अक्सर आपने देखा होगा कि जब टीवी या एसी का रिमोट अच्छे से काम नहीं करता है तो लोग सबसे पहले उसके पिछले हिस्से को पीटते हैं. या फिर उसमें लगे सेल को निकालते हैं, उनके साफ करते हैं और दांत से दबाकर उसे फिर लगा लेते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करने के बाद रिमोट काम करने लग जाएगा और सेल फिर से लंबे समय तक काम करने लगेंगे. तो आज हम आपको साइंस के हिसाब से बताते हैं कि आखिर दांत से दबाने या रिमोट को पीटने से हकीकत में कुछ होता है या फिर ये सिर्फ भम्र है....
कैसे-कैसे करते हैं जुगाड़?
जब टीवी देखते समय अचानक रिमोट काम करना बंद कर देता है, तो लोग अक्सर नया सेल डालने के बजाय तुरंत ये तरीका आजमाते हैं. कई लोग रिमोट को हाथ या सोफे पर पटकते हैं. इसके अलावा कुछ लोग सेल को आपस में रगड़ते हैं या फर्श पर मारने लगते हैं. इसके अलावा कुछ दांतों से चबाते हैं या फिर सेल को थोड़ा सा दबा देते हैं. उनका तर्क होता है कि ऐसा करने से सेल कुछ दिन और चलता है और थोड़ा सा पिचका सेल चलता है.
क्या ये सब काम करते हैं?
तो आज समझते हैं कि क्या सही में ये जुगाड़ कारगर हैं. दरअसल रिमोट को थपथपाने या हल्का झटका देने के बाद वह कुछ समय के लिए चल सकता है. लेकिन, ऐसा नहीं है कि इससे बैटरी में नई ऊर्जा पैदा होती है. अक्सर झटके से बैटरी और रिमोट के धातु वाले कॉन्टैक्ट थोड़े हिलते हैं. उन पर बनी ऑक्साइड/गंदगी की पतली परत टूट सकती है और विद्युत संपर्क बेहतर हो सकता है. कई बार बैटरी का संपर्क ठीक नहीं होता है तो इससे कुछ देर के लिए सही हो जाता है. बैटरी और रिमोट के बीच खराब इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट अस्थायी रूप से ठीक हो जाता है.
वहीं, जो सेल रगड़ने वाला तरीका है, कुछ सेकेंड्स के लिए कारगर हो सकता है. दरअसल, बैटरी को उसकी जगह पर थोड़ा घुमाने से उसका सिरा रिमोट के स्प्रिंग से रगड़ता है और संपर्क की सतह साफ हो सकती है. इसलिए कमजोर बैटरी होने पर रिमोट फिर से चल सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बैटरी की असल क्षमता वापस आ गई. यह अक्सर सिर्फ इतना करता है कि बची हुई ऊर्जा को कुछ देर इस्तेमाल करने लायक संपर्क मिल जाता है.
लेकिन, दांत से दबाने वाला जुगाड़ कारगर हो या ना हो, लेकिन ये ट्रिक खतरनाक साबित हो सकता है. दांत से दबाने पर बैटरी की बाहरी सील क्षतिग्रस्त हो सकती है. अगर सेल में छेद हो जाता है तो ये लीक हो सकता है, जिसकी वजह से शॉर्ट-सर्किट का खतरा पैदा हो सकता है. बैटरी सेफ्टी गाइडेंस में सेल को क्रश, बेंड, पंचर ना करने की साफ सलाह दी जाती है.