आपके घर में रोटी जिस आटे से बनती है, उसकी गुणवत्ता को लेकर आगरा से आई यह खबर चौंकाने वाली है. फतेहपुर सीकरी में खाद्य विभाग ने एक ऐसे प्रतिष्ठान पर छापा मारा, जहां तेल और मसालों के कारोबार का लाइसेंस था, लेकिन आटा तैयार किया जा रहा था. जांच के दौरान मिलावट के लिए वहां करीब 1,800 किलो सेलखड़ी मिली, इसके साथ ही 1,350 किलो आटा भी मिला. आटे में मिलावट की आशंका पर नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं.
मामला जौतना डाबर रोड स्थित समृद्धि ऑयल मिल का है. खाद्य विभाग की कार्रवाई के बाद मौके पर आटे का काम बंद करा दिया गया और मशीनों को सील कर दिया गया. विभाग अब नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि जब्त किए गए आटे में वास्तव में मिलावट की गई थी या नहीं. खाद्य विभाग की इस कार्रवाई में सिर्फ सेलखड़ी की बरामदगी ही चर्चा का विषय नहीं है. जांच के दौरान प्रतिष्ठान के लाइसेंस और मौके पर चल रहे कारोबार में भी अंतर मिला. विभाग के मुताबिक संबंधित फर्म के पास खाद्य तेल के लिए फुटकर विक्रेता और खाद्य मसालों के लिए थोक विक्रेता की श्रेणी में लाइसेंस था. इसके बावजूद मौके पर आटा निर्माण का काम होता मिला. यानी जिस काम के लिए खाद्य कारोबार का लाइसेंस लिया गया था, उसके अलावा वहां दूसरी खाद्य सामग्री तैयार की जा रही थी. इसी के बाद खाद्य विभाग ने मौके पर मौजूद सामग्री और आटा निर्माण की पूरी प्रक्रिया को जांच के दायरे में लिया.
1,800 किलो सेलखड़ी ने बढ़ाई चिंता
कार्रवाई के दौरान टीम को करीब 1,800 किलो सेलखड़ी मिली. इसकी अनुमानित कीमत करीब 30,150 रुपये बताई गई है. इसके साथ ही करीब 13.5 कुंतल यानी 1,350 किलो आटा भी टीम ने कब्जे में लिया. खाद्य विभाग की नजर में मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि मौके पर बड़ी मात्रा में सेलखड़ी और आटा दोनों मिले. विभाग को आशंका है कि सेलखड़ी पाउडर का इस्तेमाल आटे में मिलावट के लिए किया जा रहा था. हालांकि अभी इस बात की प्रयोगशाला जांच बाकी है.
आटे में क्यों मिलाई जाती है सेलखड़ी
एफएसडीए के लोगों का कहना है कि आटे में सेलखड़ी की मिलावट चमक बढ़ाने के लिए होती है. खराब या घटिया क्वालिटी के गेहूं से बने आटे का रंग सफेद करने के लिए सेलखड़ी मिलाते हैं. इसके साथ ही आटे की कुल मात्रा और वजन को भारी करने के लिए भी इसकी मिलावट होती. सेलखड़ी एक तरह का प्राकृतिक खनिज/पत्थर है, जिसे आम तौर पर Soapstone (सोपस्टोन) कहा जाता है. इसका मुख्य घटक टैल्क (Talc) होता है. यह मुलायम पत्थर होता है और इसे पाउडर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है.
आटे के तीन ब्रांड के नमूने लिए गए
खाद्य विभाग की टीम ने मौके से अलग-अलग आटे के नमूने लिए हैं. इनमें समृद्धि ब्रांड आटा, उत्तम ब्रांड आटा और श्याम भोग चक्की फ्रेश आटा शामिल हैं. इसके अलावा मौके पर मिले सेलखड़ी पाउडर का भी विधिक नमूना लिया गया है. इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला भेजा जा रहा है. लैब जांच से यह पता चलेगा कि जब्त आटे में किसी तरह की ऐसी मिलावट थी या नहीं, जो खाद्य मानकों के खिलाफ हो. इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी.
आखिर इतनी सेलखड़ी वहां क्यों रखी थी?
छापे के बाद आम लोगों के मन में सबसे स्वाभाविक सवाल यही है कि आखिर एक आटा तैयार करने वाले प्रतिष्ठान में 1,800 किलो सेलखड़ी क्यों मिली? क्या इसका इस्तेमाल आटा तैयार करने में किया जा रहा था? क्या इसे किसी दूसरे काम के लिए रखा गया था? या खाद्य विभाग की आशंका के मुताबिक इसका इस्तेमाल मिलावट के लिए होना था? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच में तलाशा जा रहा है. मौके से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी. यही वजह है कि विभाग ने सेलखड़ी के साथ तैयार आटे के नमूने भी लिए हैं.
मशीनें सील, कारोबार कराया गया बंद
खाद्य विभाग की कार्रवाई सिर्फ नमूने लेने तक सीमित नहीं रही. टीम ने मौके पर चल रहे खाद्य कारोबार को बंद करा दिया. इसके साथ ही आटा निर्माण में इस्तेमाल की जा रही मशीनों को भी सील कर दिया गया. इससे फिलहाल वहां आटा निर्माण का काम रुक गया है. विभाग की कार्रवाई से यह भी संकेत मिलता है कि मामले को सिर्फ खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रखा गया है. लाइसेंस की श्रेणी और मौके पर किए जा रहे कारोबार की भी जांच की जा रही है. मौके पर सामने आए तथ्यों के बाद संबंधित खाद्य लाइसेंस के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है. खाद्य विभाग के मुताबिक लाइसेंस के निलंबन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इसका कारण यह है कि प्रतिष्ठान के पास खाद्य तेल और मसालों से संबंधित लाइसेंस था, जबकि मौके पर आटा निर्माण का काम होता मिला. अब विभागीय जांच में यह भी देखा जाएगा कि इस गतिविधि को लेकर संबंधित कारोबारी के पास कोई वैध अनुमति थी या नहीं. खाद्य विभाग की ओर से संबंधित कारोबारी के खिलाफ फतेहपुर सीकरी थाने में FIR दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जा रही है. इसके अलावा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी.