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'मेरे सामने मेरा परिवार बह गया...' जिन लोगों ने देखा नेपाल का फ्लैश फ्लड, उन्होंने क्या बताया?

नेपाल और तिब्बत सीमा के पास आई इस तबाही में मौत और लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. कई इलाकों में बचाव अभियान जारी है और हेलीकॉप्टरों से लोगों तक राहत पहुंचाई जा रही है. लेकिन इस बड़ी त्रासदी के बीच कुछ ऐसे चेहरे भी हैं, जो मौत के बेहद करीब जाकर लौटे हैं. आइए जानते हैं उनकी आपबीती, जिसे जानकर आप भी सिहर उठेंगे.

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इस तबाही में मौत और लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है (Photo: AFP)
इस तबाही में मौत और लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है (Photo: AFP)

नेपाल के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में बुधवार को ऐसी तबाही आई, जिसने कुछ ही मिनटों में सब कुछ बर्बाद कर दिया. इसे सिर्फ बाढ़ या भूस्खलन कहना शायद काफी नहीं होगा. मंजर ऐसा था, जैसे कुदरत ने पानी, मिट्टी और चट्टानों के जरिये कहर बरपा दिया हो. तेज बहाव अपने साथ बस्तियों, घरों, सड़कों और लोगों की जिंदगियों को बहा ले गया.

कई जगहों पर पानी, मिट्टी और चट्टानों की ऐसी दीवार उमड़ी कि लोग अपने ही घरों को आंखों के सामने मलबे में तब्दील होते देखते रह गए. जो लोग इस त्रासदी से किसी तरह बच निकले, उनके पास उस खौफनाक पल की ऐसी कहानियां हैं, जिन्हें सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. आइए जानते हैं उन लोगों की आपबीती, जो इस कुदरती कहर से बच पाए. किस्मत ने उनका कितना साथ दिया और अपने संघर्ष से उन्होंने मौत के मुंह से खुद को कैसे बाहर निकाला, ये कहानी उन्हीं की जुबानी.


'आम का पेड़ नहीं होता तो मैं भी बह जाता'

राउटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 साल के बिबेक कुमाल उस समय काम कर रहे थे. बिबेक अपनी आपबीती में बताते हैं कि वह एक नए बने घर के बाहर टॉयलेट के लिए गड्ढा खोद रहे थे. तभी उन्हें एक अजीब सी आवाज सुनाई दी. उनके साथ काम कर रहे लोगों ने ऊपर से चिल्लाकर उन्हें बाहर निकलने और भागने को कहा.बिबेक जैसे ही गड्ढे से बाहर निकले, बाकी लोग पहले ही भाग चुके थे. वह भी दौड़ने लगे. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

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बिबेक बताते हैं कि अचानक पानी, मिट्टी और चट्टानों की एक विशाल दीवार उनकी तरफ गरजते हुए आई. उन्हें लगा जैसे भूकंप आ गया हो. तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहा ले गया. वह मलबे और कीचड़ के बीच फंसते-बहते रहे.लेकिन उनकी किस्मत ने साथ दिया. बहते हुए उनका शरीर एक आम के पेड़ में अटक गया.और फिर उन्होंने इस पेड़ को नहीं छोड़ा.

बिबेक ने बताया कि अगर वह पेड़ वहां नहीं होता, तो वह भी पानी के साथ बहकर मर जाते. पेड़ को पकड़े हुए उन्होंने उस घर को भी अपनी आंखों के सामने गायब होते देखा, जहां वह कुछ देर पहले काम कर रहे थे.पुलिस बाद में उन्हें वहां से निकालकर सुरक्षित जगह ले गई. उनके पैर में चोट लगी, लेकिन वह जिंदा बच गए. 

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'मैंने पत्नी को कीचड़ उसे ले गया'

राउटर्स की रिपोर्ट में सामने आई 68 साल के केशव प्रसाद बराल की कहानी इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक चेहरा है.
उन्होंने बताया कि उनकी तरफ पानी और मिट्टी का एक विशाल सैलाब बढ़ता हुआ आ रहा था. जैसे-जैसे वह करीब आता गया, उसकी ऊंचाई बढ़ती चली गई. फिर वह उनके घर में घुस गया.

