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4 करोड़ का चेक, खाते में 10 हजार भी नहीं... राम मंदिर ट्रस्ट के सामने आया चौंकाने वाला मामला

श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को एक दानदाता ने सार्वजनिक रूप से 4 करोड़ और 10 हजार रुपये के दो चेक दिए. बैंक में चेक भेजे जाने पर पता चला कि दानदाता के खाते में बेहद कम रकम थी. यहां तक कि 10 हजार रुपये के चेक के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं था. ट्रस्ट फिलहाल मामले में FIR कराने के पक्ष में नहीं है.

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चेक बाउंस मामले में FIR की संभावना कम. (फाइल फोटो-ITG)
चेक बाउंस मामले में FIR की संभावना कम. (फाइल फोटो-ITG)

अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को एक दानदाता ने 4 करोड़ रुपये का चेक दिया, लेकिन जब उसे बैंक में भुगतान के लिए भेजा गया तो खाते में पर्याप्त रकम ही नहीं मिली. हैरानी की बात यह रही कि दानदाता की ओर से दिया गया 10 हजार रुपये का दूसरा चेक भी पर्याप्त बैलेंस नहीं होने के कारण पूरा नहीं हो सका. दानदाता ने सार्वजनिक रूप से श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को दो चेक सौंपे थे. इनमें एक चेक 4 करोड़ रुपये का था, जबकि दूसरा 10 हजार रुपये का. बड़ी रकम के दान का चेक सामने आने के बाद ट्रस्ट की ओर से इसे बैंक में भुगतान के लिए भेजा गया.

जब बैंक स्तर पर चेक की जांच हुई तो पता चला कि जिस खाते से 4 करोड़ रुपये का चेक जारी किया गया था, उसमें बेहद कम रकम मौजूद थी. खाते में इतनी भी राशि नहीं थी कि 10 हजार रुपये का दूसरा चेक भी आसानी से भुगतान हो सके. इस जानकारी के सामने आने के बाद ट्रस्ट से जुड़े लोग भी हैरान रह गए. पूर्व अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि वह खुद बैंक गए थे. उनका उद्देश्य दानदाता से मुलाकात करना और इतनी बड़ी राशि के योगदान के लिए उसका धन्यवाद करना था. लेकिन बैंक पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि खाते में पर्याप्त रकम ही नहीं है.

कृष्ण मोहन के मुताबिक, दानदाता की ओर से 4 करोड़ रुपये का चेक दिए जाने के बाद स्वाभाविक रूप से उम्मीद थी कि खाते में उसके अनुरूप रकम मौजूद होगी. लेकिन बैंक से मिली जानकारी ने इस उम्मीद को गलत साबित कर दिया. खाते में नगण्य बैलेंस था और 10 हजार रुपये के चेक के लिए भी पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं थी. इस पूरे मामले में अब एक और सवाल यह है कि ट्रस्ट की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाएगी. ट्रस्ट ने संकेत दिया है कि वह इस मामले में FIR कराने की संभावना नहीं देख रहा है. इसकी वजह यह बताई गई है कि दान स्वैच्छिक होता है.

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करोड़ों के दान का चेक बाउंस

यानी किसी व्यक्ति की ओर से ट्रस्ट को दान देना उसकी अपनी इच्छा पर निर्भर करता है. ऐसे में चेक जारी होने और उसके भुगतान के समय खाते में पर्याप्त रकम नहीं मिलने के मामले को लेकर ट्रस्ट फिलहाल आपराधिक कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रहा है. हालांकि, इस घटना के बाद भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए प्रक्रिया तय करने की जरूरत महसूस की गई है. जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट अगले दो दिनों के भीतर ऐसे दान चेक मामलों को संभालने के लिए एक SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार कर सकता है.

इस SOP में यह तय किया जा सकता है कि बड़ी रकम के दान के रूप में मिलने वाले चेक के मामलों को किस तरह संभाला जाए. हालांकि, अभी इसकी विस्तृत प्रक्रिया सामने नहीं आई है. वहीं, श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने अभी तक अपना आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त नहीं किया है. ट्रस्ट के नए महासचिव इस चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे. ट्रस्ट की कोशिश ऐसे व्यक्ति को प्रवक्ता की जिम्मेदारी देने की है, जो ट्रस्ट के कामकाज को विस्तार से समझता हो और उसके काम की गति और भावना के साथ पूरी तरह तालमेल रखता हो.

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ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मुताबिक, प्रवक्ता की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसे संगठन के कामकाज की पूरी जानकारी होने के साथ उसकी कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं को भी समझना होगा. नए महासचिव के कार्यभार संभालने के बाद प्रवक्ता के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात कही गई है. फिलहाल 4 करोड़ रुपये के दान का चेक बाउंस होने का मामला चर्चा में है. एक ओर दानदाता ने सार्वजनिक रूप से बड़ी रकम का चेक सौंपा, वहीं बैंक में भुगतान के लिए भेजे जाने पर खाते में पर्याप्त रकम नहीं मिली. इतना ही नहीं, 10 हजार रुपये का दूसरा चेक भी पर्याप्त बैलेंस के अभाव में भुगतान योग्य नहीं पाया गया.

भुगतान के वक्त खाते में नहीं मिली पर्याप्त रकम

कृष्ण मोहन के लिए भी यह अनुभव निराशाजनक रहा. वह खुद बैंक इस उम्मीद से पहुंचे थे कि इतनी बड़ी राशि देने वाले दानदाता से मुलाकात कर उसका आभार जताएंगे. लेकिन वहां उन्हें खाते में नगण्य राशि होने की जानकारी मिली. अब ट्रस्ट इस तरह के मामलों के लिए अपनी प्रक्रिया तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है. अगले दो दिनों में SOP तैयार होने की उम्मीद है. वहीं, आधिकारिक प्रवक्ता की नियुक्ति का फैसला नए महासचिव के स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा.
 

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