| Parameter | Scenario 1 (Current) | Scenario 2 (Alternate) |
|---|---|---|
| Loan Amount | ₹ 0 | ₹ 0 |
| Interest Rate (%) | 0.00% | 0.00% |
| Loan Tenure | - | - |
| Monthly EMI | ₹ 0 | ₹ 0 |
| Total Savings | 0 | ₹ 0 Saved |
| Parameter | Scenario 1 (Current) | Scenario 2 (Alternate) |
|---|---|---|
| Loan Amount | ₹ 0 | ₹ 0 |
| Interest Rate (%) | 0.00% | 0.00% |
| Loan Tenure | - | - |
| Monthly EMI | ₹ 0 | ₹ 0 |
| Total Savings | - | ₹ 0 Saved |
| Parameter | Scenario 1 (Current) | Scenario 2 (Alternate) |
|---|---|---|
| Loan Amount | ₹ 0 | ₹ 0 |
| Interest Rate (%) | 0.00% | 0.00% |
| Loan Tenure | - | - |
| Monthly EMI | ₹ 0 | ₹ 0 |
| Total Savings | - | ₹ 0 Saved |
The EMI that you pay has two components- principal and interest. At the beginning of repayment schedule, a majority potion goes towards interest payment.
| Month | Payment Date | EMI (₹) | Principal (₹) | Interest (₹) | Balance (₹) |
|---|
घर खरीदने के लिए बहुत बड़ी रकम की जरूरत होती है. ऐसे में होम लोन (Home Loan) की मदद से आप घर खरीदने के लिए बैंक या अन्य कर्जदाता (Lender) से पैसा ले सकते हैं और उसे हर महीने EMI के जरिए चुका सकते हैं. होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर (Home Loan EMI Calculator) की मदद से आप पहले ही पता कर सकते हैं कि किसी तय कर्ज की रकम (Loan Amount), ब्याज दर (Interest Rate) और समयावधि (Loan Tenure) पर आपकी हर महीने की EMI कितनी हो सकती है. इससे आपको यह समझने में मदद मिलती है कि आपके लिए कितना होम लोन लेना सही रहेगा और हर महीने कितना पैसा चुकाना होगा.
होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर (Home Loan EMI Calculator) एक ऐसा ऑनलाइन टूल (Online Tool) है, जो कर्ज की अनुमानित मासिक किस्त (Monthly EMI) निकालने में मदद करता है. इसके लिए आपको आमतौर पर तीन जानकारी देनी होती है.
इन जानकारियों के आधार पर Calculator आपको Monthly EMI, Total Interest और Total Repayment Amount का अनुमान देता है.
होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर कर्ज की रकम, ब्याज दर और कर्ज की समयावधि को Calculation में शामिल करता है. कर्ज की रकम जितनी ज्यादा होगी, आमतौर पर EMI भी उतनी ज्यादा होगी. इसी तरह ब्याज दर बढ़ने पर EMI और कुल ब्याज बढ़ सकता है. कर्ज की समयावधि (Loan Tenure) बढ़ाने पर मासिक किस्त (Monthly EMI) कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक ब्याज चुकाने के कारण कुल ब्याज (interest) ज्यादा हो सकता है.
Home Loan EMI निकालने के लिए इस Formula का इस्तेमाल किया जाता है.
EMI = P × R × (1+R)^N ÷ [(1+R)^N-1]
यहां,
मान लीजिए आपने ₹50 लाख का होम लोन लिया है. Interest Rate 8.5% सालाना है और Loan Tenure 20 साल है.
यह माना गया है कि 20 साल की पूरी अवधि में 8.5% की ब्याज दर समान रहती है. होम लोन की वास्तविक EMI और कुल Repayment ब्याज दर, लोन की शर्तों और ब्याज दरों में होने वाले बदलावों के आधार पर अलग हो सकती है.
Home Loan की EMI मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करती है.
Loan Amount: ज्यादा loan लेने पर EMI आमतौर पर ज्यादा होगी.
Interest Rate: ब्याज दर ज्यादा होने पर EMI और कुल ब्याज बढ़ सकता है.
Loan Tenure: ज्यादा अवधि चुनने पर Monthly EMI कम हो सकती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा हो सकता है.
इसके अलावा Floating Rate Loan में Interest Rate बदलने पर EMI या Loan Tenure भी बदल सकता है. RBI ने बैंकों और अन्य कर्जदाताओं को ब्याज दरों में होने वाले बदलावों के असर के बारे में ग्राहकों को जानकारी देने और लागू नियमों के अनुसार विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.
