दुनिया के कई देशों में खेती की जमीन धीरे-धीरे धंसने लगी है. इसकी बड़ी वजह लगातार बढ़ता सूखा और जरूरत से ज्यादा ग्राउंड वॉटर का इस्तेमाल है. बारिश कम होने के कारण किसान सिंचाई के लिए जमीन के नीचे का पानी ज्यादा निकाल रहे हैं, जिससे नीचे की परत खाली होती जा रही है और जमीन कमजोर होकर बैठने लगती है. यही वजह है कि तुर्की, अमेरिका और कई दूसरे कृषि क्षेत्रों में बड़े-बड़े सिंकहोल बनते जा रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही हाल चलता रहा तो आने वाले समय में खेती की जमीन और ज्यादा अस्थिर हो सकती है और इसका असर सीधे फसल उत्पादन और खाने की सप्लाई पर पड़ेगा.
शुरुआत में यह समस्या धीरे-धीरे सामने आई थी, लेकिन अब कई जगह जमीन धंसने की घटनाएं साफ दिखाई देने लगी हैं. कई इलाकों में खेतों के बीच अचानक बड़े गड्ढे बन रहे हैं, जो किसानों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं. भूजल पर बढ़ती निर्भरता इसकी सबसे बड़ी वजह है, क्योंकि जब सतह का पानी कम हो जाता है तो लोग जमीन के नीचे मौजूद पानी को तेजी से निकालते हैं. इससे जमीन के अंदर खाली जगह बन जाती है और ऊपर की सतह दबकर बैठने लगती है.
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इसके साथ ही क्लाइमेट चेंज भी इस समस्या को और तेज कर रहा है. कई जगह बारिश कम हो रही है और सूखे के दिन बढ़ रहे हैं. ऐसे में खेती के लिए पानी की मांग बढ़ती जा रही है. भूजल का इस्तेमाल और ज्यादा हो रहा है. यही कारण है कि कुछ देशों में खेती की जमीन अब धीरे-धीरे नीचे की तरफ खिसक रही है.
तुर्कि के कोन्या मैदान में गंभीर हालात
तुर्कि का कोन्या मैदान एक बड़ा कृषि क्षेत्र है. यहां सैकड़ों सिंकहोल बन चुके हैं. इनमें से कई इतने बड़े हैं कि 100 फीट से ज्यादा चौड़े हैं. ये गड्ढे खेतों और गांवों के लिए खतरा बन गए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस इलाके की जमीन पहले से ही कमजोर चूना पत्थर वाली है. जब जमीन के नीचे पानी कम हो जाता है, तो यह परत और कमजोर होकर जल्दी धंसने लगती है.
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अमेरिका में भी जमीन धंसने की पुरानी समस्या
अमेरिका में यह समस्या नई नहीं है. कैलिफोर्निया की सैन जोकिन वैली में दशकों से भूजल का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है. यहां जमीन इतनी नीचे चली गई है कि कई जगह पुराने और नए स्तर का फर्क साफ देखा जा सकता है. फिनिक्स, अरिजोना में 1950 से 1990 के बीच जमीन करीब 5.5 मीटर (18 फीट) तक धंस गई थी.

सैन जोस और सेंट क्लारा वैली में भी जमीन धंसने की समस्या पहली बार करीब 1915 में दर्ज की गई थी. बाद में इसका असर बहुत बड़े इलाके पर पड़ा, जिससे कई किलोमीटर तक जमीन नीचे धंस गई. वैज्ञानिकों के मुताबिक ये सभी उदाहरण दिखाते हैं कि ग्राउंड वॉटर का बिना सोच-समझ के इस्तेमाल लंबे समय में जमीन को कमजोर कर देता है.
अगर पानी का इस्तेमाल ऐसे ही चलता रहा और भूजल निकालने पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले सालों में खेती की जमीन और ज्यादा प्रभावित हो सकती है. इसका सीधा असर फसलों, किसानों की कमाई और खाने की सप्लाई पर पड़ेगा. इसलिए एक्सपर्ट्स लगातार पानी बचाने, बेहतर सिंचाई तकनीक अपनाने और ग्राउंड वॉटर के संतुलित उपयोग की सलाह दे रहे हैं.