आजतक के एक कार्यक्रम में रेलवे की ओर से फंसे मजदूरों से किराया लिए जाने को लेकर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी सरकार गरीबों के कल्याण और उनके जीवनयापन के लिए कई तरह की योजनाओं के जरिए 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपये खर्च कर सकती है तो प्रवासी और फंसे लोगों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए 34 ट्रेन चलानी पड़ी हैं तो इसके लिए 10 करोड़ रुपये का खर्च भी वहन नहीं कर सकती.
उन्होंने कहा कि कई राज्य ऐसे भी हैं जो चाहते हैं कि जल्द से जल्द प्रवासी लोग अपने-अपने गंतव्य चले जाएं ताकि उनके यहां पर यह चीजें न हों और किसी तरह के मामलों में ज्यादा वृद्धि न हो. उनको दिमागी तौर पर यह राहत मिले कि हमारे यहां से चले गए और अब वहां के लोग संभाले.
राज्यों की हो जवाबदेहीः पात्रा
फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घर लाने-ले जाने के लिए जवाबदेही होनी चाहिए. उस राज्य से जहां से लोग निकल रहे हैं और उस राज्य से भी जहां लोग पहुंच रहे हैं. और यह जवाबदेही कैसे तय होगी तो इसलिए रेलवे की ओर से जो श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई उसमें संघीय ढांचा बनाया गया जिसमें 85 फीसदी का भुगतान केंद्र करेगा तो 15 फीसदी राज्य सरकार देगी.
संबित पात्रा ने यह भी साफ किया कि किसी भी स्टेशन पर टिकट काउंटर बनाए ही नहीं गए हैं. 12 सौ टिकट जो केंद्र सरकार, राज्य सरकार को देगी और वह राज्य सरकार यह तय करेगी कि किसे जाने दिया जाए. उसकी प्राथमिकता राज्य तय करेगी.
राज्यों के पास 3 विकल्पः पात्रा
उन्होंने कहा कि अब राज्य के पास 3 तरह के विकल्प थे कि वो 15 फीसदी का भुगतान कैसे करे. पहला, वह खुद अपने राजस्व से दे. दूसरा, किसी एनजीओ के जरिेए भुगतान ले या फिर तीसरा, मजदूरों से किराया वसूले. 6 राज्य ऐसे हैं जिन्होंने मजदूरों से कोई किराया नहीं वसूला और खुद दे दिया. इसमें कांग्रेस शासित राज्य भी शामिल हैं. ये राज्य हैं त्रिपुरा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस शासित राज्य भी है.
अब जिन 3 राज्यों ने मजदूरों से पैसा लिया और वे राज्य हैं राजस्थान, महाराष्ट्र और केरल. जिसमें राजस्थान और महाराष्ट्र में तो कांग्रेस की सरकार है तो केरल में वह एक तरह से प्रमोटर्स है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज सुबह जो कुछ कहा उसकी जगह उन्हें कहना चाहिए था कि कांग्रेस शासित राज्य अन्य राज्यों की तरह मजदूरों से पैसा न लें. लेकिन सोनिया इस पर राजनीति करना चाहती हैं.
केंद्र की क्या है योजनाः राजीव त्यागी
कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने कहा कि केंद्र से यह पूछा जाना चाहिए कि देशभर से मजदूरों को लाने की सरकार की क्या योजना है. देशभर में 10 करोड़ लोग फंसे हुए हैं. 1 करोड़ मजदूरों को लाने के लिए 10 हजार ट्रेन चलाने की जरूरत पड़ेगी तो 10 करोड़ के लिए कितनी ट्रेनें चलवानी पड़ेगी. यह सरकार को बताना चाहिए. सरकार का कहना है कि उसकी ऐसी कोई मंशा नहीं है पैसा कमाने की.
उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार खाने और ट्रांसपोटेशन आदि पर गुजरात में 100 करोड़ खर्च कर सकती है. इसके अलावा रेल मंत्रालय भी पीएम रिलीफ फंड में दान कर सकता है तो 10 करोड़ रुपये की मदद नहीं कर सकता था.
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उन्होंने एक पत्र दिखाते हुए कहा कि रेल मंत्रालय का 2 मई का यह पत्र है जिसमें 11वें नंबर पर किराया वसूलने की बात कही गई है. रेलवे निश्चित तौर पर पैसा कमाना चाहता है. सरकार अमानवीय काम कर रही है. आज श्रमिकों के पास 100 रुपये तक नहीं बचे. ऐसे में केंद्र सरकार ने मजदूरों को छलने का काम किया है. क्या गरीब, मजदूरों के लिए यह देश नहीं है.
नागपुर से लखनऊ ट्रेन के जरिए आने के लिए 505 रुपये का टिकट लिए जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने कहा कि 3 मई को महाराष्ट्र के मंत्री नितिन रावत ने रेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा था कि प्रवासियों से कोई किराया नहीं वसूलना चाहिए. रेलवे केंद्र के आधीन आता है न कि राज्य के आधीन. यहां तक कि किराया नहीं वसूलने को लेकर उसकी ओर से किसी तरह की अधिसूचना जारी नहीं की गई.