पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी के अगुवाई में छात्र-युवा आंदोलन के बढ़ते दबाव के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. सरकार के लिए गले ही हड्डी बन रहे छात्र आंदोलन खत्म हो गया है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार के खिलाफ अब एक नया मोर्चा खोल दिया है और फिर से आंदोलन करने का ऐलान कर दिया है.
पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने की मोदी सरकार की नीति (E-20 Fuel Policy) को गाड़ियों के लिए हानिकारक बताते हुए अरविंद केजरीवाल ने इसके खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंकने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि E-20 के चलते लोगों की गाड़ियां खराब हो रही हैं माइलेज घट रहा है और आम लोग परेशान हैं.
केजरीवाल ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार को E-20 के मुद्दे पर भी लोगों की चिंता सुननी चाहिए. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या केजरीवाल E-20 के मुद्दे पर जनता को जोड़कर वैसा ही बड़ा जन-आंदोलन खड़ा कर पाएंगे, जैसा हाल ही में पेपर लीक और अन्य मुद्दों पर CJP या छात्र-युवाओं के बैनर तले देखने को मिला था?
E-20 के खिलाफ केजरीवाल ने खोला मोर्चा
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि यह मुद्दा और बड़ा बनने से पहले सरकार खुद आगे बढ़कर इसका समाधान निकाले. इसी मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने शनिवार को दिल्ली में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 'नेशनल टाउन हॉल अगेंस्ट E-20'आयोजित करने का ऐलान किया है, जिसमें विशेषज्ञों, प्रभावित वाहन मालिकों और आम नागरिकों को एक मंच पर लाया जाएगा. दिल्ली और आसपास के लोग सीधे शामिल हो सकेंगे, जबकि देशभर के लोग ऑनलाइन जुड़ेंगे. इसके लिए एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया गया है.
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि टाउन हॉल में E20 से जुड़े विषय पर काम करने वाले विशेषज्ञ, वाहन मालिक, तकनीकी जानकार और इस नीति से प्रभावित लोग अपने अनुभव साझा करेंगे. उन्होंने कहा कि इस चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी कि सरकार पर E20 नीति वापस लेने या उसमें बदलाव के लिए किस तरह दबाव बनाया जाए. E20 के विरोध में शुरू किया गया ऑनलाइन याचिका को लेकर प्रधानमंत्री आवास भी जाएंगे.
टाउन हॉल अभियान के बाद आम आदमी पार्टी ने आंदोलन करने की दिशा में आगे बढ़ाने का भी प्लान बनाया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तभी सुनेंगे जब हम मिलकर एक साथ आवाज उठाएंगे. हमारी कोशिश है कि देश भर में जितने लोग E20 से दुखी हैं, जितने लोग E20 के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, सबको एक प्लेटफ़ॉर्म पर लाया जाए. इस तरह मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन खड़े करने की रणनीति पर केजरीवाल ने मोर्चा खोल दिया है.
सीजेपी जैसे विरोध और E-20 के मिजाज में फर्क
कॉकरोच जनता पार्टी का छात्र आंदोलन पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के सुधार से जुड़ा हुआ था, जो सीधा युवा वर्ग और छात्रों को भावनात्मक रूप से आंदोलन से जोड़ा था. इसीलिए बीजेपी के साथ जुड़े हुए कुछ नेताओं के बच्चे भी छात्र आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज उठ रहे थे. पेपर लीक युवाओं के भविष्य को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला मुद्दा था.
वहीं, E-20 का मुद्दा थोड़ा तकनीकी है, इसके सामने अपनी कुछ व्यावहारिक और राजनीतिक चुनौतियां हैं. पेपर लीक या शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे सीधे तौर पर न्याय और हक की लड़ाई से जुड़े होते हैं,जिन्हें आम आदमी तुरंत समझता है, इसके विपरीत, E-20 (एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) से गाड़ियों की माइलेज घटने या इंजन खराब होने का मुद्दा वाहन चालकों से जुड़ा है, लेकिन इसे लेकर अभी भी वैज्ञानिक और नीतिगत बहस जारी है. हालांकि, मीडिल क्लास के लोगों की जरूर शिकायतें है, जिन्हें लेकर केंद्र की सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है.
सरकार इस नीति को पर्यावरण संरक्षण, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने और देश के किसानों (विशेषकर गन्ना और मक्का उत्पादकों) की आय से जोड़ती है. ऐसे में सरकार इसे एक 'राष्ट्रहित और किसान हित' की योजना के रूप में पेश करती है,जिससे विपक्ष के लिए इस पर आक्रामक राजनीतिक जमीन तलाशना थोड़ा कठिन हो जाता है.
केजरीवाल E-20 को जन-आंदोलन बना पाएंगे?
केजरीवाल की राजनीति आंदोलन से शुरू हुई है. अन्ना आंदोलन से निकलकर राजनीति में आए हैं और उन्होंने आम आदमी पार्टी का गठन किया था. उन्होंने खुद को कॉमन मैन की अपनी छवि गढ़ी थी. आम आदमी के रोजमर्रा के दर्द को भुनाकर सत्ता में आए थे, लेकिन 12 साल तक दिल्ली के सीएम रहे. सत्ता में रहने के चलते उनके आंदोलन वाली छवि को झटका लगा है, अब उनके हर एक कदम को राजनीतिक से जोड़कर देखा जाता है.
मध्यम वर्ग और वाहन चालकों के बीच E-20 को लेकर जो दबी हुई चिंताएं हैं, केजरीवाल उन्हें एक मंच देने की कोशिश कर रहे हैं. इसीलिए वो पेट्रोल पंपों पर माइलेज की समस्या को उठा रहे हैं, जिससे आज लोग सामना कर रहे हैं. केजरीवाल इस मुद्दे को सफलतापूर्वक महंगाई और वाहन सुरक्षा से जोड़ने में कामयाब रहती है तो सियासी लाभ मिल सकता है, लेकिन पंजाब में चुनाव होना है, जिससे लोग इसे जोड़कर देख रहे हैं.
अरविंद केजरीवाल ने E-20 के जरिए एक नया सियासी दांव चला. ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये केवल बयानों और डिजिटल अभियानों तक सीमित रहता है, या फिर शाहीन बाग और सीजेपी जैसे आंदोलनों की तर्ज पर सड़कों पर एक व्यापक और प्रभावी जन-आंदोलन का रूप ले पाता है. पंजाब में 7 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है.
पंजाब में विपक्ष पेपर लीक के मुद्दे पर भगवंत मान सरकार के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहा है, कांग्रेस से लेकर अकाली दल तक मोर्चा खोले हुए हैं. छात्र आंदोलन को पूरे विपक्ष का समर्थन मिला था, E-20 के मुद्दे पर सड़क पर उतरते हैं तो आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए लोग जरूर उनके अभियान में शामिल हो सकते हैं, लेकिन विपक्षी दलों का समर्थन मिलना मुश्किल है.
पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के छत्तीस के आंकड़े हैं, वो एक दूसरे के विरोधी हैं. इसके अलावा इंडिया ब्लॉक के भी दलों का साथ मिलना केजरीवाल के लिए मुश्किल है. इसी तरह से आम जनता भी केजरीवाल की मुहिम से जुड़ेगी, ये देखना होगा?