अगले साल होने वाले ओडीआई वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया ने बैकअप प्लान पर काम शुरू कर दिया है. सबसे ज्यादा माथापच्ची मिडिल ऑर्डर को लेकर है, जहां श्रेयस अय्यर के विकल्प की तलाश की जा रही है. इसी रेस में तिलक वर्मा का नाम सामने आया है. टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ता तिलक को टॉप-6 में अय्यर के बैकअप के तौर पर तैयार करने पर विचार कर रहे हैं. बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के कारण तिलक मौजूदा बल्लेबाजी क्रम में जरूरी संतुलन भी ला सकते हैं. इतना ही नहीं, टीम मैनेजमेंट उनकी ऑफ स्पिन को भी निखारना चाहता है, ताकि वह जरूरत पड़ने पर एक उपयोगी गेंदबाजी विकल्प बन सकें.
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल को लगता है कि मिडिल ऑर्डर के लिए फिलहाल कोई ऐसा बैकअप तैयार नहीं है, जिस पर बड़े टूर्नामेंट में भरोसा किया जा सके. सबसे बड़ी चिंता ऑलराउंड विकल्पों को लेकर है. हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी की खराब फिटनेस को देखते हुए टीम ऐसा खिलाड़ी चाहती है, जो टॉप-6 में बल्लेबाजी करने के साथ जरूरत पड़ने पर करीब चार ओवर भी निकाल सके. पिछले कुछ समय में भारतीय टीम को प्लेइंग इलेवन का संतुलन बनाने के लिए अक्षर पटेल या वॉशिंगटन सुंदर को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजना पड़ा है. टीम मैनेजमेंट अब इस तरह के समझौते से बचना चाहता है.
गेंदबाजी में भी कमाल कर सकते हैं तिलक
भारतीय टॉप ऑर्डर में दाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या अधिक है. ऐसे में तिलक वर्मा का शामिल होना विपक्षी टीमों के लिए गेंदबाजी का एंगल और रणनीति बदलने की चुनौती पैदा कर सकता है. टीम मैनेजमेंट उनकी ऑफ स्पिन को भी गंभीरता से देख रहा है. अगर तिलक लगातार अपनी गेंदबाजी पर काम करते हैं और चार-पांच ओवरों का भरोसेमंद विकल्प बन जाते हैं, तो वह वनडे टीम के कॉम्बिनेशन में काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं.
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भारतीय चयनकर्ता अब बल्लेबाजों को जरूरत के हिसाब से अलग-अलग नंबर पर खिलाने के बजाय उनकी स्वाभाविक भूमिका में तैयार करने पर जोर दे रहे हैं. पिछले साल ऋतुराज गायकवाड़ को नंबर-4 पर खिलाया गया था. उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ रायपुर में शतक भी लगाया, लेकिन इसके बाद वह वनडे टीम में नजर नहीं आए. टीम मैनेजमेंट का मानना है कि अगर किसी खिलाड़ी ने ओपनिंग में अपनी जगह बनाई है, तो उसे उसी भूमिका में तैयार करना ज्यादा बेहतर है. इसी वजह से देवदत्त पडिक्कल को भी जल्दबाजी में वनडे सेटअप में धकेलने से बचा जा रहा है.
शॉर्ट पिच बॉल बनी श्रेयस की कमजोरी
आगामी क्रिकेट वर्ल्ड कप अफ्रीकी महाद्वीप में होना है, इसलिए टीम मैनेजमेंट अभी से वहां की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकल्प तैयार करना चाहता है. तेज गेंदबाजी और उछाल के खिलाफ बल्लेबाजों की क्षमता भी टीम की योजना का अहम हिस्सा है. श्रेयस अय्यर पिछले साल ऑस्ट्रेलिया दौरे पर चोटिल हुए थे. शॉर्ट पिच गेंदों के खिलाफ श्रेयस की कमजोरी को लेकर भी टीम मैनेजमेंट के भीतर चर्चा है. दूसरी ओर रोहित शर्मा और विराट कोहली अपने करियर के आखिरी पड़ाव में हैं, जबकि केएल राहुल भी वर्ल्ड कप तक 35 वर्ष से ज्यादा के हो जाएंगे.
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रवींद्र जडेजा को भी टीम में निश्चित विकल्प नहीं माना जा रहा. फिटनेस संबंधी चिंताओं का असर उनकी फील्डिंग पर भी पड़ा है. ऐसे में चयनकर्ता चाहते हैं कि बड़े टूर्नामेंट से पहले कुछ विकल्प पूरी तरह तैयार रहे. वर्ल्ड कप की तैयारी अक्टूबर में न्यूजीलैंड दौरे से ज्यादा स्पष्ट रूप लेगी.
उससे पहले 27 सितंबर से वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए कई स्टार खिलाड़ी उपलब्ध नहीं होंगे. दरअसल इसी समय भारत की मजबूत टी20 टीम एशियन गेम्स के लिए जापान जाएगी. इसलिए वेस्टइंडीज सीरीज में युवाओं और बैकअप खिलाड़ियों को मौका मिलने की संभावना ज्यादा है. इस सीरीज के लिए श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, ईशान किशन और अक्षर पटेल भी उपलब्ध नहीं होंगे. ऐसे में चयनकर्ताओं का ध्यान खास तौर पर एक अतिरिक्त विकेटकीपर तैयार करने पर भी रहेगा.