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सैटेलाइट तस्वीरों में कैद हुआ बारिश का पूरा 'रूट मैप', जानिए क्या दिखा

इसरो की सैटेलाइट तस्वीरों में बंगाल की खाड़ी से अरब सागर तक फैला पूरा मॉनसूनी सिस्टम दिखा है, जिसने कई राज्यों में फिर से बारिश की रफ्तार बढ़ा दी.

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इस फोटो कॉम्बो में आपको भारत के आसमान में पांचों साइक्लोनिक सर्कुलेशन दिखाई देंगे. (Photo: IMD/ISRO)
इस फोटो कॉम्बो में आपको भारत के आसमान में पांचों साइक्लोनिक सर्कुलेशन दिखाई देंगे. (Photo: IMD/ISRO)

देश के कई हिस्सों में एक बार फिर बारिश तेज हो गई है. दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में मॉनसून फिर सक्रिय हो गया है. 22 जुलाई को इसरो के INSAT-3DR और INSAT-3DS सैटेलाइट से मिली तस्वीरों में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर एक साथ पांच चक्रवाती सिस्टम (Cyclonic Circulation) और सक्रिय मॉनसून ट्रफ दिखाई दिए हैं. 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि यही सिस्टम देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश बढ़ाने की बड़ी वजह हैं. पिछले कुछ दिनों में उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश कम हो गई थी. अब मौसम फिर बदल गया है. सैटेलाइट तस्वीरों में बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक बादलों की लंबी लाइन साफ दिखाई दे रही है. 

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मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब एक साथ कई चक्रवाती सिस्टम और मॉनसून ट्रफ सक्रिय हो जाते हैं, तो बारिश तेज होने लगती है. इसी वजह से दिल्ली के आसपास के इलाकों में भी फिर अच्छी बारिश शुरू हो गई है.

चक्रवाती सिस्टम क्या होता है?

चक्रवाती सिस्टम कम दबाव वाले इलाके में बनने वाला ऐसा मौसम सिस्टम होता है, जिसमें हवाएं गोल घूमती हैं. यह अपने आसपास की नमी को खींचता है. जब नम हवा ऊपर जाती है तो ठंडी होकर बादल बनाती है. फिर बारिश होती है. इस समय ऐसे पांच चक्रवाती सिस्टम हरियाणा, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान, उत्तर छत्तीसगढ़ और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने हुए हैं.

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मॉनसून ट्रफ का क्या काम है?

मॉनसून ट्रफ कम दबाव की एक लंबी पट्टी होती है, जो राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली रहती है. बारिश लाने वाले ज्यादातर सिस्टम इसी के आसपास बनते हैं और आगे बढ़ते हैं. इस समय पांचों चक्रवाती सिस्टम इसी ट्रफ से जुड़े हुए हैं. इससे बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ से लगातार नमी मिल रही है. यही नमी बड़े बारिश वाले बादल बना रही है.

इसरो के INSAT-3DR की तस्वीरों में ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के ऊपर घने बादल दिखाई दिए हैं. इन बादलों के ऊपरी हिस्से का तापमान -50 से -70 डिग्री सेल्सियस तक रिकॉर्ड किया गया. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसका मतलब है कि बादल काफी ऊंचे हैं और अच्छी बारिश करा सकते हैं.

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INSAT-3DS की तस्वीरों में अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक नमी की मजबूत पट्टी दिखाई दी. इसका मतलब है कि हवा में अच्छी मात्रा में नमी मौजूद है, जिससे बारिश का दौर कुछ दिन और जारी रह सकता है.

क्या अल नीनो का असर खत्म हो गया?

नहीं. अल नीनो अभी भी मौसम को प्रभावित कर रहा है. लेकिन रोज का मौसम सिर्फ उसी पर निर्भर नहीं करता. अगर मॉनसून ट्रफ मजबूत हो और कई चक्रवाती सिस्टम एक साथ सक्रिय हों, तो अल नीनो के दौरान भी कुछ दिनों तक अच्छी बारिश हो सकती है.

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मौसम विभाग के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक मध्य भारत, पश्चिमी तट, पश्चिमी हिमालयी राज्यों और पूर्वोत्तर भारत में बारिश जारी रह सकती है. गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. कुछ जगहों पर जलभराव और ट्रैफिक की परेशानी भी हो सकती है. वहीं जिन इलाकों में पिछले कुछ दिनों से बारिश कम थी, वहां लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है.

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