बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन का काम पूरा हो गया है. संगठन में पीएम नरेंद्र मोदी कैबिनेट के कुछ मंत्रियों को जगह दी गई है, जिनमें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को फिर से पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया है. इसके साथ ही केंद्र सरकार में कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं. सियासी गलियारों में माना जा रहा है कि संगठन में बदलाव महज एक 'ट्रेलर' है, असली 'फिल्म' यानी कैबिनेट फेरबदल अभी बाकी है. संगठन में जिन प्रमुख युवा चेहरों को जगह नहीं मिली है, उन्हें सरकार में एडजस्ट किया जा सकता है.
नितिन नवीन ने पार्टी संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए 14 नेताओं को दोबारा मौका दिया है, जबकि 51 नए चेहरों को शामिल किया है. इसके बावजूद कई प्रमुख युवा और तेजतर्रार नेताओं को 'टीम नवीन' में जगह नहीं मिल सकी है. बीजेपी युवा मोर्चा (BJYM) के अध्यक्ष पद से तेजस्वी सूर्या की छुट्टी हो गई है और उनकी जगह वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी को कमान सौंपी गई है.
हिमाचल प्रदेश से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को भी बीजेपी संगठन में जगह नहीं मिल सकी है. वहीं, आम आदमी पार्टी से आए संदीप पाठक और कांग्रेस से आए रोहन गुप्ता को संगठन में राष्ट्रीय सचिव (मंत्री) बनाया गया है, जबकि सांसद राघव चड्ढा को टीम में शामिल नहीं किया गया हैय इन बड़े युवा चेहरों को संगठन में जगह न मिलने के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या पार्टी आलाकमान इन्हें सरकार में शामिल करने की योजना बना रहा है?
बीजेपी संगठन में हुए बदलाव को कैबिनेट फेरबदल से जोड़कर देखने की एक मुख्य वजह यह है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं. इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिपरिषद में पहले से ही कुछ पद खाली हैं. रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं.
धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्रालय से हटने के बाद प्रह्लाद जोशी को इसका अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. इसके अतिरिक्त, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली और पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी की कमान सौंपी गई है, जबकि पीयूष गोयल पार्टी के कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं. माना जा रहा है कि सरकार में इनके पद भी खाली हो सकते हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर इन खाली जगहों को भर सकते हैं.
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के बयान से भी कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं को हवा मिली है. आठवले ने कहा है कि मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल ‘बहुत जल्द’ हो सकता है. उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों के कुछ नए चेहरों को सरकार में जगह मिल सकती है. हालांकि, यह आठवले की निजी राय है और इसे सरकार का आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता.
पूर्व केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा खेल मंत्री अनुराग ठाकुर को बीजेपी संगठन में स्थान नहीं मिला है. हिमाचल प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन राज्य के किसी भी नेता को नितिन नवीन की टीम में जगह नहीं दी गई है. हालांकि, पहले यह अटकलें थीं कि अनुराग ठाकुर को संगठन में कोई बड़ा पद (जैसे राष्ट्रीय महासचिव) सौंपा जा सकता है, लेकिन 'टीम नवीन' में उनका नाम न होने से अलग ही सियासी हलचल शुरू हो गई है.
केंद्रीय राजनीति और प्रशासनिक अनुभव में अनुराग ठाकुर का कद काफी बड़ा माना जाता है. हिमाचल प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए माना जा रहा है कि भले ही उन्हें संगठन में जगह न मिली हो, लेकिन मोदी सरकार के आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें किसी अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है.
कैबिनेट फेरबदल में सिख प्रतिनिधित्व एक बड़ा विषय है. रवनीत सिंह बिट्टू कैबिनेट से बाहर हो चुके हैं, जबकि हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है. पंजाब से मनप्रीत सिंह बादल को बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. वहीं आम आदमी पार्टी से आए संदीप पाठक और कांग्रेस से आए रोहन गुप्ता को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके बाद राघव चड्ढा को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं.
राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें संगठन में कोई पद नहीं दिया गया है. पंजाब के अन्य नेताओं को संगठन में जगह मिलने से राघव चड्ढा के मंत्री बनने की संभावनाएं देखी जा रही हैं. पार्टी उनके युवा चेहरे और 'जेन-जी' (Gen-Z) कनेक्ट का इस्तेमाल पंजाब की सियासत में करने के लिए उन्हें कैबिनेट में शामिल कर सकती है. इस प्रकार आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों और दिल्ली के राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए उन्हें एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभारा जा सकता है.
बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या का युवा मोर्चा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल पूरा हो चुका है और उनकी जगह डॉ. हेमांग जोशी की ताजपोशी की गई है. युवा मोर्चा में अपनी पारी पूरी करने के बाद तेजस्वी सूर्या के प्रशासनिक अनुभव और आक्रामक वक्ता की छवि को देखते हुए माना जा रहा है कि उन्हें केंद्र सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है.
आगामी कर्नाटक चुनावों के मद्देनजर भी उन्हें राज्य में या केंद्र में कोई महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है. तेजस्वी सूर्या बीजेपी के प्रखर युवा नेताओं में गिने जाते हैं और युवा पीढ़ी को साधने के लिए एक अहम भूमिका निभा सकते हैं, जिसे देखते हुए मोदी कैबिनेट विस्तार में उन्हें मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है.
मोदी सरकार बनाएगी जल्द सियासी बैलेंस
बीजेपी में 'एक व्यक्ति, एक पद' का सिद्धांत काफी हद तक लागू रहा है. संगठन की जिम्मेदारियों से मुक्त रखे गए युवा व अनुभवी नेताओं को अक्सर सरकार में शामिल कर उनके अनुभव का लाभ लिया जाता है.
2027 के राज्यों के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के रोडमैप को ध्यान में रखते हुए यह माना जा रहा है कि मोदी सरकार का आगामी मंत्रिमंडल विस्तार इन सभी युवा एवं आक्रामक नेताओं के नए राजनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकता है.