कानपुर के घाटमपुर के सरकारी अस्पताल में 10 मई को एक बच्चे का जन्म हुआ. मां मंजू और उसका परिवार खुश था. लेकिन कुछ ही घंटे बाद एक महिला अस्पताल पहुंची, परिवार से दोस्ती की, बच्चे को देखने के बहाने भरोसा जीता और फिर नवजात को लेकर भागने लगी.
महिला बच्चे को झोले में डालकर अस्पताल से बाहर निकल रही थी कि एक रिश्तेदार की नजर पड़ गई. शोर मचा. लोग पीछे भागे और महिला को पकड़ लिया गया. बच्चा बरामद हुआ और महिला जेल चली गई. उस वक्त कहानी यहीं खत्म होती दिख रही थी. लेकिन पुलिस ने महिला का मोबाइल खंगाला तो एक नंबर बार-बार सामने आया.
ये नंबर बिजली विभाग के एक SDO का था. इसके बाद पुलिस की जांच तीन महीने पीछे गई और एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसमें पुलिस के मुताबिक दो बेटियों के पिता SDO पर बेटे की चाहत में 5 लाख रुपये देकर बच्चा चोरी करवाने की साजिश रचने का आरोप है.

10 मई को कानपुर के घाटमपुर स्थित सरकारी अस्पताल में मंजू ने एक बेटे को जन्म दिया था. उसी दिन अस्पताल में गीता नाम की महिला पहुंची. पुलिस के मुताबिक, उसने पहले मंजू के परिवार से बातचीत शुरू की. उसने बताया कि उसकी बहन की भी अस्पताल में डिलीवरी होने वाली है. बातचीत के दौरान गीता ने मंजू के परिवार से कहा कि बाहर उनकी कोई रिश्तेदार आई हैं, लेकिन उनका एक्सीडेंट हो गया है. परिवार के कुछ लोग अस्पताल से बाहर चले गए.
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कुछ देर बाद गीता फिर मंजू के पास पहुंची. उसने कहा कि आपकी रिश्तेदार बच्चे को देखना चाहती हैं. परिवार को उस पर भरोसा हो गया. उन्होंने बच्चा गीता को दे दिया. गीता ने बच्चे को लिया और वार्ड से बाहर निकल गई. लेकिन अस्पताल में एक महिला की नजर उस पर पड़ गई. उसने देखा कि गीता बच्चे को अपने झोले में रख रही है. शोर कर दिया तो गीता भागने लगी, लेकिन अस्पताल के लोगों ने उसे पकड़ लिया. बच्चा भी बरामद कर लिया गया. पुलिस आई और गीता को गिरफ्तार कर लिया.
पहले लगा अकेली महिला का खेल है
गिरफ्तारी के बाद गीता ने खुद को मानसिक रूप से बीमार बताने की कोशिश की. लेकिन पुलिस ने जांच के बाद उसे बच्चा चोरी के मामले में जेल भेज दिया. इसके बाद पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए गीता का मोबाइल फोन खंगाला. और यहीं से कहानी ने यू-टर्न लिया. कॉल डिटेल में एक व्यक्ति से उसकी लगातार बातचीत सामने आई.
ये व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि बिजली विभाग में SDO के पद पर तैनात रामकुमार था. पुलिस के मुताबिक, दोनों की बातचीत बच्चा चोरी की घटना से पहले भी होती रही थी. अब सवाल था कि आखिर एक बिजली विभाग के अधिकारी का बच्चा चोरी के आरोपी महिला से क्या कनेक्शन था?
जांच में पुलिस को पता चला कि रामकुमार की पहले कानपुर देहात के पुखरायां में पोस्टिंग थी. उसी दौरान उसकी गीता से जान-पहचान हुई थी. बाद में रामकुमार की पोस्टिंग हमीरपुर जिले के मौदहा में SDO के पद पर हो गई. पुलिस की जांच में सामने आया कि रामकुमार की दो बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है.

आरोप है कि इसी वजह से वह बेटे की तलाश में था. पुलिस के मुताबिक, गीता ने कथित तौर पर रामकुमार से कहा कि वह उसे 5 लाख रुपये में बेटा दिला सकती है. इसके बाद बच्चे की तलाश शुरू हुई. और निशाना बना घाटमपुर का सरकारी अस्पताल.
5 लाख रुपये के बदले बच्चा?
पुलिस के मुताबिक, गीता ने रामकुमार को बच्चा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था. कथित तौर पर इसके लिए 5 लाख में डील हुई. 10 मई को मौका मिला. अस्पताल में एक नवजात बच्चा मौजूद था. गीता ने परिवार का भरोसा जीता और बच्चे को लेकर भागने की कोशिश की. लेकिन अस्पताल के लोगों ने उसे पकड़ लिया.
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गीता की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल की जांच शुरू की. कॉल डिटेल निकाली गई. बातचीत के पैटर्न को देखा गया. रामकुमार और गीता के बीच लगातार संपर्क की जानकारी मिली. पुलिस ने इसके बाद रामकुमार की भूमिका की जांच शुरू की. जांच में मिले मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने करीब तीन महीने बाद रामकुमार को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस साजिश में सिर्फ रामकुमार और गीता शामिल थे या इनके पीछे कोई और नेटवर्क भी था? क्या इससे पहले भी किसी बच्चे को इसी तरह हासिल करने की कोशिश हुई थी? इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच से सामने आएंगे.
एसीपी कृष्ण कुमार के मुताबिक, बच्चा चोरी के मामले में गीता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था. विवेचना के दौरान उसके मोबाइल की कॉल डिटेल और दूसरे महत्वपूर्ण सबूत मिले. इन्हीं के आधार पर SDO रामकुमार को गिरफ्तार किया गया है.
इस कहानी में अहम बात ये है कि 10 मई को अगर मंजू की जेठानी की नजर गीता पर नहीं पड़ती, तो शायद नवजात बच्चा अस्पताल से बाहर निकल चुका होता. लेकिन उस दिन एक नजर ने बच्चा बचा लिया. इसके बाद पुलिस ने मोबाइल देखा तो एक नंबर मिला. उस नंबर से एक और नाम सामने आया. और तीन महीने की जांच के बाद बिजली विभाग का एक SDO जेल पहुंच गया.