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केशव ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उन्हें घर की छत तक ले जाने की कोशिश की. शायद उन्हें लगा था कि ऊंचाई पर पहुंचकर दोनों बच जाएंगे. लेकिन कीचड़ और पानी का बहाव इतना ताकतवर था कि उनकी पत्नी उनके हाथ से छूट गईं.मलबे की तेज लहर उन्हें अपने साथ ले गई.

केशव घंटों तक फंसे रहे. करीब चार से पांच घंटे बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया. लेकिन उनकी पत्नी नहीं मिलीं. अस्पताल में इलाज करा रहे केशव के लिए सबसे बड़ा सदमा यही था कि जिस पत्नी का हाथ पकड़कर वह उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे थे, वह अब मलबे के नीचे कहीं खो चुकी थीं. उनकी पत्नी अब नहीं रहीं.

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'मैं बच गया... मैं बच गया'

 

नेपाली मीडिया रतोपति की रिपोर्ट के मुताबिक, टिमुरे इलाके में तबाही का मंजर देखने वाले संजीव श्रेष्ठ और पुलिसकर्मी तारा केसी भी मौत से बचकर निकले हैं.संजीव ने बताया कि जैसे ही तबाही शुरू हुई, उन्होंने जान बचाने के लिए जंगल की तरफ दौड़ लगा दी और ऊंचाई वाले हिस्से में पहुंच गए. उन्होंने तबाही के वीडियो भी बनाए.

उनके मुताबिक, नीचे पूरा इलाका बुरी तरह तबाह हो चुका था और उन्हें डर था कि बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं. उनका दावा था कि टिमुरे बाजार में भारी नुकसान हुआ है और कई लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

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इस दौरान उनके फोन की बैटरी भी लगभग खत्म होने वाली थी. उन्होंने कहा कि उनके फोन में सिर्फ 7 प्रतिशत बैटरी बची थी, लेकिन वह किसी तरह दुनिया को वहां की तबाही दिखाने की कोशिश करते रहे.

दूसरी तरफ पुलिसकर्मी तारा केसी भी कीचड़ से पूरी तरह लथपथ हालत में मिले. मौत के मुंह से बाहर निकलने के बाद उनके मुंह से बस एक ही बात निकल रही थी- 'मैं बच गया, मैं बच गया.'

Photo: AFP
भूस्खलन के बीच फंसे एक व्यक्ति को बचाते सैन्यकर्मी, तस्वीर में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई (Photo: AFP)


'बेटे के साथ छत पर बची, नीचे पूरा परिवार बाढ़ में समा गया'

SMH की रिपोर्ट में कल्पना मल्ला की कहानी से आप कुदरत के इस कहर का अंदाजा लगा सकते हैं आपबीती भी इस त्रासदी की भयावहता बताती है. फ्लैश फ्लड के वक्त वह अपने बेटे के साथ घर की छत पर पहुंचकर किसी तरह बच गईं, लेकिन उनके परिवार के कई लोग इस तबाही में बह गए.

कल्पना के लिए सबसे डरावना पल वह था, जब सुरक्षित रहने के लिए ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद उन्हें नीचे तबाही का पूरा मंजर दिखाई दे रहा था. पानी और मलबे के बहाव में उनका घर और परिवार के लोग बिखरते चले गए. लेकिन वो उनका बचा नहीं पाने पर बेबस थीं. एक तरफ उनका बेटा उनके साथ था, दूसरी तरफ अपनों को खोने का दर्द.वह अपने बेटे के साथ तो बच गईं, लेकिन उनके लिए उस छत पर बच जाना भी जिंदगीभर का बोझ बन गया.

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रासुवा और आसपास के इलाकों में तबाही का स्तर इतना बड़ा है कि कई जगह घर, होटल, रेस्तरां, गाड़ियां और सड़कें तक गायब हो गई हैं. राहत और बचाव में लगे लोग भी मान रहे हैं कि मलबा हटने के साथ मौत और लापता लोगों की संख्या बढ़ सकती है.
 

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