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'AI को रोकना चीन को जिताना है’ AI स्लोडाउन की मांग पर बोले डोनल्ड ट्रंप, एंथ्रोपिक सीईओ पर भी साधा निशाना

अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि AI पर किसी तरह का कोई स्लोडाउन नहीं होगा. जो जीतेगा, वही जीतेगा. ऐसे कह कर उन्होंने चीन पर निशाना साधा है. माना जा रहा है कि चीनी AI मॉडल्स इतने पावरफुल हो रहे हैं कि अमेरिकी कंपनियां डर रही हैं.

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अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (Photo by Brendan Smialowski / AFP)
अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (Photo by Brendan Smialowski / AFP)

AI को लेकर पिछले कुछ दिनों से दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के बीच जो बहस चल रही थी, उसमें अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी सीधे उतर गए हैं. OpenAI और Anthropic दोनों ही AI की सबसे बड़ी कंपनियां हैं और दोनों के ही सीईओज ने AI की रफ्तार कम करने की बात कही है. ऑल्टमैन और डारियो अमोडेई ने AI को एक हद तक रेगुलेट करने की बात कही है. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप इसके खिलाफ हैं. 

ट्रंप ने कहा कि AI को अलग से नए ‘गार्डरेल्स’ की जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक अमेरिका के पास पहले से ही AI कंपनियों पर क्रिमिनल और रेगुलेटरी पावर है और एक मजबूत राष्ट्रपति इस टेक्नोलॉजी को कंट्रोल कर सकता है. ट्रंप ने अमोडेई पर भी हमला किया और उन पर तंज कसते हुए कहा कि वह अब खुद को ‘परफेक्ट लिटिल एंजल’ की तरह पेश कर रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि AI की रफ्तार कम करना अमेरिका के हित में नहीं है. 

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इसकी सबसे बड़ी वजह है चीन. ट्रंप ने कहा कि 'Whoever wins AI, wins', यानी जो देश AI की रेस जीतेगा, उसके पास फ्यूचर की बड़ी ताकत होगी. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका फिलहाल चीन से आगे है और इस बढ़त को बनाए रखना जरूरी है. उनका दावा है कि AI और डेटा सेंटर के खिलाफ एक कॉन्सपिरेसी चल रही है, जिसका फायदा आखिरकार चीन को हो सकता है

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डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने कहा है, 'AI को सिर्फ एक चीज की जरूरत है, एक मजबूत और समझदार (हाई IQ वाला) राष्ट्रपति. एआई को किसी अलग तरह के कंट्रोल या गार्डरेल्स की जरूरत नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास ऐसा राष्ट्रपति है और ट्रंप प्रशासन के पास एआई कंपनियों पर पहले से ही कार्रवाई करने की बड़ी ताकत है.

ट्रंप प्रशासन ने AI से जुड़े ऐसे लोगों को गलत या संभावित रूप से गलत काम करने से रोका है, जैसे डारियो (एंथ्रोपिक), जो अब खुद को ऐसे पेश कर रहे हैं जैसे वह बिल्कुल मासूम और परफेक्ट हों. हम इन कंपनियों के खिलाफ पहले से ही बड़े स्तर पर क्रिमिनल और रेगुलेटरी अधिकार रखते हैं और आगे भी इनका इस्तेमाल करते रहेंगे. एआई और डेटा सेंटर के खिलाफ एक बहुत ही गलत और खतरनाक साजिश चल रही है, और इससे खुश होने वाला इकलौता देश चीन है.

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जो एआई की रेस जीतेगा, वही जीतेगा. अमेरिका इस समय चीन और बाकी सभी देशों से आगे है और हम अपनी यह बढ़त आगे भी बनाए रखेंगे. कॉन्सपिरेसी की थ्योरी फैलाने वालों, देशद्रोहियों और जानकारी लीक करने वालों, सावधान हो जाओ'

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एंथ्रोपिक सीईओ डारियो पर क्यों बरसे ट्रंप?

गौरतलब है कि एंथ्रोपिक के सीईओ अमोडेई का तर्क है कि AI की पावर इतनी तेजी से बढ़ रही हैं कि सेफ्टी सिस्टम उनके साथ कदम नहीं मिला पा रहे. उन्होंने खास तौर पर रिकर्सिव सेल्फ इंप्रूवमेंट और ऐसे AI एजेट्स का हवाला दिया है जो अपनी तय जिम्मेदारी से आगे जाकर साइबर अटैक जैसे काम कर सकते हैं. उनका प्रस्ताव एआई को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि डेवेलपमेंट की स्पीड को बराबर में लाना है कि सेफ्टी टेस्टिंग और इंडिपेंडेंट इवैलुएशन पीछे ना छूटें. 

लेकिन अमेरिका में इसके सामने दूसरा सवाल है- अगर अमेरिकी कंपनियां धीमी पड़ गईं और चीन नहीं रुका तो क्या होगा? यही वह प्वइंट है जहां AI सेफ्टी और जियोपॉलिटिक्स एक-दूसरे से टकरा रहे हैं. एमोडेई खुद मानते हैं कि किसी भी स्लोडाउन की सीमा इस बात से तय होगी कि चीन और दूसरे देशों के मुकाबले अमेरिका कितना आगे है.

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और अब चीन ने भी इस बहस पर जवाब दिया है. चीनी अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने अमोडेई की पहल को अमेरिकी टेक्नोलॉजिकल हेजेमनी और कोल्ड वॉर मेंटेलिटी से जोड़कर निशाना साधा है. यानी जिस बहस की शुरुआत AI सेफ्टी से हुई थी, वह अब सीधे अमेरिका-चीन की टेक्नोलॉजी वॉर में बदलती दिखाई दे रही है. 

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ये पूरा मामला काफी दिलचस्प होता जा रहा है. आए दिन बड़े सीईओ एआई को रोकने और स्लोडाउन की बात कर रहे हैं, लेकिन कोई रूकना नहीं चाह रहा है. अमेरिकी प्रेसिडेंट का डर ये है कि अगर चीनी एआई आगे निकल गए तो क्या होगा. लेकिन एक्सपर्ट्स लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही स्पीड से एआई का डेवेलपमेंट होता रहा तो आगे तबाही हो सकती है. पूरे मामले को समझने के लिए आप यहां क्लिक करके विस्तार से पढ़ सकते हैं.

 

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