अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी कामकाज की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. लंबे समय से व्यवस्था में फेरबदल की चर्चा चल रही थी, जिस पर बुधवार को हुई बैठक में मुहर लग गई. अब तक ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे गोविंद देव गिरि को नया महासचिव बनाया गया है, जबकि दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष चुना गया है. इसके साथ ही मंदिर से जुड़े कामकाज को बेहतर तरीके से संभालने के लिए पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO का पद भी तय किया गया है.
यह बैठक कई मायनों में खास रही. चंपत राय और अनिल मिश्रा के हटने तथा विमलेंद्र मोहन के निधन के बाद ट्रस्ट में तीन जगहें खाली हुई थीं. इन जगहों पर नए सदस्यों की नियुक्ति के साथ ही ट्रस्ट की आगे की जिम्मेदारियां भी तय की गईं. बैठक के बाद ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने इन फैसलों की जानकारी दी.
ट्रस्ट के इस बदलाव में सिर्फ नए चेहरे ही नहीं आए हैं, बल्कि कामकाज की जिम्मेदारियों में भी बदलाव हुआ है. 16 लोगों के इंटरव्यू के बाद तीन नामों को शॉर्टलिस्ट किया गया था. इनमें पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र जितेंद्र मिश्र, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज शामिल थे. आखिरकार जितेंद्र मिश्र के नाम पर मुहर लगी और उन्हें ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया. वायुसेना में करीब 39 साल का अनुभव रखने वाले जितेंद्र मिश्र अब मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे.
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तीन नए सदस्य भी ट्रस्ट में शामिल
स्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है. इनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका और शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव शामिल हैं. मदन मोहन पांडेय राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में रामलला की कानूनी टीम का हिस्सा रहे हैं. वहीं, डॉ. निर्मला यादव हिंदी और संस्कृत में परास्नातक हैं. वह शिकोहाबाद की रहने वाली हैं और उन्हें विश्वविद्यालय में करीब 15 साल तक काम करने का अनुभव है. जबकि, महेश भागचंदका को ट्रस्ट में सदस्य बनाए जाने के साथ ही उन्हें नई जिम्मेदारी भी दी गई है. उन्हें ट्रस्ट का नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है.
गोविंद देव गिरि को अब ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया है. वह इससे पहले कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. यानी ट्रस्ट में एक तरफ नए सदस्यों को जगह मिली है, वहीं दूसरी तरफ पुराने सदस्यों की जिम्मेदारियां भी बदली गई हैं.
कैश चढ़ावे की गिनती पर भी चर्चा
बैठक में कैश चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई. ट्रस्ट चाहता है कि इसमें इंसानी दखल कम से कम हो. इसके लिए दो बैंकों और IIT की ओर से दिए गए सुझावों पर विचार किया जाएगा. कोशिश है कि चढ़ावे की गिनती से लेकर उसके हिसाब-किताब तक की पूरी प्रक्रिया को ज्यादा आसान और व्यवस्थित बनाया जाए.
बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के खातों को भी मंजूरी दी गई. इस साल ट्रस्ट को 237 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि 11 करोड़ रुपये खर्च हुए. मंदिर निर्माण और दूसरे निर्माण कार्यों पर 425 करोड़ रुपये खर्च किए गए. 31 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के पास 1,882 करोड़ रुपये की रकम उपलब्ध थी.
इसके अलावा वित्तीय गड़बड़ियों की जांच कर रही SIT का दायरा बढ़ाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी चर्चा हुई. ट्रस्ट ने कहा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पूरे तथ्य सामने आएंगे और इस मामले को लेकर लोगों में बना भ्रम दूर होगा.
इन फैसलों के साथ राम मंदिर ट्रस्ट में जिम्मेदारियों का नया बंटवारा तय हो गया है. अब गोविंद देव गिरि महासचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे, महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष होंगे, जबकि जितेंद्र मिश्र ट्रस्ट के पहले CEO के तौर पर काम करेंगे. नए सदस्यों के शामिल होने के बाद ट्रस्ट के सामने मंदिर निर्माण के साथ-साथ प्रशासन और दूसरे कामकाज को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी.