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जब कोहली लौटे, रोहित थे इंजर्ड... तब रहाणे ने रचा इतिहास, 36 रनों पर ऑलआउट के बाद ऑस्ट्रेलिया में भारत की सबसे बड़ी जीत

Ajinkya Rahane retires: 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में विराट कोहली के पैटरनिटी लीव पर लौटने और रोहित शर्मा के शुरुआती दो टेस्ट मिस करने के बाद अजिंक्य रहाणे ने कप्तानी संभाली. एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने के बावजूद उन्होंने टीम को संभाला और मेलबर्न टेस्ट जिताया. सिडनी ड्रॉ कराने के बाद गाबा में 32 साल पुराना ऑस्ट्रेलिया का रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारत ने 2-1 से ऐतिहासिक सीरीज जीत ली.

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अंज‍िक्य रहाणे की कप्तानी में भारत कभी भी कोई टेस्ट नहीं हारा  (Photo: Instagram/@ajinkyarahane)
अंज‍िक्य रहाणे की कप्तानी में भारत कभी भी कोई टेस्ट नहीं हारा (Photo: Instagram/@ajinkyarahane)

भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिने जाने वाले अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया. रहाणे ने गुरुवार (30 जुलाई) को सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो और पोस्ट साझा कर अपने फैसले की जानकारी दी.

38 वर्षीय रहाणे ने अपने करियर में कई यादगार पारियां खेलीं, लेकिन 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी कप्तानी भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सुनहरे अध्यायों में गिनी जाती है.

भारतीय क्रिकेट इतिहास में 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सबसे यादगार सीरीज में गिनी जाती है. एडिलेड टेस्ट में भारत दूसरी पारी में सिर्फ 36 रन पर सिमट गया था, जो टेस्ट क्रिकेट में उसका सबसे कम स्कोर है.

इसके बाद कप्तान विराट कोहली पैटरनिटी लीव पर भारत लौट आए क्योंकि उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा बेटी वामिका को जन्म देने वाली थीं.उधर रोहित शर्मा IPL 2020 के दौरान लगी हैमस्ट्रिंग चोट से उबर रहे थे. इसी वजह से वह शुरुआती दो टेस्ट नहीं खेल सके. ऐसे मुश्किल दौर में टीम की कमान उपकप्तान अजिंक्य रहाणे के हाथों में आई.

रहाणे ने सबसे पहले ड्रेसिंग रूम का माहौल बदला. उनका साफ संदेश था कि 36 रन पर ऑलआउट की चर्चा अब कभी नहीं होगी. उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि जो हुआ उसे स्वीकार करो और आगे बढ़ो, क्योंकि अगला टेस्ट सिर्फ तीन दिन बाद शुरू होना था. रहाणे ने खिलाड़ियों से कहा कि बाहर लोग क्या लिख रहे हैं, इसकी चिंता नहीं करनी है. टीम को एकजुट होकर सिर्फ अच्छा क्रिकेट खेलना है.

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मेलबर्न से शुरू हुआ ऐतिहासिक कमबैक
रहाणे की कप्तानी में भारत ने मेलबर्न बॉक्सिंग डे टेस्ट में जोरदार वापसी की. खुद रहाणे ने शानदार 112 रन की कप्तानी पारी खेली और भारत ने मैच जीतकर सीरीज 1-1 से बराबर कर दी.इसके बाद सिडनी टेस्ट में टीम इंडिया ने जबरदस्त संघर्ष किया. चेतेश्वर पुजारा ने लंबी पारी खेली, जबकि चोटिल पीठ के बावजूद रविचंद्रन अश्विन ने 128 गेंदों पर नाबाद 39 रन बनाकर मैच बचाने में अहम भूमिका निभाई.

सीरीज का आखिरी मुकाबला गाबा में खेला गया, जहां ऑस्ट्रेलिया 32 साल से कोई टेस्ट नहीं हारा था. भारत ने 328 रन का लक्ष्य तीन विकेट शेष रहते हासिल कर इतिहास रच दिया और 2-1 से सीरीज अपने नाम कर ली.

रोहित, पुजारा और अश्विन बने रहाणे के सबसे बड़े साथी
रहाणे ने बाद में बताया कि कप्तानी के दौरान उन्हें सबसे ज्यादा मदद उपकप्तान रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा और रविचंद्रन अश्विन से मिली. चारों खिलाड़ी लंबे समय से साथ खेल रहे थे और खुलकर रणनीति पर चर्चा करते थे.रोहित शुरुआती दो टेस्ट नहीं खेल पाए थे, लेकिन आखिरी दो मुकाबलों में लौटने के बाद उन्होंने नेतृत्व की जिम्मेदारी भी साझा की. रहाणे ने कहा कि अगर वह किसी खिलाड़ी तक नहीं पहुंच पाते थे तो रोहित उससे बात करते थे. इससे उनका काम काफी आसान हो जाता था.

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अश्विन और पुजारा का आत्मविश्वास बढ़ाया
ऑस्ट्रेलिया दौरे के शुरुआती अभ्यास मैचों में अश्विन बल्लेबाजी को लेकर परेशान थे. रहाणे ने उनसे कहा कि बल्लेबाजी की चिंता छोड़कर गेंदबाजी पर ध्यान दें, क्योंकि वही टीम को मैच जिता सकती है. इसके बाद अश्विन ने शानदार गेंदबाजी की और वही आत्मविश्वास उनकी बल्लेबाजी में भी दिखा. सिडनी टेस्ट में उन्होंने चोट के बावजूद लंबी पारी खेलकर भारत को हार से बचाया.

उस समय पुजारा की धीमी बल्लेबाजी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे, लेकिन रहाणे ने उन्हें साफ कहा कि अपने खेल में कोई बदलाव मत करो. बाकी बल्लेबाज तुम्हारे आसपास खेलेंगे. पुजारा ने पूरी सीरीज में 928 गेंदों का सामना कर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को थका दिया और सिडनी व ब्रिस्बेन में उनकी पारियां भारत की जीत की नींव बनीं.

युवा खिलाड़ियों को दिया खुलकर खेलने का संदेश
सीरीज के दौरान मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, रवींद्र जडेजा, हनुमा विहारी समेत कई खिलाड़ी चोटिल हो गए. ब्रिस्बेन टेस्ट तक भारत के पास अनुभवहीन गेंदबाजी आक्रमण बचा था. रहाणे ने नए खिलाड़ियों से तब कहा था कि इससे बड़ा मौका उन्हें नहीं मिलेगा. उन्होंने जीत-हार के दबाव से दूर रहकर सिर्फ अच्छा क्रिकेट खेलने और ऑस्ट्रेलिया को कड़ी टक्कर देने पर जोर दिया. रहाणे का मानना था कि जब खिलाड़ियों पर दबाव नहीं होता तो वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं.

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रहाणे की कप्तानी का रिकॉर्ड भी शानदार
अजिंक्य रहाणे ने भारत के लिए कुल छह टेस्ट में कप्तानी की, जिसमें चार मुकाबले जीते और दो ड्रॉ रहे. उनके नेतृत्व में भारत एक भी टेस्ट नहीं हारा. ऑस्ट्रेलिया में 2-1 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत भारतीय क्रिकेट के सबसे महान कमबैक में शामिल है. यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि विराट कोहली, रोहित शर्मा की शुरुआती अनुपस्थिति और कई खिलाड़ियों की चोटों के बावजूद भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर मात देकर इतिहास रच दिया.

 

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