सोमवार की शाम और ऑफिस का लगभग हर डेस्क खाली. न कोई कर्मचारी काम में जुटा दिखा, न देर तक रुकने की हड़बड़ी. जाहिर है, इस नजारे की बात करें तो ये ऑफिस भारत का तो नहीं हो सकता.
भारत में सोमवार का मतलब है जिंदगी में तूफान की एंट्री. डेडलाइन, टारगेट, मीटिंग के एजेंडे और पूरे हफ्ते के परफॉर्मेंस का दबाव. यानी काम का प्रेशर इतना कि ऑफिस ऑवर खत्म होने के बाद भी टारगेट और परफॉर्मेंस की चिंता सताती रहती है. कभी-कभी तो नींद में भी.
यही कहानी भारत के कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों की है. जहां कई लोगों की जिंदगी काम के दबाव, डेडलाइन और अगली मीटिंग की चिंता के बीच गुजरती है.
लेकिन ऊपर जिस ऑफिस का जिक्र किया गया है, वह जाहिर तौर पर भारत का नहीं है. यह जर्मनी का है. जहां वर्क-लाइफ बैलेंस सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि हकीकत में भी नजर आता है. जहां काम करने का एक तय समय है और जिंदगी की अपनी अलग जगह.
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जर्मनी में काम कर रहे एक भारतीय युवक ने अपने ऑफिस का ऐसा ही वीडियो शेयर किया है, जिसे देखकर भारत के वर्क कल्चर और वर्क-लाइफ बैलेंस पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई.वीडियो में युवक अपने फोन का समय दिखाता है. घड़ी में शाम के 4 बजकर 58 मिनट हो रहे हैं. यानी सोमवार को आधिकारिक कामकाजी समय खत्म होने में अभी कुछ ही मिनट बाकी हैं.
इसके बाद वह कैमरा घुमाकर अपने ऑफिस का नजारा दिखाता है. वहां एक के बाद एक डेस्क और कुर्सियां खाली नजर आती हैं. पूरी ऑफिस फ्लोर लगभग सुनसान दिखाई देती है.
'भारत और जर्मनी का वर्क कल्चर देखना है?'
वीडियो शेयर करने वाले युवक की पहचान मोहित के तौर पर हुई है. वह जर्मनी में रहते हैं और इंस्टाग्राम पर अपने अनुभवों से जुड़े वीडियो शेयर करते हैं.
वीडियो की शुरुआत में मोहित अपने डेस्क पर बैठे दिखाई देते हैं. इसके बाद वह कैमरे में समय दिखाते हुए कहते हैं, "भारत और जर्मनी के वर्क कल्चर में अंतर देखना है? ये देखिए. इसके बाद कैमरा पूरे ऑफिस की तरफ घूमता है और लगभग खाली पड़ा वर्कस्पेस दिखाई देता है.
वीडियो से यह समझ आता है कि उनके वर्कप्लेस पर कर्मचारी काम का समय खत्म होने के बाद बेवजह ऑफिस में रुकने के बजाय अपने घर और निजी जिंदगी की तरफ लौट जाते हैं.
देखें वीडियो
'काम जिंदगी का हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं'
मोहित ने वीडियो के साथ लिखी अपनी बात में भी इसी सोच को समझाने की कोशिश की.उन्होंने कहा कि काम जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन जोर इस बात पर होना चाहिए कि वह सिर्फ जिंदगी का एक हिस्सा है. काम को पूरी जिंदगी नहीं बना देना चाहिए.
इससे पहले यूरोप के वर्क कल्चर से जुड़े वीडियो सामने आए हैं. जिसपर लोगों ने कहा कि कंपनी का कर्मचारी काम तो करता है, लेकिन काम उसकी जिंदगी का सिर्फ एक हिस्सा होता है, पूरी जिंदगी नहीं. जहां अच्छी परफॉर्मेंस की अहमियत होती है और हर किसी की जिम्मेदारी तय होती है. जहां सीनियर और जूनियर के बीच पदों का फर्क तो होता है, लेकिन काम के दौरान हर कोई एक टीम की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाता नजर आता है.
वैसे मोहित के वीडियो में दिख रहा यह नजारा सिर्फ एक ऑफिस की कहानी नहीं है. वर्क-लाइफ बैलेंस के मामले में जर्मनी दुनिया के सबसे बेहतर देशों में गिना जाता है. Global Life-Work Balance Index 2025 में जर्मनी दुनिया की 60 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में चौथे नंबर पर रहा, जबकि भारत 42वें स्थान पर है. जर्मनी को 100 में 74.37 अंक मिले, जबकि भारत का स्कोर 45.81 रहा. यानी काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन के मामले में दोनों देशों के बीच बड़ा अंतर नजर आता है