है. 

ग्लोबल टाइम्स ने सीमा से जुड़ी भारत की चिंताओं का जवाब देने के बजाय कहा है कि भारत की घरेलू राजनीति में सीमा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल अक्सर राजनीतिक फ़ायदे के लिए किया जाता है. 

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झेजियांग इंटरनेशनल स्टडीज़ यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और शंघाई एकेडमी ऑफ़ सोशल साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल रिलेशंस में रिसर्च फ़ेलो हू झियोंग ने गुरुवार को ग्लोबल टाइम्स को बताया कि भारत की घरेलू राजनीति में सीमा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल अक्सर राजनीतिक फ़ायदे के लिए किया जाता रहा है. हू ने समझाया, "जब घरेलू आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को हल करना मुश्किल हो जाता है, तो लोगों का ध्यान भटकाने के लिए चीन या पाकिस्तान के साथ सीमा से जुड़े मुद्दों को आसानी से आगे लाया जा सकता है."

उन्होंने कहा कि आर्थिक दबाव, विदेशी निवेश और घरेलू कारोबारी माहौल को लेकर चिंताएं और साथ ही लोगों की भावनाएं, कुछ राजनीतिक ताकतों को बाहरी विवादों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं. 

हू का मानना है कि, "सीमा विवाद द्विपक्षीय रिश्तों का सिर्फ़ एक हिस्सा है, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, कूटनीतिक, सुरक्षा और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे कई पहलू शामिल हैं." "इसे पूरे रिश्तों को हाईजैक नहीं होने देना चाहिए."

प्रोफेसर हू ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हालिया अटकलों का समय ध्यान देने लायक है, क्योंकि भारत में कुछ ताकतों ने अहम द्विपक्षीय बातचीत से पहले बढ़त हासिल करने की कोशिश में कई बार सीमा से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल किया है. 

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ग्लोबल टाइम्स के इस पूरे बयान में चीन की सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि "टैक्सिंग इलाके" में हुआ क्या था. 

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