जयपुर में फर्जी मेडिकल डिग्री और प्रमाणपत्र के सहारे मरीजों का इलाज करने का बड़ा मामला सामने आया है. विदेश से एमबीबीएस करने के बाद भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए जरूरी एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाने वाले तीन आरोपियों को एसओजी ने गिरफ्तार किया है. आरोप है कि इन लोगों ने लाखों रुपये देकर एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा के कूटरचित प्रमाणपत्र तैयार करवाए और उन्हीं के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया.
मामला इतना बड़ा बताया जा रहा है कि जांच के दौरान एसओजी अब तक 100 से ज्यादा ऐसे विदेशी मेडिकल स्नातकों को चिन्हित कर चुकी है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग प्रमाणपत्र तैयार करवाए. इनमें से राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन समेत 30 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. अब तीन और आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है.
एफएमजी परीक्षा पास नहीं की, फिर भी करा लिया रजिस्ट्रेशन
विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले मेडिकल स्नातकों को भारत में चिकित्सकीय प्रैक्टिस करने के लिए निर्धारित एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास करनी होती है. एसओजी की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों ने यह परीक्षा पास नहीं की थी. इसके बावजूद उन्होंने कूटरचित प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कराई.
फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी की गई. इसके बाद कुछ आरोपी मरीजों को देखने और चिकित्सकीय कार्य करने लगे. इस मामले में एसओजी जयपुर थाने में प्रकरण संख्या 08/26 दर्ज किया गया था. भारतीय न्याय संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत 4 फरवरी 2026 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई.
गिरफ्तार आरोपियों में पहला नाम आशीष कुमार का है. 30 वर्षीय आशीष डीग जिले का रहने वाला है. एसओजी के अनुसार उसने पाकिस्तान से वर्ष 2021 में एमबीबीएस करने का सर्टिफिकेट बनवाया था. भारत में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड की एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा उसने तीन बार दी, लेकिन पास नहीं हो सका. इसके बाद आशीष ने शुभम गुर्जर के माध्यम से 25 लाख रुपये देकर एफएमजी परीक्षा का कूटरचित प्रमाणपत्र बनवाया. इसी प्रमाणपत्र के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया. एसओजी के मुताबिक शुभम गुर्जर को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वह न्यायिक अभिरक्षा में है. आशीष फिलहाल एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा की तैयारी कर रहा है.
आठ बार परीक्षा दी, फिर 29 लाख में बनवाया प्रमाणपत्र
दूसरा गिरफ्तार आरोपी 39 वर्षीय राजेन्द्र कुमार यादव है, जो जयपुर का रहने वाला है. एसओजी के अनुसार राजेन्द्र ने चीन से वर्ष 2006 से 2012 के बीच एमबीबीएस करने का सर्टिफिकेट हासिल किया था. वर्ष 2012 में उसने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड की एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा आठ बार दी, लेकिन वह परीक्षा पास नहीं कर सका. इसके बाद उसने संदीप नामक व्यक्ति के माध्यम से 29 लाख रुपये में एफएमजी परीक्षा का कूटरचित प्रमाणपत्र बनवाया. इसी प्रमाणपत्र के आधार पर राजेन्द्र ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया. एसओजी के अनुसार राजेन्द्र फिलहाल अपनी डॉक्टर पत्नी के अस्पताल नारायण हॉस्पिटल, मुरलीपुरा, जयपुर में प्रबंधन का काम देख रहा है. मामले में संदीप की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
तीसरा आरोपी 26 वर्षीय नरेश रोलानिया है. वह कोटपूतली-बहरोड़ जिले का रहने वाला है. एसओजी के अनुसार नरेश ने पाकिस्तान से वर्ष 2021 में एमबीबीएस की डिग्री बनवाई थी. उसने भी राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड की एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा तीन बार दी, लेकिन पास नहीं हुआ. इसके बाद उसके रिश्तेदार नरेन्द्र ने 26 लाख रुपये में एफएमजी परीक्षा का कूटरचित प्रमाणपत्र बनवाकर उसे दिया.
इस प्रमाणपत्र के आधार पर नरेश ने इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया और उदयपुर मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप पूरी की. जांच में सामने आया कि नरेश वर्तमान में पल्स हॉस्पिटल, कोटपूतली के इमरजेंसी वार्ड में काम कर रहा था. एसओजी के मुताबिक नरेश बिना एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास किए और बिना राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पंजीयन के मरीजों का इलाज कर रहा था.
एसओजी के उपमहानिरीक्षक भुवन भूषण यादव के नेतृत्व में और उपाधीक्षक पुलिस जितेन्द्र नावारिया की टीम ने इस मामले की जांच की. जांच के दौरान फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र बनवाने वाले 100 से ज्यादा विदेशी मेडिकल स्नातकों को चिन्हित किया गया है. इनमें से राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन समेत 30 लोगों को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है. अब तीन और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एसओजी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.
20 से 30 लाख रुपये में तैयार होता था फर्जी प्रमाणपत्र
एसओजी के पुलिस अधीक्षक कुन्दन कंवरिया के मुताबिक, इस मामले में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले करीब 25 डॉक्टरों के अलावा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन और मुख्य आरोपी दलाल भानाराम माली सहित कई लोगों को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है.
जांच में सामने आया कि भानाराम माली और उसके साथ काम करने वाले शुभम गुर्जर तथा इन्द्रराज गुर्जर विदेश से एमबीबीएस करने वाले उन लोगों को निशाना बनाते थे, जो एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाते थे. उनसे फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रत्येक व्यक्ति से 20 से 30 लाख रुपये तक लिए जाते थे.
एसओजी की जांच के अनुसार विदेश से एमबीबीएस करने वाले ऐसे अभ्यर्थी जो एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाते थे, वे दलालों के संपर्क में आते थे. इसके बाद उन्हें फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाता था. इन कूटरचित प्रमाणपत्रों को वास्तविक दिखाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए इस्तेमाल किया जाता था. पंजीयन के बाद इन लोगों को राजस्थान के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप का अवसर मिल जाता था. इंटर्नशिप पूरी करने के बाद कुछ आरोपी चिकित्सकीय कार्य भी करने लगे. इस तरह फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता तैयार किया गया.
14 अगस्त तक पुलिस रिमांड
एसओजी ने तीनों गिरफ्तार आरोपियों को जयपुर महानगर द्वितीय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. अदालत ने आरोपियों की 14 अगस्त 2026 तक पुलिस हिरासत मंजूर की है. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है. जांच का फोकस फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने पर है. एसओजी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने विदेशी मेडिकल स्नातक शामिल हैं. इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र किस स्तर पर तैयार किए जाते थे और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही. एसओजी का कहना है कि मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है. जांच आगे बढ़ने के साथ फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है.