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तीन साल पहले लग गया था ब्रेक... कोर्ट से बरी बृजभूषण क्या फिर चुनावी पिच पर उतरेंगे?

महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह बरी हो गए हैं. तीन साल पहले महिला पहलवानों के आरोप लगाए जाने के चलते बृजभूण सिंह के राजनीतिक सफर में ब्रेक लग गया था, लेकिन अब बरी होने के बाद क्या फिर से चुनावी पिच पर उतरेंगे?

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बृजभूषण शरण सिंह को सियासी राहत (Photo-ITG)
बृजभूषण शरण सिंह को सियासी राहत (Photo-ITG)

महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को अदालत से बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए बृजभूषण सिंह और नरेंद्र तोमर को यौन शोषण मामले में बरी कर दिया है. फैसले पर बृजभूषण सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मैं पहले दिन से ही कह रहा था कि अगर एक भी आरोप सिद्ध हुआ तो मैं खुद ही फांसी पर चढ़ जाउंगा, आज कोर्ट ने मेरी बात पर मुहर लगात हुए मुझे बाइज्जत बरी कर दिया है.

यौन शोषण के आरोप लगने के चलते ही बृजभूषण शरण सिंह के राजनीतिक सफर में सियासी ब्रेक लग गया था. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बृजभूषण शरण सिंह की जगह पर उनके बेटे करण भूषण को टिकट दिया था. 

अब तीन साल के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है. ऐसे में अब सवाल उठने लगे हैं कि कोर्ट से बरी होने के बाद बृजभूषण क्या फिर चुनावी पिच पर किस्मत आजमाने उतरेंगे? 

यौन शोषण मामले में बृजभूषण सिंह बरी
लोकसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे. इस मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों ने धरना प्रदर्शन पर बैठे थे, जिसके चलते बीजेपी पर सियासी दबाव बढ़ गया था. यौन शोषण के आरोप में घिरे होने के चलते बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह को टिकट नहीं दिया था. 

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बृजभूषण सिंह की जगह पर बीजेपी ने उनके बेटे करण भूषण को उम्मीदवार बनाया था. यह बृजभूषण के लिए बड़ा सियासी झटका था, लेकिन दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में सोमवार को फैसला सुनाया. महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले को लेकर अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया है. कोर्ट से बरी होते ही बृजभूषण सिंह ने कहा कि अदालत ने उनको बाइज्जत बरी कर दिया है. 

अदालत से फैसला आने के तुरंत बाद बृजभूषण सिंह ने कहा कि जिस दिन मुझ पर आरोप लगा था, उस वक्त से मैं कह रहा था कि अगर आरोप सही साबित होता है तो मैं खुद फांसी पर लटक जाउंगा. अदालत ने मुझे बरी कर दिया है. बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मैंने जो कहा था वो सच साबित हुआ. कोर्ट ने मुझे बाइज्जत बरी किया है. यह मेरे और मेरे समर्थकों के लिए खुशी की बात है. 'होइहि सोइ जो राम रचि राखा'. 

बृजभूषण क्या फिर चुनावी पिच पर उतरेंगे?

पूर्वांचल की सियासत में बृजभूषण सिंह एक मजबूत चेहरा माने जाते हैं.  देवीपाटन के इलाके में उनकी सियासी ताकत बोलती है. बृजभूषण सिंह 6 बार के सांसद रहे हैं, लेकिन उन्हें 2024 में टिकट नहीं मिला. कैसरगंज, गोंडा और बलरामपुर क्षेत्र में दबदबा है. अब कोर्ट से बरी होने के बाद क्या बृजभूषण शरण सिंह फिर से चुनावी पिच पर उतरेंगे, ये सवाल इसीलिए भी उठ रहा है कि वो सियासी तौर पर एक्टिव हैं. 

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सूबे में ठाकुर राजनीति के चेहरा बृजभूषण शरण सिंह माने जाते हैं. वो गोंडा और कैसरगंज बेल्ट से बाहर निकलकर उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी पकड़ बनाए रखने की कवायद में रहते हैं. 

गोंडा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि अब मैं चुनाव से ऊपर उठ चुका हूं. मैं सांसद के पद से भी ऊपर हूं. आपने मुझे एक ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है. अब मेरे लिए सांसद का पद मायने नहीं रखता, लेकिन एक बार लोकसभा जाऊंगा जरूर. साजिश करने वालो को जवाब देने जरूर जाऊंगा. इस तरह से 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ने का संकेत पहले ही दे चुके हैं.

हालांकि, किस सीट से और किस पार्टी से लड़ेंगे, इस बात को सार्वजनिक नहीं किया था. उन्होंने कहा था कि मैं कहां से जाऊंगा यह तो सिर्फ भगवान जानता है.  बृजभूषण सिंह के बेटे सांसद बेटे करण भूषण सिंह ने भी कहा था कि उनके साथ ही उनके पिता भी 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे.

बृजभूषण शरण सिंह का सियासी सफर

बृजभूषण शरण सिंह यूपी के गोंडा जिले के बिशनोहर गांव के रहने वाले हैं. आठ जनवरी, 1957 को बृजभूषण का जन्म हुआ और किशोरावस्था में ही अखाड़े में शामिल हो गए थे और स्थानीय स्तर पर अच्छी कुश्ती लड़ने वालों में जाने जाते थे, इसके बाद उन्होंने 1980 के दशक में छात्र राजनीति की शुरुआत की. राजनीति में उनका करियर अयोध्या के साकेत कॉलेज में छात्र जीवन के दौरान शुरू हुआ. 1988 में बीजेपी में शामिल हुए. जब राम मंदिर को लेकर आंदोलन हुआ, तो उनकी उग्र हिंदुत्व की छवि ने उन्हें क्षेत्र में लोकप्रिय बना दिया

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राम मंदिर आंदोलन के दौरान बृजभूषण जैसे युवाओं ने ख़ुद को राजनेताओं की तरह पेश किया, जिसमें वह कामयाब भी हुए. 1991 में राम मंदिर आंदोलन अपने उफान पर था. बृजभूषण सिंह ने अपना पहला लोकसभा चुनाव बीजेपी की टिकट पर लड़ा और कांग्रेस के आनंद सिंह को क़रीब एक लाख मतों से हराया. गोंडा, बलरामपुर और कैसरगंज लोकसभा सीटों से छह बार सांसद चुने गए, लेकिन 2024 में उन्हें टिकट नहीं मिला. 

 

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