उत्तर प्रदेश के बांदा में बारावफात के जुलूस के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध युवक मिला. उसकी भाषा समझ में नहीं आने और अपना नाम-पता स्पष्ट नहीं बता पाने के कारण मौके पर हड़कंप मच गया. शुरुआती तौर पर उसके बांग्लादेशी होने की चर्चा होने लगी. मामला संवेदनशील होने पर पुलिस के साथ इंटेलिजेंस और IB की टीमें भी जांच में जुट गईं.
पुलिस ने 25 अगस्त को बदौसा थाना क्षेत्र के फतेहगंज तिराहे पर चेकिंग के दौरान इस व्यक्ति को रोका था. सामान्य पूछताछ में उसकी बोली पुलिसकर्मियों को समझ नहीं आई. वह अपना नाम, पता और निवास स्थान भी स्पष्ट तरीके से नहीं बता पा रहा था. इसके बाद उसे बदौसा थाने लाकर विस्तार से पूछताछ की गई.
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पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान व्यक्ति ने अपना नाम मो. सफीउर्रहमान पुत्र हुसैन अली, उम्र करीब 45 वर्ष, निवासी ग्राम वरगुला, जिला बोंगाईगांव, असम बताया. उसके बताए पते की पुष्टि के लिए पुलिस ने इंटरनेट के माध्यम से संबंधित थाना क्षेत्र से संपर्क किया. इसके बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई.
वीडियो कॉल से हुई पहचान, 12 साल पुराना राज खुला
संबंधित थाना क्षेत्र से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने सफीउर्रहमान के भाई शुजाउल हक से फोन पर संपर्क किया. शुजाउल हक ग्राम बलारपेट, पोस्ट तिलपुखुरी, थाना अभयापुरी, जिला बोंगाईगांव, असम के रहने वाले हैं. पुलिस ने वीडियो कॉल के जरिए संदिग्ध व्यक्ति की पहचान उनके भाई से कराई.
वीडियो कॉल पर शुजाउल हक ने उसे देखते ही अपने भाई मो. सफीउर्रहमान के रूप में पहचान लिया. पहचान की पुष्टि के लिए पुलिस ने उससे संबंधित दस्तावेज भी व्हाट्सऐप के जरिए मंगवाए. दस्तावेजों में दर्ज विवरण का मिलान उस व्यक्ति की ओर से बताए गए नाम-पते और अन्य जानकारियों से किया गया.
परिजनों ने पुलिस को बताया कि सफीउर्रहमान करीब 12 साल पहले पिता से नाराज होकर घर से चला गया था. इसके बाद उसका कोई पता नहीं चल सका. परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. इतने लंबे समय बाद बांदा पुलिस के जरिए उसके जिंदा होने की जानकारी मिलने पर परिजनों ने उसे वापस लाने की तैयारी शुरू कर दी है.
चित्रकूट में 15 दिन से रह रहा था, मांगकर चलाता था गुजारा
पुलिस जांच में सामने आया कि सफीउर्रहमान पिछले करीब 15 दिनों से चित्रकूट में रह रहा था. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह मांगकर अपना पेट भरता था. जरूरत पड़ने पर होटल में काम भी कर लेता था. इसके बाद वह बारावफात के दौरान बांदा पहुंचा, जहां चेकिंग के दौरान पुलिस की नजर उस पर पड़ी.
ASP शिवराज ने बताया कि संदिग्ध परिस्थितियों में मिले व्यक्ति से पहले सामान्य पूछताछ की गई. भाषा स्पष्ट नहीं होने के कारण उसे थाने लाकर समझाया गया और दोबारा जानकारी ली गई. इसके बाद उसके बताए पते के आधार पर असम के बोंगाईगांव से संपर्क स्थापित किया गया और परिवार तक पहुंच बनाई गई.
पुलिस ने उसकी फोटो और वीडियो भी भाई को भेजकर पहचान कराई. भाई ने दोबारा उसकी पहचान अपने भाई के रूप में पुष्टि की. परिजनों ने पुलिस को बताया है कि वे सफीउर्रहमान को लेने के लिए असम से बांदा आ रहे हैं. उनके पहुंचने के बाद नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.
बांग्लादेशी होने की चर्चा के बीच पुलिस ने नहीं की जल्दबाजी
इस पूरे मामले में खास बात यह रही कि पुलिस ने शुरुआती शक और चर्चाओं के आधार पर सीधे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की. एसपी पलाश बंसल के निर्देश पर पहले व्यक्ति की पहचान और उसके बताए पते की गहनता से पुष्टि की गई. पुलिस, इंटेलिजेंस और IB स्तर पर भी जानकारी जुटाई गई.
जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि संदिग्ध युवक बांग्लादेश का रहने वाला नहीं, बल्कि असम के बोंगाईगांव जिले का निवासी है और करीब 12 वर्षों से परिवार से बिछड़ा हुआ था. पुलिस की पड़ताल के बाद अब परिवार के साथ उसका दोबारा मिलन होने की उम्मीद है.
पुलिस के मुताबिक, परिजनों के बांदा पहुंचने के बाद पहचान और दस्तावेजों की नियमानुसार पुष्टि करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी. बारावफात के मद्देनजर चल रही चेकिंग के दौरान सामने आए इस मामले ने पुलिस को भी चौंका दिया, क्योंकि संदिग्ध नजर आए व्यक्ति की कहानी आखिरकार 12 साल से चली आ रही गुमशुदगी से जुड़ी निकली.