दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने कमाल का प्रदर्शन किया. मैच के दूसरे दिन साउथ जोन के गेंदबाजों को विकेट लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. इसके बावजूद टीम के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी.
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने साउथ जोन के गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए. चेन्नई के एम.ए चिदंबरम स्टेडियम में चल रहे इस महामुकाबले में ईस्ट जोन ने अपनी पहली पारी में 708 रनों का विशाल पहाड़ खड़ा कर दिया है.
टीम को इस स्कोर तक पहुंचाने वाले सबसे बड़े हीरो ईशान किशन रहे. ईशान किशन ने 334 गेंदों में 270 रनों की धमाकेदार पारी खेलकर मैच को पूरी तरह से ईस्ट जोन की मुट्ठी में कर दिया. ईशान किशन की बल्लेबाजी में बड़ी खासियत यह रही कि वह मैच के सिचुएशन के हिसाब से खेलने का अंदाज भी बदलते रहे.
That moment when Ishan Kishan reached 2️⃣5️⃣0️⃣ 👏👏
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ईशान किशन ने जड़ा दोहरा शतक
ईशान किशन ने सिर्फ 300 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा कर लिया था. पारी के दौरान तबीयत खराब होने की वजह से वह 250 रन के स्कोर पर रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर चले गए. हालांकि, उनका जज्बा कम नहीं हुआ और वह आखिरी सेशन में दोबारा बल्लेबाजी करने आए और अपनी टीम के खाते में 20 रन और जोड़े.
बनते-बनते रह गया 25 साल पुराना इतिहास
ईशान भले ही अपने पहले तिहरे शतक से चूक गए, लेकिन उनकी इस पारी ने सबको मुरीद बना लिया. दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अब तक केवल दो बल्लेबाज रमन लांबा और गगन खोड़ा ही तिहरा शतक लगा पाए हैं. ईशान के पास 25 साल से चले आ रहे इस इंतजार को खत्म करने का बेहतरीन मौका था, लेकिन वह 270 रन पर आउट हो गए.
An innings of pure class 👌
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Watch 🎥 snippets of Ishan Kishan's fantastic double century so far 💯💯
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फाइनल में ऐसा करने वाली बनी चौथी टीम
ईशान किशन के अलावा कुमार कुशाग्र ने भी बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए शानदार शतक जड़ा और टीम को 600 के पार पहुंचाया. दलीप ट्रॉफी फाइनल के इतिहास में यह केवल तीसरा मौका है जब किसी टीम ने 700 से अधिक रन बनाए हैं. इससे पहले 1986 में साउथ जोन, 1987 और 1991 में नॉर्थ जोन यह कारनामा कर चुके हैं.
Ishan Kishan brings up his 2️⃣0️⃣0️⃣ in style 💯💯 🙌
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What a magnificent knock from the East Zone captain so far 👏👏
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हालांकि 708 रन का यह स्कोर फाइनल का सबसे बड़ा स्कोर नहीं है. यह रिकॉर्ड आज भी नॉर्थ जोन के नाम है, जिसने 1987 के फाइनल में वेस्ट ज़ोन के खिलाफ 868 रन बनाए थे. अब साउथ जोन के सामने रनों का बड़ा पहाड़ खड़ा है. ईस्ट ज़ोन ने मैच पर अपना शिकंजा पूरी तरह कस लिया है और साउथ ज़ोन को इस संकट से निकलने के लिए अब किसी बड़े चमत्कार की जरूरत होगी.