भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के ऊपर सामने ही चमकदार लाल रंग का षट्कोणीय चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है. इसका सीधा मकसद उपभोक्ताओं को जागरूक करते हुए सेहतमंद विकल्प चुनने में मदद करना है.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली पीठ ने पिछले हफ्ते FSSAI और केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी. अदालत ने एक एनजीओ की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान बच्चों में मोटापे की बढ़ती प्रवृत्ति के लिए कंपनियों के उन खाद्य उत्पादों को जिम्मेदार माना था, जिन पर फैट, चीनी, नमक रहता तो बहुत ज्यादा है लेकिन कंपनियां उसे पैकेट पर स्पष्टता से छापती नहीं हैं.
उसके बाद ही ये सुधार की घोषणा सरकार ने हलफ़नामे के जरिए की है. यदि किसी खाद्य पदार्थ में तय मानक से अधिक चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट होगा, तो पैकेट के सामने कंपनियों को लाल रंग का षट्भुजाकार यानी स्टॉप साइन जैसा चेतावनी लेबल लगाना होगा.
पैकेट पर साफ अक्षरों में HIGH SUGAR यानी अधिक चीनी, HIGH SALT यानी अधिक नमक या फिर HIGH FAT यानी अधिक वसा लिखना अनिवार्य होगा. इसके लिए बड़ा फॉन्ट साइज होगा. यानी पैकेट के पीछे न्यूट्रिशन टेबल में इस्तेमाल होने वाले फॉन्ट से इसका आकार कम से कम एक पॉइंट बड़ा होगा.
यह इसलिए ऐसा किया जा रहा है कि ताकि ग्राहक इसे आसानी से देख और पढ़ सकें. इसे दो चरणों में लागू करने की योजना है. पहले चरण के तहत यह कवायद सबसे पहले उन पैकेटों पर अनिवार्य होगी, जिनमें चीनी, नमक या वसा में से कोई दो या दो से अधिक तत्व तय सीमा से ज्यादा हैं.
दूसरे फेज में इसे उन उत्पादों पर भी लागू किया जाएगा, जिनमें इनमें से कोई भी एक तत्व अधिक मात्रा में होगा. कुछ खाद्य उत्पादों को इससे छूट मिलेगी. घी, तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे एकल-सामग्री वाले बुनियादी खाद्य पदार्थों को इस फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी से बाहर रखने का प्रस्ताव है.