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'पुलिसवाले मुझे घसीटकर ले गए, लेकिन कान में कह रहे थे इस सरकार को हटाएं', बोले राहुल

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सरकार मेरे साथ क्या बर्ताव कर रही है, उसकी मुझे एकदम चिंता नहीं है. सरकार मेरे साथ 5 गुना और बुरा व्यवहार करे लेकिन फोकस छात्रों पर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिस में भी सरकार के खिलाफ माहौल है.

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राहुल गांधी को पुलिस PM आवास के सामने से घसीटकर ले गई. (Photo: PTI)
राहुल गांधी को पुलिस PM आवास के सामने से घसीटकर ले गई. (Photo: PTI)

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के घर के सामने धरने के दौरान हुए घटनाक्रम को बताया है. राहुल गांधी ने कहा कि जो पुलिसवाले मुझे वहां से हटा रहे थे वे भी मेरे कानों में कह रहे थे कि इस सरकार को हटाएं. राहुल गांधी ने मुझे मेरे साथ हुए बर्ताव की चिंता नहीं है. मेरे साथ जो व्यवहार हुआ था, उससे पांच गुना और गलत व्यवहार सरकार मेरे साथ करे लेकिन फोकस छात्रों पर होना चाहिए. छात्रों को सिस्टम में चेंज चाहिए. राहुल ने कहा कि कल मेरे मुंह से खून निकल रहा था, लेकिन हम छात्रों की मांग के साथ डटे थे. 

राहुल गांधी ने बुधवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने छात्रों की मांगों और पीएम हाउस के सामने धरने के दौरान हुए हंगामे का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सही है कि पुलिसवाले मुझे थोड़ा घसीट कर ले गए लेकिन वो कान में कह रहे थे कि इस सरकार को हटाओ. राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, " सचुमच में वे ऐसा कह रहे थे. मैं (पुलिसकर्मी) राजस्थान का हूं. इसको (सरकार) को हटाइए. हम सिर्फ वर्दी पहने हैं."

राहुल ने आगे कहा, "दूसरा पुलिसकर्मी कह रहा है मैं हरियाणा का हूं इनको हटाइए. तो वहां पुलिस के बीच भी ऐसा ही माहौल है. और सच्चाई सब कोई जानते हैं. उन बेचारों को ऑर्डर मानना पड़ता है तो वे मानते हैं, लेकिन जो हुआ है, उससे पुलिस भी नहीं खुश है, समझदार पुलिसवाले समझते हैं कि ये बच्चों के साथ क्राइम किया गया है, हम जिन्हें प्यार करते हैं, जो भारत के भविष्य हैं उनके साथ अपराध किया गया है. वे इस भीड़ में अपने बच्चों को भी देख सकते हैं."

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राहुल गांधी से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछा गया कि मंगलवार को पीएम हाउस के घर से पुलिस उन्हें उठाकर ले गई. तब उन्हें कैसा लग रहा था. इस सवाल पर मुस्कुराते हुए राहुल ने कहा, "मैं ठीक हूं, कोई ऐसी बात नहीं है, मुझे इन सब की आदत है. इसमें कोई दिक्कत नहीं है, मेरा काम भारत के लोगों की इच्छा को व्यक्त करना है, चाहे वह छात्रों की इच्छा हो, चाहे वह युवाओं की इच्छा हो, चाहे वह किसानों की इच्छा हो. यह वह काम है जो मुझे विपक्ष के नेता के रूप में करना है. मुझे भारत के लोगों की आवाज की अभिव्यक्ति बनना है. मुझे उन लोगों का ध्यान आकर्षित करना है जहां दर्द महसूस किया जा रहा है. ये बहुत छोटी कीमतें हैं. ये कोई बड़ी कीमत नहीं हैं. ऐसा करना, अपने लोगों की इच्छाओं के साथ खड़ा होना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है. इसलिए यह कोई समस्या नहीं है और मैं बहुत कुछ सहने को तैयार हूं."

इस दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पर कहा कि उनका मुद्दा अप्रसांगिक है. वो जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन उनका कोई मुद्दा नहीं है. बात बहुत साफ़ है. छात्रों की मांगें स्पष्ट हैं. पहली मांग यह है कि धर्मेंद्र प्रधान पद छोड़ें. दूसरी मांग यह है कि जिन लोगों ने छात्रों के साथ मारपीट की, उन्हें सज़ा मिले. तीसरी मांग यह है कि प्रधानमंत्री छात्रों से माफ़ी मांगें. जितेंद्र सिंह जो भी कल्पना करना चाहते हैं, करें उन्हें ऐसा करने की पूरी छूट है. मुझे इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. 

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