मौका मिले तो मुमकिन है. बात बिलकुल सही है, पर कई वाजिब सवाल भी हैं. का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को खुली छूट मिले तो वह निकाल सकते हैं. शरद यादव ने जो भरोसा जताया है वो अच्छी बात है. की इसी तरह उम्मीद की जानी चाहिए. एक छोटी सी उम्मीद ही होती है जो बड़ी समस्याओं को समाधान तक पहुंचाती है. मुफ्ती की पार्टी पीडीपी के पास कश्मीर समस्या के समाधान के लिए सबसे बड़ा हथियार है - 'सेल्फ रूल दस्तावेज'. क्या शरद यादव उसी के दम पर समाधान की उम्मीद जता रहे हैं या कुछ और बात है?
सबसे पहले डिस्क्लेमर
मुफ्ती से अपनी मुलाकात पर शरद यादव ने पहले ही सफाई दे दी, 'अगर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मैं उन्हें जनता परिवार में शामिल होने का न्योता देने के लिए आया था तो गलत होगा.' पीडीपी के लोक सभा में तीन और राज्य सभा में दो सांसद हैं. अब तक जनता परिवार के पास लोक सभा में 15 और राज्य सभा में 30 सांसद हो चुके हैं. फिलहाल पीडीपी केंद्र में एनडीए का हिस्सा है - और जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के साथ उसकी सरकार बनी हुई है. जनता परिवार में अब तक कुल छह दल शामिल हैं - औरों से भी बातचीत की बात कही जा रही है. हालांकि, ममता बनर्जी, जयललिता और नवीन पटनायक की पार्टियां और ना ही लेफ्ट ने जनता परिवार में कोई रुचि दिखाई है. ऐसे में जबकि पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के केंद्र में मंत्री बनने की चर्चा उठती रही है, शरद यादव के डिस्क्लेमर का दावा मजबूत दिखता है.
क्या सेल्फ रूल से समाधान संभव है?
पीडीपी का दावा रहा है कि 'सेल्फ रूल दस्तावेज' से ही कश्मीर समस्या का है, जिसके तहत एलओसी पर संबंधों को सुधारने और मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने सहित राज्य विधानसभा की ताकतों को बहाल करने लक्ष्य है. पीडीपी चाहती है कश्मीर को बफर व्यापार जोन बनाया जाए जिसमें चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और भूटान के बीच उसी तरह मुक्त व्यापार हो जैसे यूरोपीय ढांचे में होता है.
साल 2008 में रिलीज हुए ‘सेल्फ रूल फ्रेमवर्क फॉर रिजॉल्युशन’ में पीडीपी ने साफ किया है कि उनका मिशन 'सेल्फ रूल' यानी 'स्व-शासन' है, न कि स्वायत्तता. इसके तहत पीडीपी धारा 370 बरकरार रखने के साथ ही चाहती है कि धारा 249 को भी हटाया जाए ताकि राज्य के मामलों में संसद दखल न दे पाए. साथ ही पार्टी धारा 356 को भी हटाने की वकालत करती है.
हेडलाइंस टुडे के साथ एक इंटरव्यू में एक बार पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा था, "दो ध्वज और एक अलग संविधान वास्तविकता है. मैं इसमें नहीं पड़ना चाहती. हमें राज्य से 'अफस्पा' को चरणबद्ध तरीके से हटा कर और धारा 370 पर यथास्थिति बनाए रख राज्य की जनता का सम्मान करना चाहिए." पीडीपी चाहती है कि केंद्र सरकार सिर्फ सरहदों की रक्षा, संचार, करंसी और विदेश मामलों तक ही सीमित रहे, जो धारा 370 के तहत आता है.
ये सब पीडीपी के चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा है, जिसमें पार्टी ने लोगों से कहा था कि सत्ता में आने पर वो मुख्यमंत्री कार्यालय में टोल फ्री हॉटलाइन भी स्थापित करेगी, ताकि राज्य के बाहर जो भी कश्मीरी हैं, वह जरूरत पड़ने पर सीधे संपर्क कर सकें.
शरद के भरोसे में कितना दम?
बस बीते हफ्ते की बात है. ' ' का नारा लगाते हुए पाकिस्तानी झंडा फहराने वाले मसरत आलम के खिलाफ मुफ्ती की पुलिस ने तब जाकर कार्रवाई की जब पूरे देश में बवाल होने लगा, केंद्र ने एडवायजरी जारी की - और फिर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बात की. चुनाव जीतने के बाद मुफ्ती ने पाकिस्तान, हुर्रियत और आतंकवादी संगठनों को चुनाव के शांतिपूर्ण तरीके से होने के लिए शुक्रिया अदा किया था.
विधान सभा चुनावों से पहले पीडीपी ने एलान किया था कि राज्य में उपद्रवग्रस्त क्षेत्र अधिनियम संबंधित मुद्दों की समीक्षा करते हुए 'अफस्पा' हटाने का रास्ता खोजेंगे. साथ ही, पत्थरबाजी के आरोप में पकड़े गए युवकों के मामलों की समीक्षा कर उन्हें खत्म कराएंगे.
क्या 'सेल्फ रूल' से इतर भी मुफ्ती के हाथों में वाकई जादू की कोई छड़ी है जो कश्मीर समस्या का समाधान कर सकती है? या शरद यादव ने ये बयान इसलिए दे दिया कि उन्हें मीडिया में कुछ बोलना था.