उत्तर प्रदेश के चंदौली में पुलिस ने साइबर ठगी के एक ऐसे अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार देश के कई राज्यों से जुड़े मिले हैं. पुलिस ने गिरोह के सक्रिय सदस्य बिहार के औरंगाबाद निवासी अंकित कुमार को मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र से गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और WhatsApp ग्रुप के जरिए लोगों को अधिक लाभ और रकम दोगुनी करने का लालच देकर ठगी करता था.
गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार, पंजाब और ओडिशा में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतें मिली हैं. पुलिस ने जब बरामद बैंक खातों को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर चेक किया तो कुल 10 साइबर धोखाधड़ी शिकायतें सामने आईं.
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पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग लोगों के नाम पर खरीदे गए म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था. इसके बाद इन खातों से जुड़े डेबिट कार्डों के जरिए अलग-अलग ATM से रकम निकाली जाती थी. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है.
ATM के आसपास घूम रहा था आरोपी, मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तारी
मुगलसराय कोतवाली पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन के आसपास स्थित अलग-अलग ATM से एक युवक लगातार रकम निकालने का प्रयास कर रहा है. सूचना में यह भी बताया गया कि युवक के पास बड़ी संख्या में डेबिट कार्ड हैं. इसके बाद मुगलसराय कोतवाली और साइबर क्राइम टीम ने संयुक्त रूप से घेराबंदी शुरू की.
पुलिस टीम ने DRM कार्यालय जाने वाले मार्ग के पास से संदिग्ध युवक को पकड़ लिया. पूछताछ में उसने अपना नाम अंकित कुमार पुत्र जशवंत सिंह बताया. वह बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के आजन गांव का रहने वाला है. पुलिस ने उसकी तलाशी ली तो बड़ी संख्या में बैंक कार्ड और अन्य सामान बरामद हुआ.
पुलिस के अनुसार, आरोपी के कब्जे से अलग-अलग बैंकों के 21 डेबिट/ATM कार्ड, 2 बैंक पासबुक, 4 मोबाइल फोन, एक कूटरचित आधार कार्ड, 4 खाली SIM पैकेट, एक सक्रिय Vodafone SIM और 1200 रुपये नकद बरामद हुए. इतनी बड़ी संख्या में डेबिट कार्ड मिलने के बाद पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल गतिविधियों की जांच शुरू की.
मोबाइल में मिले 6 WhatsApp ग्रुप और 2 ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म
पुलिस ने जब आरोपी के मोबाइल फोन की डिजिटल जांच की तो साइबर ठगी से जुड़े कई अहम सुराग मिले. जांच में बड़ी संख्या में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, 6 सक्रिय WhatsApp ग्रुप और 2 ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ी जानकारी सामने आई. इसके अलावा मोबाइल फोन में एक ऐसा वीडियो भी मिला, जो पुलिस की जांच में अहम डिजिटल साक्ष्य माना जा रहा है.
पुलिस के मुताबिक, इस वीडियो में आरोपी अपने साथियों को साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग म्यूल बैंक खातों के जरिए सुरक्षित तरीके से निकालने की प्रक्रिया समझाता हुआ दिखाई दे रहा है. इससे पुलिस को शक है कि आरोपी सिर्फ ठगी में शामिल नहीं था, बल्कि रकम को निकालने और आगे बांटने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभाता था.
NCRP पर खातों की जांच में सामने आई 10 शिकायतों ने भी पुलिस की जांच को एक नई दिशा दी है. शिकायतें महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार, पंजाब और ओडिशा सहित अलग-अलग राज्यों से जुड़ी हैं. पुलिस अब इन मामलों और चंदौली में पकड़े गए आरोपी के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है.
पैसे दोगुने करने का झांसा, म्यूल खातों में पहुंचती थी रकम
पूछताछ के दौरान अंकित ने बताया कि वह अपने साथी के साथ मिलकर ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और WhatsApp ग्रुप के जरिए लोगों को अधिक लाभ और उनकी रकम दोगुनी होने का लालच देता था. इस झांसे में आने वाले लोगों से निवेश के नाम पर पैसे जमा कराए जाते थे.
इसके बाद ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर खरीदे गए म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था. इन खातों से जुड़े डेबिट कार्डों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित ATM से नकदी निकाली जाती थी. पुलिस के मुताबिक, रकम निकालने के बाद उसे गिरोह के सदस्यों के बीच बांट लिया जाता था.
आरोपी ने पुलिस को यह भी बताया कि वह पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए कूटरचित आधार कार्ड का इस्तेमाल करता था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में कौन-कौन लोग शामिल थे और कितने म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल इस नेटवर्क में किया गया.
21 डेबिट कार्ड से खुलेगा ठगी के नेटवर्क का राज
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपी के पास बरामद 21 डेबिट कार्ड किन-किन बैंक खातों से जुड़े हैं और इन खातों में कितनी रकम का लेन-देन हुआ है. पुलिस इन खातों की जांच के साथ ATM से हुई निकासी और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की भी पड़ताल कर रही है.
चंदौली के डिप्टी एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि साइबर सेल और मुगलसराय कोतवाली पुलिस की टीम ने साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. उनके मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी अंकित कुमार के कब्जे से 21 ATM कार्ड, 2 पासबुक, 4 फोन और 1200 रुपये नकद बरामद हुए हैं.
डिप्टी एसपी के अनुसार, NCRP पर जांच के बाद अलग-अलग राज्यों में आरोपी के खिलाफ 10 साइबर धोखाधड़ी शिकायतें मिली हैं. डिजिटल जांच में बड़ी संख्या में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, 2 ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, 6 सक्रिय WhatsApp ग्रुप और एक वीडियो मिला है. आरोपी के खिलाफ मुगलसराय थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.
अब गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन जांच अभी खत्म नहीं हुई है. बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अब उसके अन्य साथियों की तलाश कर रही है. जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर चल रहे इस कथित नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं.
पुलिस म्यूल बैंक खातों, ATM कार्डों, WhatsApp ग्रुपों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए गिरोह की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. अलग-अलग राज्यों में मिली शिकायतों के आधार पर भी संबंधित मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है.
फिलहाल चंदौली पुलिस की इस कार्रवाई से ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर चल रहे साइबर ठगी के एक अंतर्राज्यीय नेटवर्क की अहम कड़ी सामने आई है. अब जांच आगे बढ़ने के साथ गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक खातों और साइबर ठगी की रकम के नेटवर्क से जुड़े और भी राज खुलने की उम्मीद है.