दुनिया में जंग के लिए आमतौर पर मिसाइल, टैंक और बंदूकों का इस्तेमाल होता है. लेकिन उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव की एक ऐसी कहानी भी है, जिसमें हथियारों के साथ तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर भी अहम भूमिका निभाते हैं.
साउथ कोरिया इन स्पीकरों पर K-pop गाने और उत्तर कोरिया की आलोचना करने वाली खबरें सुनाता है, तो नॉर्थ कोरिया की तरफ से डरावनी जानवरों जैसी अजीबोगरीब आवाजें प्रसारित की जाती रही हैं.
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अब नॉर्थ कोरिया एक बार फिर दक्षिण कोरिया की सीमा पर लगे अपने प्रचार वाले लाउडस्पीकर चालू करने की तैयारी कर रहा है. उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने कहा है कि कुछ ही दिनों में पूरे बॉर्डर पर ये स्पीकर दोबारा चालू किए जा सकेंगे. इससे दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा तनाव और बढ़ने की आशंका है.
16 महीने बाद फिर शुरू हो सकती है लाउडस्पीकर की जंग
उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी KCNA के मुताबिक, किम यो जोंग ने 22 अक्टूबर को कहा कि दक्षिण कोरिया को निशाना बनाने वाले लाउडस्पीकर कुछ ही दिनों में चालू करने की स्थिति में होंगे. इससे एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि अक्टूबर के अंत तक पूरी सीमा पर इनका इस्तेमाल शुरू किया जा सकता है.
अगर ऐसा होता है, तो करीब 16 महीने बाद दोनों देशों के बीच लाउडस्पीकर के जरिए प्रचार की जंग फिर शुरू हो सकती है. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने जून 2025 में पद संभालने के कुछ ही दिनों बाद अपने देश की तरफ से होने वाले प्रसारण बंद कर दिए थे. इसके बाद अगस्त में दक्षिण कोरिया ने अपने लाउडस्पीकर हटाने भी शुरू कर दिए थे. इसका मकसद उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करना था.
हालांकि, दक्षिण कोरिया ने साफ कर दिया है कि अगर उत्तर कोरिया दोबारा प्रसारण शुरू करता है, तो वह भी जवाबी कदम उठा सकता है. दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने 22 अक्टूबर को कहा कि ऐसी स्थिति में उचित जवाब देने पर विचार किया जाएगा. हालांकि, अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है.
किम जोंग की सेना क्यों सुनाती है डरावनी आवाजें?
दोनों देशों के बीच लाउडस्पीकर से प्रचार करने का पुराना इतिहास है. इनका मकसद सिर्फ आवाज पहुंचाना नहीं, बल्कि सीमा के दूसरी तरफ रहने वाले सैनिकों और लोगों की सोच पर असर डालना भी है. इसे मनोवैज्ञानिक युद्ध यानी साइकोलॉजिकल वॉरफेयर कहा जाता है.
दक्षिण कोरिया अपने लाउडस्पीकरों पर दुनिया भर की खबरें, उत्तर कोरिया की सरकार की आलोचना करने वाली बातें और लोकतांत्रिक समाज से जुड़ी जानकारियां प्रसारित करता रहा है. इसके साथ K-pop के लोकप्रिय गाने भी बजाए जाते हैं. इनकी आवाज उत्तर कोरिया के भीतर 20 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक पहुंच सकती है.
इसके उलट, उत्तर कोरिया की ओर से पहले डरावनी और जानवरों की अजीबोगरीब आवाजें प्रसारित किए जाने की खबरें आती रही हैं. इस तरह सीमा के दोनों तरफ लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल एक-दूसरे पर दबाव बनाने और विरोधी पक्ष का मनोबल प्रभावित करने के लिए किया जाता है.
पहले कचरे वाले गुब्बारे, फिर गानों से जवाब
जून 2024 में साउथ कोरिया ने उत्तर कोरिया की तरफ लाउडस्पीकर से प्रसारण दोबारा शुरू किए थे. इसकी वजह थी उत्तर कोरिया की ओर से सीमा पार भेजे गए कचरे से भरे करीब एक हजार गुब्बारे. ये गुब्बारे कुछ ही हफ्तों के भीतर भेजे गए थे.
इसके जवाब में साउथ कोरिया ने लाउडस्पीकरों पर खबरें, उत्तर कोरियाई शासन की आलोचना और K-pop गाने प्रसारित किए. दक्षिण कोरिया का कहना था कि इन प्रसारणों के जरिए उत्तर कोरिया के सैनिकों और नागरिकों तक नई जानकारियां और उम्मीद के संदेश पहुंचाए जाएंगे.
यह विवाद दिखाता है कि दोनों देशों के बीच दुश्मनी सिर्फ सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है. यहां गाने, खबरें, गुब्बारे और तेज आवाजें भी तनाव बढ़ाने का जरिया बन सकती हैं.
आखिर क्यों नहीं खत्म हो रहा दोनों देशों का तनाव?
उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं. 1950 से 1953 के बीच दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था, जो शांति समझौते के बजाय युद्धविराम पर खत्म हुआ. इसलिए तकनीकी तौर पर दोनों देश अब भी युद्ध की स्थिति में हैं.
हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और दक्षिण कोरिया के अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य सहयोग ने तनाव को और बढ़ाया है. दक्षिण कोरिया जापान के साथ भी सुरक्षा सहयोग मजबूत कर रहा है. दूसरी ओर, उत्तर कोरिया अपनी दक्षिणी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटा है.
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ताजा विवाद में सीमा पर निर्माण कार्य, सैनिकों की गतिविधियां और चेतावनी के तौर पर की गई फायरिंग भी शामिल हैं. उत्तर कोरिया इन्हें दक्षिण कोरिया की उकसाने वाली कार्रवाई बताता है, जबकि दक्षिण कोरिया अपनी सैन्य गतिविधियों को सुरक्षा से जुड़ा कदम मानता है.
ऐसे में लाउडस्पीकर दोबारा चालू करने की उत्तर कोरिया की चेतावनी महज आवाजों की वापसी नहीं है. यह दोनों देशों के बीच बढ़ती दुश्मनी का एक और संकेत है. अगर प्रसारण फिर शुरू होते हैं, तो दक्षिण कोरिया भी जवाबी कदम उठा सकता है और सीमा पर तनाव और बढ़ सकता है.