भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट से पहले मेजबान टीम के कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने अपनी रणनीति के पत्ते खोल दिए हैं. श्रीलंका भारत को शुरुआत से टर्निंग ट्रैक देकर चौंकाने के बजाय मुकाबले को चौथे-पांचवें दिन तक खींचना चाहता है. योजना है कि शुरुआती दिनों में बल्लेबाजों को मौका मिले और जैसे-जैसे पिच पुरानी हो, स्पिनरों को भारत के खिलाफ सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाए.
धनंजय डी सिल्वा जानते हैं कि भारतीय बल्लेबाज हाल में टर्निंग विकेटों पर परेशानी में दिखे हैं. न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में भारत को हार मिली थी. इसके बावजूद श्रीलंकाई कप्तान इसे मेहमान टीम की स्थायी कमजोरी मानने की गलती नहीं करना चाहते.
धनंजय ने कहा, 'भारत ने न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने घर में टर्निंग विकेटों पर दो सीरीज गंवाई हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि वे टर्निंग विकेटों पर खेलना भूल गए हैं. वे निश्चित रूप से वापसी के लिए बेताब होंगे.' यानी श्रीलंका भारतीय बल्लेबाजों की पिछली नाकामियों के भरोसे मैदान पर नहीं उतरना चाहता. मेजबान टीम का फोकस गॉल की परिस्थितियों का बेहतर इस्तेमाल करने पर है.
श्रीलंका की योजना का सबसे अहम हिस्सा मुकाबले को लंबा खींचना है. गॉल में समय के साथ सतह का व्यवहार बदल सकता है. पिच टूटने और रफ बनने के बाद स्पिनरों की भूमिका बढ़ जाती है. धनंजय ने कहा, 'अगर हम मैच को चौथे और पांचवें दिन तक ले जा सके तो उन्हें हराने की हमारी संभावना ज्यादा होगी. उम्मीद है कि हम उनके लिए परिस्थितियां जितनी मुश्किल हो सकें उतनी बनाएंगे और उन्हें सीरीज में दबाव में रखेंगे.'
गॉल में इस बार पहले दिन से ही जबरदस्त टर्न देखने को मिले, इसकी गारंटी नहीं है. श्रीलंका में पिछले कुछ दिनों से बारिश हुई है और नमी बनी हुई है. धनंजय डी सिल्वा के मुताबिक मौजूदा मौसम को देखते हुए विकेट शुरुआती दो-तीन दिनों में बल्लेबाजी के लिए बेहतर रह सकता है. इसके बाद धूप और खेल के कारण सतह खराब होने पर स्पिनरों को मदद मिलने की संभावना है. यही कारण है कि मेजबान टीम स्पिन के साथ अपने तेज गेंदबाजों को भी महत्वपूर्ण मान रही है. शुरुआती नमी सीमर्स को मदद देती है तो श्रीलंका उसका फायदा उठाना चाहेगा.
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श्रीलंकाई कप्तान ने घरेलू परिस्थितियों में अपनी टीम की सबसे बड़ी बढ़त भी बताई. उनके मुताबिक गॉल में चुनौती केवल गेंद के घूमने की नहीं होती. बल्लेबाज को यह समझना होता है कि पिच कब बदल रही है और उसी हिसाब से कब डिफेंस करना है तथा कब रन बनाने का जोखिम उठाना है.
धनंजय ने कहा, 'हम जानते हैं कि अपनी पारी को कैसे आगे बढ़ाना है. हमें पता होता है कि गेंद कब टर्न करना शुरू करेगी. कई बल्लेबाज टर्न मिलने पर क्लूलेस हो जाते हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि इन परिस्थितियों में पारी कैसे खेलनी है.' श्रीलंका इसी अनुभव को भारत के खिलाफ अपनी बढ़त मान रहा है.
जयसूर्या खड़ी कर सकते हैं मुसीबत
मेजबान टीम की रणनीति सफल होती है तो प्रभात जयसूर्या की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी. बाएं हाथ के स्पिनर ने गॉल की परिस्थितियों का शानदार इस्तेमाल किया है और विदेशी बल्लेबाजों को यहां लगातार परेशान किया है. धनंजय ने अपने स्पिनर के अनुभव की ओर इशारा करते हुए कहा कि दोनों टीमों के मौजूदा खिलाड़ियों में गॉल की परिस्थितियों का जयसूर्या के पास ज्यादा अनुभव है.
उन्होंने कहा, 'आंकड़ों के हिसाब से हमारे पास बढ़त है. प्रभात ने दोनों टीमों के बाकी खिलाड़ियों की तुलना में यहां ज्यादा मैच खेले हैं, खासकर गॉल में. वर्षों से कई विदेशी बल्लेबाजी लाइनअप के खिलाफ उनका पलड़ा भारी रहा है. मैं इसे श्रीलंका के लिए प्लस वन कहूंगा.'
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इस सीरीज में भारत को जसप्रीत बुमराह की सेवाएं नहीं मिलेंगी. धनंजय ने इसे मेहमान टीम के लिए बड़ा नुकसान बताया. हालांकि बुमराह की गैरमौजूदगी के कारण श्रीलंकाई कप्तान किसी तरह की ढिलाई नहीं चाहते. उनका कहना है कि भारतीय टीम में अब भी कई मैच विनर मौजूद हैं और श्रीलंका ने उनके खिलाफ तैयारी की है. श्रीलंका के लिए यह आत्मविश्वास हालिया वेस्टइंडीज दौरे से भी आया है. वहां उसके बल्लेबाजों ने शतक लगाए और गेंदबाजों ने भी प्रभाव छोड़ा.
दिलचस्प रूप से धनंजय ने शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल या ऋषभ पंत के बजाय केएल राहुल को सबसे बड़ा खतरा माना है. उन्होंने कहा, 'अनुभव के लिहाज से केएल राहुल हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा होंगे. उन्होंने दुनिया भर में अच्छा प्रदर्शन किया है. वह श्रीलंका में भी खेल चुके हैं और यहां की परिस्थितियों को अच्छी तरह जानते हैं.' राहुल 2017 के श्रीलंका दौरे पर भी भारतीय टीम का हिस्सा थे. ऐसे में मेजबान कप्तान उनके अनुभव को खास अहमियत दे रहे हैं.