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January Amavasya 2026: जनवरी में मौनी अमावस्या कब है? जानिए तिथि स्नान ,दान का शुभ मुहूर्त

January Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर किए गए जप, ध्यान और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है. धार्मिक विश्वासों के अनुसार, इस तिथि पर ऋषि मनु का जन्म हुआ था, जिन्हें मानव सभ्यता का आदि पुरुष माना जाता है.

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जनवरी माह में मौनी अमावस्या आने वाली है, जो कि साल की पहली अमावस्या भी है. (Photo: Pixabay)
जनवरी माह में मौनी अमावस्या आने वाली है, जो कि साल की पहली अमावस्या भी है. (Photo: Pixabay)

January Amavasya 2026: जनवरी महीने में पड़ने वाली मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यकारी माना गया है. इस दिन मौन व्रत का विशेष स्थान होता है, इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस तिथि पर मौन धारण कर पवित्र गंगा जल में स्नान करता है, उसके जीवन के पाप क्षीण हो जाते हैं और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी अमावस्या तिथि पर आदिपुरुष ऋषि मनु का अवतरण हुआ था. मौनी अमावस्या को माघ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. आइए जानते हैं वर्ष 2026 में इसकी तिथि और शुभ समय.

जनवरी 2026 में मौनी अमावस्या कब है?

वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी. अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 जनवरी 2026 को रात 12 बजकर 03 मिनट से होगी, जबकि इसका समापन 19 जनवरी 2026 को रात 1 बजकर 21 मिनट पर होगा.

मौनी अमावस्या 2026 के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:27 बजे से 06:21 बजे तक रहेगा. प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:54 बजे से 07:15 बजे तक रहने वाला है. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:10 बजे से 12:53 बजे तक रहने वाला है. सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:14 बजे से अगले दिन 19 जनवरी को सुबह 07:14 बजे तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 05:46 बजे से 06:13 बजे तक रहेगा. सायाह्न सन्ध्या शाम 05:49 बजे से 07:09 बजे तक रहेगा.

मौनी अमावस्या की पूजा करने की विधि

इस पावन तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में जागकर गंगा नदी में स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है. यदि किसी कारणवश नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान करते समय जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें.स्नान के पश्चात भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें.इसके बाद विधिपूर्वक श्रीहरि विष्णु की पूजा करें और तुलसी के पौधे की 108 बार परिक्रमा करें. पूजा संपन्न होने के बाद अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें. इस दिन जितना हो सके अधिक समय तक मौन रहकर आत्मचिंतन और साधना करें.

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