नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हालात पहले ही मुश्किल बने हुए हैं, इसी बीच सीमा के पास बनी इस झील ने चिंता और बढ़ा दी है. इस झील का निर्माण ग्लेशियर टूटने के बाद हुए भूस्खलन से हुआ है, जोकि अब ओवरफ्लो होने लगी है . अगर पानी का दबाव बढ़ा और झील का बांधनुमा हिस्सा टूटा, तो नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा पैदा हो सकता है.
ये झील चीन के तिब्बत क्षेत्र में नेपाल के पास ग्यिरोंग पोर्ट पर बनी है. CCTV News की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई-एल्टीट्यूड ग्लेशियर के टूटने के बाद बड़े पैमाने पर मलबा नीचे आया, जिससे पानी का रास्ता रुक गया और बैरियर लेक बन गई. अब इस लेक में कुल 25 लाख घन मीटर से ज्यादा पानी जाम होने की आशंका है. झील का पानी लगातार फैल रहा है और इसके दोनों किनारों पर जमीन और मलबा अस्थिर दिखाई दे रहा है.
अधिकारियों के मुताबिक, झील के अचानक टूटने का खतरा काफी ज्यादा है. वहीं लगातार बारिश इस खतरे को और बढ़ा रही है, क्योंकि बारिश के कारण चट्टानें और मिट्टी ढीली हो गई हैं.
नेपाल के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
यह झील ग्यिरोंग पोर्ट से करीब 1000 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित है. ऐसे में अगर पानी अचानक नीचे की ओर तेजी से बहता है, तो रास्ते में फ्लैश फ्लड और नए भूस्खलन हो सकते हैं. इसका सीधा असर नीचे की ओर चल रहे राहत और बचाव अभियानों पर पड़ सकता है. नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले में इसका असर पहले ही दिखाई देने लगा है.
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, झील के ओवरफ्लो होने की खबर के बाद अधिकारियों ने करीब 90 मिनट के लिए हेलीकॉप्टर से चलाए जा रहे बचाव अभियान को रोक दिया. साथ ही रसुआ में भी लोगों को सुरक्षित ऊंचाई की ओर जाते हुए देखा गया. हालांकि, बाद में रेस्क्यू ऑपरेशन फिर से शुरू कर दिया गया.
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ड्रोन से हो रही निगरानी
हालात को देखते हुए चीन की एक विशेषज्ञ टीम ने ड्रोन, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और दूसरे उपकरणों की मदद से झील और उसके आसपास के क्षेत्र का सर्वे किया है. टीम ने करीब छह किलोमीटर दूर से ड्रोन के जरिए बैरियर की तस्वीरें लेकर उसका 3D मॉडल तैयार किया. शुरुआती माप के मुताबिक, पानी को रोकने वाला यह बैरियर करीब 150 मीटर लंबा और 40 से 50 मीटर ऊंचा है.
भारी मशीनों को वहां पहुंचाना भी मुश्किल है, क्योंकि आसपास खड़ी चट्टानें और बेहद ढलान वाले रास्ते हैं. फिलहाल अधिकारियों और विशेषज्ञों ने लगातार निगरानी करने का फैसला किया है. आने वाले दिनों में बारिश, झील के जलस्तर और आसपास के अस्थिर मलबे पर नजर रखी जाएगी. विशेषज्ञों की चिंता है कि ज्यादा बारिश होने पर झील में छोटे स्तर पर टूटन भी हो सकती है, जिससे नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए खतरा और बढ़ सकता है.