चीन में घर बनाने का तरीका सबसे अलग है. यही वजह है कि वहां घर खड़ा करने में ज्यादा समय नहीं लगता. क्योंकि, चीन में दीवार खड़ी करने के लिए ईंट का इस्तेमाल बहुत कम होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर वहां ईंट इस्तेमाल ही नहीं होता तो फिर घर कैसे बनते हैं. चलिए जानते हैं चीन में घर बनाने की अनोखी टेक्नोलॉजी की कहानी.
चीन में आधुनिक घर की दीवारों में ईंट नहीं होती है. सुनकर यह अजीब लग सकता है, लेकिन यही सच्चाई है. यहां घर बनाने में दीवारें अलग-अलग ईंटों के बजाय सीधे कंक्रीट से बनाई जाती है. यहां पहले से स्टील के वायर से एक फ्रेमवर्क यानी सांचा जैसा ढांचा तैयार किया जाता है. यह स्टील के वायर से बने जाले की तरह दिखते हैं.
यह स्टील का ढांचा ठीक वैसा ही होता है, जैसा हम अपने यहां पिलर खड़ा करने के लिए बनाते हैं. बस फर्क इतना होता है कि इसकी मोटाई मकान की मजबूती के हिसाब से कम या ज्यादा होती है और यह काफी मोटे सरिये के बजाय स्टील के वायर से तैयार किया जाता है.
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फिर इन जालीदार पिंजरों को नींव पर मजबूती से फिक्स कर दिया जाता है. इसके बाद इसमें एक प्रेशर पंप से या हाथ से ही कंक्रीट भर दिया जाता है. ढांचे में इस तरह से कंक्रीट यानी सीमेंट, रेत और बजरी का मिश्रण डाला जाता है कि जाले में ऊपर से नीचे तक भर जाती. इस तरह यह एक ठोस और मजबूत दीवार का रूप ले लेती है.
इन जालीदार ढांचों में मसाला भर देने के बाद इसके बाहरी सतह को भी फिनिशिंग टच दिया जाता है. इस तरह से दीवार खड़ी करने में एक- एक ईंट जोड़ने की जरूरत नहीं होती है. इसमें समय भी कम लगता है. मजदूर भी कम इस्तेमाल होते हैं और खर्चा भी कम आता है. इसके अलावा यह ईंट की दीवार से कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होता है.
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इस तरह दीवार खड़ी करने के अलावा अलग से भी ऐसे स्टील के वायर से बने सांचों में मसाले भरकर बड़े- बड़े पैनल तैयार कर लिए जाते हैं. फिर इन्हें एक पर एक जोड़कर भी दीवार खड़ी कर ली जाती है. इस तरह की दीवार में भी ईंट का कहीं इस्तेमाल नहीं होता है और इसमें समय और खर्चा भी कम लगता है.