इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि इजरायल और सीरिया के बीच सुरक्षा मामलों में यथास्थिति बनाए रखने पर सहमति बनी थी, जिसे सीरिया तोड़ने वाला था. सीरिया ने एलेप्पो के पास एक एयरबेस पर तुर्किए की सेना को तैनात करने की इजाजत दी, जिसे इजरायल ने अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताया था. इजरायल ने सीरिया को कई बार चेतावनी दी लेकिन सीरिया ने इसे नजरअंदाज कर दिया. इसी बीच मंगलवार सुबह इजरायल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया के इदलिब प्रांत में अबू दुहूर एयरबेस पर हवाई हमला किया. इस हमले में रनवे को नुकसान पहुंचा लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ.
सीरिया के सरकारी टीवी के मुताबिक इजरायल ने अबू दुहूर एयरबेस के रनवे पर आठ हमले किए. इसके अलावा कोई जानकारी नहीं दी गई. सीरिया के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया. इजरायली सेना और तुर्किए के अधिकारियों की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.
सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक इस एयरबेस पर पहले विदेशी लड़ाके रहते थे, जिन्हें हाल ही में वहां से हटने को कहा गया था. तुर्किए, जो सीरिया की सरकार का बड़ा समर्थक है, इस एयरबेस को फिर से चालू करने का काम कर रहा था. यह एयरबेस सीरिया के संघर्ष के दौरान सालों से बंद पड़ा था, जिसमें करीब पांच लाख लोगों की जान गई थी.
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तुर्किए में अमेरिका के राजदूत और सीरिया के लिए विशेष दूत टॉम बैराक ने कहा कि अमेरिका को इस हमले से गहरी चिंता है और यह इलाके की स्थिरता के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की सरकार ने न तो आक्रामक रुख अपनाया है और न ही किसी प्रॉक्सी फोर्स को बढ़ावा दिया है, बल्कि वह इजरायल के साथ तनाव कम करने की बात कहती रही है.
दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सरकार गिरने के बाद से इजरायल और तुर्किए के बीच सीरिया को लेकर तनाव बढ़ा है. असद के जाने के बाद इजरायल ने सीरिया में सैकड़ों हवाई हमले किए थे, ताकि सीरियाई सेना के हथियार नई सरकार के हाथ न लगें. पिछले साल दमिश्क के पास एक ड्रोन हमले में आठ सैनिक मारे गए थे. नई सीरियाई सरकार का कहना है कि वह इजरायल से टकराव नहीं चाहती, लेकिन इजरायल अब भी उस पर भरोसा नहीं करता.