उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में लोन फ्रॉड से परेशान एक पशु चिकित्सा अधिकारी ने आत्महत्या कर ली. 52 वर्षीय डॉक्टर परमात्मा सिंह ने अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से छलांग लगा दी. घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें वह छत की तरफ जाते और फिर नीचे गिरते दिखाई दे रहे हैं. पुलिस को उनकी जेब से एक पेज का सुसाइड नोट भी मिला है.
सुसाइड नोट में डॉक्टर ने अपनी मौत के लिए कथित महिला ठग गरिमा सिंह को जिम्मेदार बताया है. पुलिस के मुताबिक, गरिमा सिंह ने डॉक्टर से करीब 1.40 करोड़ रुपये की ठगी की थी. इसके बाद से वह मानसिक तनाव में थे. बैंक की ओर से लगातार रिकवरी का दबाव बढ़ने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया.
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आरोप है कि गरिमा सिंह ने डॉक्टर को उनके होम लोन को खत्म कराने का लालच दिया था. इसके लिए उन्हें समझाया गया कि एक पर्सनल लोन लेना होगा, जिसकी किस्त वह खुद चुकाएगी. डॉक्टर के दस्तावेज हासिल करने के बाद कथित तौर पर दो दिन के भीतर छह अलग-अलग बैंकों से करीब 1.40 करोड़ रुपये का लोन लिया गया और रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई.
होम लोन खत्म कराने का दिया था झांसा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी महिला ने डॉक्टर को भरोसा दिलाने के लिए शुरुआत में कुछ समय तक लोन की किस्तें भी भरीं. करीब दो से तीन महीने तक किस्त देने के अलावा कथित तौर पर उनके खाते में 10 लाख रुपये भी छोड़े गए. इस रकम को उन्हें मुनाफे के तौर पर बताया गया था.
धीरे-धीरे बैंक की ओर से रिकवरी का दबाव डॉक्टर पर बढ़ने लगा. जब उन्हें करोड़ों रुपये के कर्ज की जिम्मेदारी का सामना करना पड़ा तो उनकी परेशानी और बढ़ गई. आरोप है कि जिस योजना को डॉक्टर के लिए फायदा बताकर पेश किया गया था, वही बाद में उनके लिए भारी आर्थिक संकट बन गई.
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि गरिमा सिंह पर एक दर्जन से ज्यादा लोगों को कथित तौर पर अपना शिकार बनाने का आरोप है. बताया जा रहा है कि वह लोगों को करोड़पति और अरबपति बनाने का सपना दिखाकर अपने जाल में फंसाती थी. इस कथित ठगी में उसके परिवार और अन्य लोगों के शामिल होने की भी जांच की जा रही है.
डॉक्टर ने 5 अगस्त को दर्ज कराया था केस
डॉक्टर परमात्मा सिंह ने 5 अगस्त को एम्स थाने में गरिमा सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. FIR में मोहन सिंह, विशाल यादव, साधना मल्ल, श्रुति सिंह के अलावा संबंधित बैंकों के अधिकारी और कर्मचारियों के नाम भी दर्ज कराए गए थे.
पुलिस ने मामले में BNS की धारा 318(4), 351(3), 61(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया था. पुलिस गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. ध्रुव नारायण सिंह गोरखपुर के सहजनवा रेलवे स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक के पद पर तैनात रह चुके हैं.
पुलिस अब डॉक्टर की मौत और कथित लोन फ्रॉड के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है. सुसाइड नोट, बैंक लेनदेन, लोन से जुड़े दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज को जांच का हिस्सा बनाया गया है.
परिवार भी पशु चिकित्सा के पेशे से जुड़ा
डॉक्टर परमात्मा सिंह गोरखनाथ क्षेत्र की राजेंद्र नगर कॉलोनी स्थित बसंत इंक्लेव में पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे. उनकी पत्नी सावित्री सिंह भी पशु चिकित्सक हैं. परिवार में इस घटना के बाद मातम का माहौल है.
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस सुसाइड नोट की भी जांच कर रही है, ताकि उसमें लिखी बातों की पुष्टि की जा सके और कथित ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके.
सुसाइड नोट और सीसीटीवी से खुलेंगे कई राज
पुलिस को डॉक्टर की जेब से मिला एक पेज का सुसाइड नोट इस मामले में अहम सबूत माना जा रहा है. इसमें डॉक्टर ने अपनी मौत के लिए गरिमा सिंह को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं, अपार्टमेंट की छत तक जाते और नीचे गिरते हुए डॉक्टर का सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के पास है.
पुलिस अब बैंक खातों में रकम ट्रांसफर होने, लोन आवेदन में इस्तेमाल दस्तावेजों और आरोपियों के बीच पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे.
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