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35 साल बाद बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव हो रहा, मिर्जा फखरुल-ओली अहमद रेस में

बांग्लादेश में आज लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होगा. पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद खाली हुए पद के लिए सत्तारूढ़ बीएनपी के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और विपक्षी गठबंधन के कर्नल ओली अहमद आमने-सामने हैं.

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बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव. (photo: ITG)
बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव. (photo: ITG)

बांग्लादेश के चुनावी इतिहास में ये 35 साल बाद पहला मौका है. जब राष्ट्रपति पद के लिए संसद में वास्तविक वोटिंग हो रही है, जिसमें सांसद सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 पार्टियों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद के बीच प्रमुख मुकाबला है. बांग्लादेशी चुनाव आयोग के अनुसार, राष्ट्रपति पद के लिए 20 अगस्त को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा.

दरअसल, अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी सहयोगी मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पिछले महीने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले ही स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था. वर्तमान में संसद स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं. बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, देश के राष्ट्रपति का पद खाली होने के 90 दिनों के अंदर नए राष्ट्रपति का चुनाव होना अनिवार्य है. इसी कावायत के तहत बांग्लादेश में 35 साल के लंबे अंतराल के बाद पहली बार राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान हो रहा है.

23वें राष्ट्रपति चुने जा सकते हैं फखरुल

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री और बीएनपी के चेयरमैन तारिक रहमान ने 78 वर्षीय मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को सत्तारूढ़ पार्टी का राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी घोषित किया है. 12 फरवरी को हुए चुनावों में बीएनपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लंबे वक्त बाद वापसी की है और संसद में पार्टी के पास दो-तिहाई बहुमत है. इस मजबूत संख्या बल के कारण आलमगीर की स्थिति बेहद मजबूत मानी जा रही है और वह सीधे तौर पर चुनाव जीतने की स्थिति में हैं. बताया जा रहा है कि वह बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति चुने जा सकते हैं.

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21 फरवरी को होगा शपथग्रहण समारोह

सचिवालय और संसद सचिवालय के सूत्रों के हवाले से 'द डेली स्टार' ने जानकारी दी है कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे. बांग्लादेशी चुनाव आयोग ने 16 अगस्त को दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध घोषित किया था. 78 वर्षीय आलमगीर सत्ताधारी BNP के उम्मीदवार हैं, जबकि दूसरी ओर मुकाबले में खड़े उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद 'बीर बिक्रम' लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष हैं और विपक्षी दलों के साझा प्रत्याशी के तौर पर चुनौती पेश कर रहे हैं.

फखरुल का राजनीतिक सफर

अर्थशास्त्री रहे मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पूर्वी पाकिस्तान के दौर में वामपंथी छात्र कार्यकर्ता के तौर पर की थी. 1990 के दशक की शुरुआत में बीएनपी में शामिल होने के बाद वह कृषि और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री रहे. वो 2011 से कार्यवाहक और 2016 से पार्टी के महासचिव रहे हैं. उन्होंने खालिदा जिया की जेल और तारिक रहमान के विदेश प्रवास के दौरान पार्टी की कमान संभाली थी. इस साल 12 फरवरी के चुनाव के बाद उन्हें स्थानीय सरकार मंत्री बनाया गया था.

बता दें कि बांग्लादेश की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति मुख्य रूप से एक औपचारिक संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जिनके पास प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तथा सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर का अधिकार होता है. आम चुनावों की निगरानी के लिए हाल ही में दोबारा लागू की गई कार्यवाहक (केयरटेकर) सरकार सिस्टम के तहत राष्ट्रपति के अधिकार सशस्त्र बलों के संदर्भ में काफी बढ़ जाते हैं. इसके साथ ही बीएनपी ने अपने घोषणापत्र में संविधान संशोधन के जरिए राष्ट्रपति को और अधिक शक्तियां देने का वादा किया है.

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