फ्रांस में पिछले कुछ दिनों से चल रहे हिंसक प्रदर्शनों और उपद्रव के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अपनाया है. गुरुवार को मैक्रों ने खुफिया अधिकारियों और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की. इसके बाद उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले दिनों में देश में 'अवैध' प्रदर्शनों पर पूरी तरह बैन लगा दिया जाएगा.
राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि अवैध और अराजक प्रदर्शनों पर रोक रहेगी. लेकिन ट्रेड यूनियनों जैसे संगठित समूहों के शांतिपूर्ण मार्च के लिए वैकल्पिक रास्ते सुझाए जाएंगे, ताकि आम नागरिकों और कारोबारियों की सुरक्षा की जा सके.
ये फैसला देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने और लगातार हो रही तोड़फोड़ को रोकने के लिए लिया गया है. मैक्रों ने पिछले शनिवार को फ्रांस भर में हुए भीषण दंगों और लूटपाट के लिए 'राजद्रोही' अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों और उपद्रवियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है.
मैक्रों ने कहा, 'पिछले शनिवार को हमने संगठित अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों की ओर से राजनीतिक और राजद्रोही करतूतों को अंजाम देते हुए देखा. उनका साफ मकसद गणतंत्र को गिराना है और ये खुद उन्होंने भी स्वीकार किया है.
कई हजार लोगों को हिरासत में लिया गया
उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने बताया कि न्याय प्रणाली पूरी तरह मुस्तैद है. अब तक कई हजार लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और सैकड़ों लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया है. उन्होंने कहा कि ये कानूनी कार्रवाई अभी थमी नहीं है, ये लगातार जारी रहेगी और सही समय पर आरोपियों की प्रोफाइल और उन पर चल रही कानूनी कार्यवाही के ब्योरे सार्वजनिक किए जाएंगे.
ट्रंप पर भड़के थे मैक्रों
इससे पहले मैक्रों ने फ्रांस में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का राजनीतिक लाभ उठाने वाले विदेशी नेताओं पर निशाना साधा था. दरअसल ट्रंप ने मैक्रों को नसीहत दी थी कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, फ्रांस को अपनी सीमाएं बंद कर देनी चाहिए. ट्रंप की इस नसीहत पर मैक्रों ने कहा था कि पिछले वीकेंड पर पेरिस और दूसरे फ्रांसीसी शहरों में हुई लूटपाट के बाद से बड़े पैमाने पर विदेशी स्तर पर सूचनाओं का हेरफेर किया गया है.
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उन्होंने कहा, 'और इसकी वजह से कई लोगों, जिनमें विदेशी नेता भी शामिल हैं, उनकी तरफ से ऐसे कमेंट्स आए हैं जो बेवकूफी भरे हैं और नामंजूर हैं. हमने AI से बनाई गई ऐसी तस्वीरें देखी हैं जिनमें फ्रांस की वो घटनाएं दिखाई गईं जो असल में कभी हुई ही नहीं थीं. कुछ लोगों ने ऐसे दावे किए कि हम प्रवासियों और उग्रवादियों की भीड़ से घिर चुके हैं, जो कि पूरी हालांकि सरासर झूठ है.'