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सामान्य वर्ग आरक्षण: लोकसभा से संशोधन बिल पास, राज्यसभा में आज होगा पेश

Reservation Bill in Loksabha लोकसभा के शीतकालीन सत्र को मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. 11 दिसंबर से प्रारंभ हुए शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन के अलावा पूरे सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया गया. हालांकि राज्यसभा की बैठक बुधवार तक के लिए बढ़ा दी गई है

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लोकसभा में आरक्षण से जुड़ा संशोधन बिल पास
लोकसभा में आरक्षण से जुड़ा संशोधन बिल पास

लोकसभा के शीतकालीन सत्र को मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. 11 दिसंबर से प्रारंभ हुए शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन के अलावा पूरे सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया गया. हालांकि राज्यसभा की बैठक बुधवार तक के लिए बढ़ा दी गई है और वहां अंतिम दिन उच्च सदन में संविधान (124वां संशोधन) विधेयक पर चर्चा और इसके पारित होने की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया और कहा कि हम 'सबका साथ सबका विकास' नीति पर चल रहे हैं.

लोकसभा की बैठक मंगलवार देर रात तक चली क्योंकि सदन में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को पारित किया गया. इसके बाद राष्ट्रगीत की धुन बजाए जाने के पश्चात लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन की बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की. इससे पहले महाजन ने अपने पारंपरिक संबोधन में कहा कि सत्र के दौरान लोकसभा की 17 बैठकें हुईं और 46 घंटे काम हुआ. इस दौरान 2018-19 की अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच को सदन की मंजूरी दी गई.

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PM मोदी ने कहा- ऐतिहासिक पल

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी संविधान संधोधन विधेयक के पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समर्थन करने वाले सभी सांसदों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आरक्षण बिल पास होना देश के इतिहास में ऐतिहासिक पल है. हम 'सबका साथ सबका विकास' की नीति पर पूरी तरह कटिबद्ध हैं. यह जाति, संप्रदाय से ऊपर उठकर गरीब के लिए बेहतर करने का प्रयास है. विधेयक का समर्थन करने वाले सभी सांसदों को धन्यवाद.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी ट्वीट कर इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. स्वराज ने भी ट्वीट कर इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, 8 जनवरी 2019 का दिन भारत की लोक सभा के लिए एक ऐतिहासिक दिवस है. आज लोकसभा ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान से भारत में आए हुए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को जैसे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान किए जाने वाला विधेयक पारित किया है.

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पूरी हुई पुरानी मांग

बुधवार को राज्यसभा में आरक्षण संबंधी यह बिल पेश किया जाएगा. इस बिल को ऐतिहासिक करार देते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में कल पेश होने वाले बिल पर उम्मीद जताई कि वहां भी यह बिल पास हो जाएगा. उन्होंने कहा कि अब तक जिन लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता था, अब उन्हें भी फायदा मिलेगा. ये लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग थी. यह बिल देश के हित में लाया गया है. उम्मीद है कि राज्यसभा में भी यह बिल पास हो जाएगा. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने भी ट्वीट करते हुए आरक्षण बिल पास होने पर सभी को बधाई दी.

82 फीसदी विधेयक पास

अध्यक्ष ने सत्र का समापन करते हुए कहा कि सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयक पुनस्थापित किए गए और अनेक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए. सदन में पेश महत्वपूर्ण विधेयकों में ट्रांसजेंडर अधिकार संबंधी विधेयक, सरोगेसी संबंधी विधेयक, ऑटिज्म से प्रभावित लोगों से जुड़ा विधेयक, मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक, आईएमसी संशोधन विधेयक, नागरिकता संशोधन विधेयक और संविधान (124वां संशोधन) विधेयक शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि सूचीबद्ध विधेयकों में 82.35 प्रतिशत विधेयक पारित हुए. सदन में स्थाई समितियों के 42 प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए गए. सत्र के दौरान राफेल सौदे के मुद्दे पर नियम 193 के तहत आठ घंटे 21 मिनट की चर्चा हुई और इस पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया.

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49 सदस्य किए गए निलंबित

सदन की कार्यवाही में बाधा डालने पर सख्त कदम उठाते हुए स्पीकर ने अन्नाद्रमुक (AIADMK) और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सदस्यों समेत 49 सदस्यों को सदन के कामकाज की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया. लोकसभा में इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके मंत्रिमंडल के लगभग सभी मंत्री, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, और विभिन्न दलों के प्रमुख नेता मौजूद थे.

शीतकालीन सत्र के दौरान राफेल सौदे की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने, कावेरी पर प्रस्तावित बांध, आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग, उत्तर प्रदेश में खनन मामले की जांच सहित विभिन्न मुद्दों पर अलग अलग दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई.

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