अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से नाराज हैं, यह बात तो सभी जानते हैं. लेकिन अब वे ईरान के पड़ोसी देश ओमान से भी खफा नजर आ रहे हैं. ट्रंप ने इस हफ्ते फॉक्स न्यूज के रिपोर्टर ट्रे यिंगस्ट से कहा कि अगर ओमान "रास्ते में आया" तो अमेरिका उस पर बमबारी कर देगा. उन्होंने इस दौरान एक अपशब्द का भी इस्तेमाल किया. यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ऐसी धमकी दी हो. ओमान की तरफ से अभी तक इस पर कोई बयान नहीं आया है.
दरअसल ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि ओमान, ईरान के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक डील के करीब पहुंच गया है. दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. ट्रंप पर वैसे भी दबाव बना हुआ है. उन्होंने एक छोटी जंग और कमजोर ईरान का वादा किया था, साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बेहतर डील की भी बात कही थी. लेकिन इसके उलट ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ही बातचीत का नया हथियार बना लिया है और उस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर अपना नियंत्रण जताना शुरू कर दिया है, जिसे पहले सबके लिए खुला माना जाता था.
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अब लगभग थम चुकी है. इसी हफ्ते वह 60 दिन की अवधि खत्म हुई है, जो दोनों देशों के बीच हुए एक अंतरिम समझौते के बाद शुरू हुई थी. इस समझौते का मकसद आगे विस्तृत बातचीत का रास्ता खोलना था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाए जाने के कोई संकेत नहीं हैं. ट्रंप ने साफ कहा है कि फिलहाल ईरान के साथ कोई बातचीत तय नहीं है.
ऐसे में अभी सिर्फ ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट में शिपिंग को लेकर बातचीत चल रही है, जो पिछले कई हफ्तों से जारी है. ओमान ने इस बारे में सार्वजनिक रूप से ज्यादा कुछ नहीं कहा है, जबकि तेहरान का कहना है कि वे एक साझा बयान को अंतिम रूप दे रहे हैं. माना जा रहा है कि ईरान इस मामले में जल्दबाजी में नहीं है.
ओमान की करीब 50 लाख की आबादी है और यह खाड़ी क्षेत्र के सबसे शांत देशों में गिना जाता है. जंग शुरू होने के बाद से ओमान को निशाना नहीं बनाया गया है, जबकि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेज़बानी करने वाले अपने कई पड़ोसी देशों पर हमले किए हैं. ओमान ने अमेरिकी सेना को अपनी सुविधाओं का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी है, हालांकि अमेरिका का कहना है कि यूएई जैसे खाड़ी देशों की तुलना में ओमान के साथ उसके रक्षा संबंध छोटे स्तर के हैं.
ओमान हमेशा से ईरान के साथ बातचीत के पक्ष में रहा है और मध्यस्थता की कोशिशों में भी शामिल रहा है, हालांकि अब यह जिम्मेदारी कतर और पाकिस्तान संभाल रहे हैं. अंतरिम समझौते के बाद दुनिया का ध्यान ओमान की तरफ और बढ़ गया, क्योंकि इसके कुछ ही समय बाद ईरान ने ओमान के तट के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुज़रने वाले जहाज़ों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी.
अब ईरान की अगुवाई में जो बातचीत चल रही है, उसका मकसद स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के तरीके तय करना है, जिसमें दोनों देशों के अधिकार और ईरान के सुरक्षा हितों का भी ध्यान रखा जाएगा. इसमें शुल्क जैसी व्यवस्था भी शामिल हो सकती है. क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक इस संभावित डील में जहाज़ों को खाड़ी में दाखिल होने के लिए ईरान के नियंत्रण वाला रास्ता और बाहर निकलने के लिए ओमान के नियंत्रण वाला रास्ता इस्तेमाल करना होगा. लेकिन यह डील तभी संभव लगती है जब अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी रोक हटाए.
ओमान ने इस महीने की शुरुआत में इस बातचीत को सकारात्मक और रचनात्मक बताया था, साथ ही स्ट्रेट में जहाजों पर हो रहे हमलों की निंदा भी की थी. मंगलवार को ओमान के विदेश मंत्री और मिस्र के अपने समकक्ष के बीच हुई बैठक के बाद मिस्र ने कहा कि यह डील अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक और स्थायी समझौते की राह खोल सकती है.
फिलहाल यह साफ नहीं है कि ट्रंप की धमकी का असर ओमान और ईरान की बातचीत पर पड़ेगा या नहीं. ट्रंप की ताजा धमकी के बाद से ओमान की सरकारी न्यूज एजेंसी मस्कट स्टॉक एक्सचेंज, खेल और कॉफी-चाय के आयात जैसी खबरें ही दिखा रही है, जबकि विदेश मंत्रालय के बयान सामान्य कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित हैं. लेकिन इतना जरूर साफ है कि मिडटर्म चुनाव नज़दीक आने के साथ ट्रंप प्रशासन पर बढ़ता दबाव अब बाहर निकल रहा है, और पूरी दुनिया की नज़र इस बात पर है कि क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर हालात कुछ बेहतर होंगे.