सावन में रिमझिम बारिश से गर्मी से राहत तो मिल जाएगी. लेकिन घर में सीलन, जलभराव और टपकता पानी कहीं आपके घर की ऊर्जा को प्रभावित न कर दे. बारिश के मौसम में यदि वायु और जल तत्व की ऊर्जा सही तरीके से संतुलित अवस्था में रहे तो शुभ परिणाम मिलते हैं. अन्यथा नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकते हैं. अगर मानसून में आपके घर में सीलन आती है या कहीं पानी टपकता है तो इसे तुरंत ठीक करा लें. अन्यथा जिस दिशा में यह समस्या होगी, उस दिशा से संबंधित शुभ फल मिलने में दिक्कत आएगी.
खासतौर से अग्नि व भूमि तत्व की दिशाओं (उत्तर के बाद से दक्षिण दिशा में होते हुए पश्चिम दिशा तक) में सीलन और जलभराव अधिक प्रतिकूल प्रभाव पैदा कर सकता है. बारिश के कारण घर में नमी, सीलन और पानी का जमाव जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं, जो घर की सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती हैं. आइए जानते हैं कि जलभराव और सीलन से जुड़ी समस्या किस दिशा में कैसा दुष्प्रभाव डालती है.
अग्नि कोण में सीलन
अग्नि कोण में सीलन से धन, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और आपके नाम पर प्रभाव पड़ सकता है. यहां किसी भी प्रकार से किसी गड्ढे में या सीलन के तौर पर अधिक समय तक जल का ठहराव नहीं होना चाहिए.
वायु तत्व की दिशा में सीलन
उत्तर-पश्चिम दिशा में सीलन या जलभराव के कारण जल का असंतुलित होना आपके रिश्तों और जीवन की खुशियों को प्रभावित कर सकता है. आपके सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रबाव पड़ सकता है.
जल तत्व में सीलन
जल तत्व की दिशाओं विशेषकर उत्तर-पूर्व दिशा में पानी रुकना अत्यंत अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिशा ऊर्जा के प्रवेश की होती है. छत, बालकनी और आंगन में पानी जमा न होने दें.
भूमि तत्व की दिशा में सीलन
दक्षिण-पश्चिम दिशा में सीलन या जलभराव की समस्या आपके जीवन की स्थिरता को हिला सकती है. साथ ही, पारिवारिक रिश्तों में दिक्कत हो सकती है. ईशान कोण के बाद सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव भूमि की दिशा में जल संबंधित असंतुलन का प्रभाव पड़ता है.
आकाश तत्व की दिशा में सीलन
पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में सीलन या जलभराव से समस्या के कारण आपकी इच्छाएं पूरी न होना, योग व ध्यान में रुचि घटने से लेकर आर्थिक समस्या हो सकती हैं. मुख्य द्वार के पास गंदगी या पानी जमा होना भी अशुभ माना जाता है. यह नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने का रास्ता दे.