अगर बाकी सभी चीजें समान रहें और ब्याज दर (Interest Rate) बढ़ जाए, तो होम लोन की EMI बढ़ सकती है. वहीं ब्याज दर कम होने पर EMI कम हो सकती है. Floating Rate Home Loan में ब्याज दर बाजार और संबंधित बेंचमार्क के बदलाव के आधार पर बदल सकती है. इसका असर EMI या कर्ज अवधि पर पड़ सकता है.
Loan Tenure बढ़ाने पर आपकी मासिक किस्त (Monthly EMI) कम हो सकती है क्योंकि कर्ज का पूरा भुगतान ज्यादा महीनों में बंट जाती है. लेकिन लंबे समय तक लोन चलने के कारण कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ सकता है. कर्ज की समयावधि कम करने पर EMI बढ़ सकती है, लेकिन कुल देय ब्याज (Interest) कम हो सकता है. इसलिए Loan Tenure चुनते समय सिर्फ EMI नहीं, बल्कि कुल Repayment और Total Interest भी देखना चाहिए.
EMI वह रकम है जो आप हर महीने Loan चुकाने के लिए देते हैं. इसमें दो हिस्से होते हैं. एक हिस्सा Principal यानी मूल Loan Amount को चुकाने में जाता है और दूसरा हिस्सा Interest यानी ब्याज के रूप में जाता है. होम लोन की शुरुआत में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज यानी Interest में जा सकता है. समय के साथ मूल धन यानी Principal का हिस्सा बढ़ता जाता है.
Home Loan Prepayment का मतलब है कि आप तय समय से पहले कर्ज की कुछ रकम या पूरा Outstanding Loan चुका दें. Partial Prepayment में आप Loan की कुछ रकम पहले चुका सकते हैं. इससे Loan का Outstanding Amount कम हो सकता है और आगे चुकाया जाने वाला ब्याज यानी Interest भी कम हो सकता है. Floating Rate वाले Individual Home Loans पर Prepayment Penalty के संबंध में RBI के नियम लागू होते हैं. कर्ज लेते वक्त हुए अग्रीमेंट और अन्य संबंधित नियम और शर्तों को जरूर देखें.
Home Loan की EMI कम करने के कुछ तरीके हो सकते हैं.
हालांकि EMI कम करने के लिए समयावधि या Tenure बढ़ाने पर कुल देय ब्याज बढ़ सकता है. इसलिए सिर्फ कम EMI देखकर फैसला नहीं करना चाहिए.
Down Payment वह रकम है जो आप घर खरीदते समय अपनी तरफ से देते हैं. बाकी रकम Home Loan के जरिए पूरी की जा सकती है. उदाहरण के लिए, अगर किसी घर की कीमत ₹60 लाख है और आप ₹10 लाख अपनी तरफ से देते हैं, तो बाकी रकम के लिए ₹50 लाख का लोन लिया जा सकता है. ज्यादा डाउन पेमेंट करने से कर्ज की रकम कम हो सकती है, जिससे EMI और कुल ब्याज का बोझ भी कम हो सकता है.
होम लोन की मदद से आप अपनी पूरी बचत पूंजी खर्च किए बिना घर खरीदने की योजना बना सकते हैं. लोन को कई साल में EMI के जरिए चुकाया जा सकता है. Home Loan लेने से पहले Interest Rate, Processing Fee, Other Charges, Tenure, Prepayment Rules, Repayment Amount आदि को समझना जरूरी है.
Home Loan EMI Calculator आपको अनुमानित EMI और कुल भुगतान की जानकारी देता है. यह इस बात की गारंटी नहीं देता कि बैंक आपको उतनी ही रकम का कर्ज देगा. आपको कितना लोन मिलेगा, यह आपकी आय, क्रेडिट हिस्ट्री, कर्ज चुकाने की क्षमता, संपत्ति और बैंक की दूसरी शर्तों पर निर्भर करता है. अगर कर्ज की ब्याज दर समय के साथ बदलती है, तो भविष्य की EMI Calculator में दिखाई गई शुरुआती EMI से अलग हो सकती है.
Fixed Rate Home Loan में ब्याज दर एक तय अवधि या पूरी कर्ज अवधि के लिए तय रह सकती है. इससे हर महीने चुकाई जाने वाली EMI का अनुमान लगाना आसान होता है.
Floating Rate Home Loan में ब्याज दर समय के साथ बदल सकती है. ब्याज दर बढ़ने पर EMI या कर्ज चुकाने की अवधि बढ़ सकती है. वहीं, ब्याज दर कम होने पर EMI या कुल भुगतान कम हो सकता है.