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सोलर मशीनों से चमकी अयोध्या की महिलाओं की किस्मत, हर महीने कमा रहीं 30 हजार

अयोध्या के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं सोलर ऊर्जा की मदद से अपना कारोबार चला रही हैं. आरती, देवकी दुबे और क्रांति देवी ने समूह से करीब 30 हजार रुपये का ऋण लेकर आटा चक्की और तेल निकालने की मशीनें लगवाईं. इन व्यवसायों से उन्हें हर महीने 15 हजार से 30 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है.

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सोलर मशीनों की मदद से महिलाएं घर बैठे अच्छी कमाईं कर रहीं है. (Photo-ITG)
सोलर मशीनों की मदद से महिलाएं घर बैठे अच्छी कमाईं कर रहीं है. (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश के अयोध्या के ग्रामीण इलाकों में सोलर ऊर्जा महिलाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता बन रही है. स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं करीब 30 हजार रुपये का ऋण लेकर आटा चक्की और तेल निकालने का काम शुरू कर रही हैं. इससे उन्हें बिजली कटौती से राहत मिली है. साथ ही परिवार की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिल रही है.

आरती, देवकी दुबे और क्रांति देवी इसकी मिसाल हैं. इन महिलाओं  का कहना है कि उनके कारोबार से हर महीने 15 हजार से 30 हजार रुपये तक की कमाई हो रही है.

30 हजार रुपये का लोन लेकर शुरू किया काम

गोसाईगंज विधानसभा के हैदरगंज ब्लॉक की रहने वाली आरती ने स्वयं सहायता समूह से 30 हजार रुपये का ऋण लेकर सोलर मशीन लगवाई. वह बताती हैं कि पहले बारिश के दौरान बिजली कटौती से काम रुक जाता था. अब सोलर मशीन से दिन में आटा पीसने और तेल निकालने का काम आसानी से हो जाता है.

आरती ने बताया कि, इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी होती है. उनके यहां एक व्यक्ति को रोजगार भी मिला है. वह दूसरी महिलाओं को भी इस काम के बारे में बताती हैं और उन्हें योजना की जानकारी लेने के लिए प्रेरित करती हैं.

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अयोध्या के मिल्कीपुर क्षेत्र के कहुआ गांव की देवकी दुबे भी सोलर ऊर्जा से आटा चक्की चलाती हैं. उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह की दूसरी महिलाओं से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने 30 हजार रुपये उधार लेकर मशीन लगवाई. इससे हर महीने करीब 20 से 30 हजार रुपये की कमाई हो जाती है.

देवकी घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ कारोबार भी चलाती हैं. उनकी सास क्रांति देवी भी सोलर दीदी हैं. दोनों मिलकर इस काम को संभालती हैं. परिवार के दूसरे सदस्य भी उनका साथ देते हैं. देवकी समूह की बैठकों में दूसरी महिलाओं को भी इस रोजगार के बारे में बताती हैं.

आटा चक्की और पशुपालन से चल रहा परिवार

क्रांति देवी के यहां आटा पीसने और तेल निकालने का काम होता है. वह बताती हैं कि पहले बिजली समय पर नहीं आती थी. इससे काम प्रभावित होता था. सोलर मशीन लगने के बाद उन्हें काफी राहत मिली है. उनके मुताबिक, इस कारोबार से हर महीने करीब 25 से 30 हजार रुपये की आमदनी होती है.

यह भी पढ़ें: सहारनपुर में सोलर पंप ने बदली किसानों की किस्मत, सिंचाई से बढ़ी फसल, बिजली का इंतजार खत्म

परिवार ने गाय भी पाल रखी है. दूध बेचकर अतिरिक्त कमाई होती है. इससे घर का खर्च चलाने और बच्चों की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है. क्रांति देवी गांव की दूसरी महिलाओं को भी सोलर मशीनों से रोजगार शुरू करने की जानकारी देती हैं.

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इन महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को रोजगार शुरू करने में मदद कर रहे हैं. समूह के जरिए उन्हें ऋण और काम से जुड़ी जानकारी मिल रही है. सोलर मशीनों से बिजली कटौती के बावजूद दिन में काम करना आसान हुआ है.

हालांकि, महिलाओं ने 30 हजार रुपये की राशि ऋण के तौर पर मिलने की बात कही है. इसे सरकारी अनुदान नहीं माना जा सकता. सोलर मशीनों की कुल लागत और सरकारी सहायता से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

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