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प्रोजेक्ट उत्तराखंड में, फिर UP को संपत्तियां क्यों मिलीं? टिहरी डैम विवाद पर SC की नसीहत- बैठकर बात करें

टिहरी हाइड्रोपावर की संपत्तियों को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच 2012 से विवाद चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को बातचीत से समाधान तलाशने की सलाह दी है. मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी.

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सुप्रीम कोर्ट में टिहरी प्रोजेक्ट की संपत्तियों पर सुनवाई. (Photo: Pexels)
सुप्रीम कोर्ट में टिहरी प्रोजेक्ट की संपत्तियों पर सुनवाई. (Photo: Pexels)

टिहरी हाइड्रोपावर की संपत्तियों को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच करीब 14 साल से मामला अदालत में अटका है. अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों से कहा है कि वे आपस में बैठकर इस विवाद का हल निकालने की कोशिश करें. कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या मामले को मध्यस्थता के लिए भेजना एक रास्ता हो सकता है.

विवाद की जड़ 2001 में उत्तर प्रदेश के बंटवारे से जुड़ी है. उत्तराखंड का कहना है कि टिहरी हाइड्रोपावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) की कुछ संपत्तियां बंटवारे के दौरान उत्तर प्रदेश को दे दी गईं, जबकि प्रोजेक्ट उत्तराखंड में है. इसी आधार पर उत्तराखंड इन संपत्तियों पर अपना दावा जता रहा है.

2012 से अदालत में चल रहा मुकदमा

उत्तराखंड ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह 2012 से इस मामले में मुकदमा लड़ रहा है. सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि दूसरी तरफ से सबूत दाखिल करने में बार-बार देरी हुई. वरिष्ठ वकील अमित आनंद तिवारी ने कोर्ट को बताया कि 2019 में इस मामले में 30 लाख रुपये की लागत लगाई गई थी. इसके बावजूद अब दूसरी तरफ से निर्देश लेने के लिए चार हफ्ते का और समय मांगा गया है. उन्होंने यह भी बताया कि 2012 का मुकदमा करीब तीन साल बाद फिर सूची में आया है.

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अटॉर्नी जनरल की राय का भी जिक्र

उत्तराखंड ने कोर्ट में कहा कि उस समय अटॉर्नी जनरल ने उसकी संपत्तियों पर दावे को ‘जस्टिफाएबल क्लेम’ यानी उचित दावा माना था. हालांकि, राज्य के मुताबिक इस विवाद का अंतिम समाधान सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही संभव है. यहीं पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को एक दूसरे नजरिए से देखा. कोर्ट ने कहा कि आखिर यह विवाद दो राज्यों के बीच है, इसलिए पहले यह देखना चाहिए कि क्या दोनों अपने स्तर पर इसे सुलझा सकते हैं.

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने बताया कि उन्होंने उत्तराखंड के अटॉर्नी जनरल से बात की है. उन्होंने संकेत दिया कि दोनों राज्यों के बीच बातचीत से मामला सुलझने की संभावना देखी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले को आगे बढ़ाते हुए 28 सितंबर 2026 की तारीख तय की है. दोनों पक्षों से यह पता करने को कहा गया है कि क्या मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा जा सकता है. यानी 2012 से चली आ रही इस संपत्ति की लड़ाई में अब कोर्ट सीधे फैसला सुनाने से पहले बातचीत का रास्ता भी आजमाना चाहता है. अब अगली सुनवाई में दोनों राज्यों का रुख साफ होगा.
 

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