परिसीमन पर जारी बहस ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक गहन राजनीतिक टकराव को जन्म दे दिया है. विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी होने से तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है. हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए तर्क दिया है कि दक्षिण को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा और इसके बजाय उसकी प्रतिनिधित्व संख्या में पर्याप्त वृद्धि होगी.
चेन्नई में आयोजित 'इंडिया टुडे तमिलनाडु राउंड टेबल' में भाजपा, कांग्रेस, द्रमुक (DMK) और एमडीएमके (MDMK) के नेताओं के बीच प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस हुई. इसमें विपक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा, "हमें अच्छा काम करने के लिए दंडित किया जा रहा है," जबकि भाजपा ने जोर देकर कहा, "हम दक्षिण को नुकसान नहीं होने देंगे, और न ही ऐसा होने वाला है. इसके साथ ही भाजपा ने विपक्षी दलों पर "भय का माहौल बनाने" का आरोप लगाया.
इस बहस की तात्कालिक पृष्ठभूमि संसद के हाल ही में संपन्न मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को एक साथ लाने के सरकार के प्रयास थे. साथ ही तमिलनाडु विधानसभा में पारित वह प्रस्ताव भी था, जिसमें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बनाए रखने और राज्य की सीटों की हिस्सेदारी की रक्षा करने की मांग की गई थी.
एमडीएमके: अच्छा काम करने की सजा भुगतेगा दक्षिण
मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (MDMK) के नेता और सांसद दुरई वैको ने तर्क दिया कि यह चिंता महज डर फैलाना नहीं है, बल्कि यह दो प्रतिस्पर्धी सिद्धांतों संघवाद और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने का सवाल है.
वैको ने कहा, यह परिसीमन बहस संघवाद और लोकतंत्र के बीच सहमति को लेकर है. उन्होंने इस मुद्दे को राज्यों के निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के संघीय सिद्धांत और एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य के लोकतांत्रिक सिद्धांत के बीच एक टकराव के रूप में प्रस्तुत किया. उन्होंने तर्क दिया कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन से तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्य असमान रूप से प्रभावित होंगे, क्योंकि इन्होंने जनसंख्या वृद्धि को सफलता पूर्वक नियंत्रित किया है.
वैको ने कहा कि तमिलनाडु की वर्तमान में लोकसभा में लगभग 7.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है और उन्होंने चेतावनी दी कि यह हिस्सा कम हो सकता है. उन्होंने तर्क दिया कि यह चिंता इसलिए भी बहुत गंभीर है क्योंकि तमिलनाडु ने अपनी जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण रखते हुए देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने कहा, यह न केवल दक्षिणी राज्यों के लिए, बल्कि देश के सभी प्रगतिशील राज्यों के लिए एक बेहद गंभीर मुद्दा है.
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आर्थिक पक्ष को सामने रखते हुए वैको ने आंकड़े पेश किए और कहा कि भारत की कुल आबादी में तमिलनाडु की हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत है, लेकिन देश की जीडीपी में इसका योगदान लगभग 9 प्रतिशत और कुल निर्यात में 13 प्रतिशत है. उन्होंने आगे जोड़ा, अगर ऐसा नहीं होता है, तो देश के विकास में योगदान देने वाले इन राज्यों को नुकसान उठाना पड़ेगा. हमें अच्छा काम करने के लिए दंडित किया जाएगा.
कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने लोकसभा सीटों में प्रस्तावित 50 प्रतिशत की वृद्धि के खिलाफ सबसे मजबूत और आंकड़ों पर आधारित तर्क दिया. उन्होंने कहा कि मुद्दा केवल यह नहीं है कि तमिलनाडु को सीटों की संख्या में बढ़त मिलेगी या नहीं, बल्कि यह है कि संसद में उसकी राजनीतिक ताकत और बात मनवाने की क्षमता कम हो जाएगी.
चक्रवर्ती ने कहा, किसी विधेयक का विरोध करने, उसे रोकने और दक्षिणी राज्यों की अल्पसंख्यक आवाज़ को दबाने की केंद्र की ताकत बहुत बढ़ जाएगी. यही वजह है कि हम 50 प्रतिशत की इस वृद्धि के खिलाफ हैं. वह सरकार के उस आश्वासन का जिक्र कर रहे थे, जिसमें सभी राज्यों में संसदीय प्रतिनिधित्व को एक समान 50 प्रतिशत बढ़ाने की बात कही गई है. चक्रवर्ती ने इस बात को चुनौती दी कि केवल जनसंख्या ही राजनीतिक ताकत तय करने का एकमात्र आधार होना चाहिए. संसद द्वारा देश के खजाने की देखरेख करने की भूमिका का हवाला देते हुए उन्होंने तर्क दिया कि राज्यों के आर्थिक योगदान को भी इस आकलन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना मिलकर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के जरिए देश के खजाने में 20 प्रतिशत का योगदान देते हैं, इसके विपरीत उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों का योगदान केवल 5 प्रतिशत है.
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द्रमुक: हम अपना रुख नहीं बदलेंगे
द्रमुक (DMK) प्रतिनिधि सालेम धरणीधरन से जब यह सवाल पूछा गया कि क्या पार्टी ने "निष्पक्ष परिसीमन" की बात कहकर अपने पिछले विरोध को नरम कर लिया है, तो उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार के साथ किसी भी तरह की सहमति की संभावना को खारिज कर दिया. धरणीधरन ने कहा, "हमारा रुख इसलिए नहीं बदलेगा क्योंकि हम पार्टी 'ए' या पार्टी 'बी' के साथ गठबंधन में हैं.' उन्होंने आगे कहा, "संघवाद या धर्मनिरपेक्षता जैसे कई मुद्दों पर द्रमुक का रुख 1949 से लगातार एक समान और स्पष्ट रहा है,"
उन्होंने एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में तमिलनाडु विधानसभा में पारित प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि इसमें लोकसभा की 543 सीटों की संख्या को बनाए रखने, तमिलनाडु की सीटों की हिस्सेदारी को सुरक्षित रखने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग की गई है.
बीजेपी ने कहा- दक्षिण को नुकसान नहीं
भाजपा नेता और तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल तमिलिसै सौंदर्यराजन ने इस आशंका को सिरे से खारिज कर दिया कि परिसीमन से दक्षिण भारत कमजोर होगा. उन्होंने कहा, हम सभी दक्षिण के नेता हैं, इसलिए हम दक्षिण को नुकसान नहीं होने देंगे, और वैसे भी दक्षिण को कोई नुकसान नहीं होने वाला है. सौंदर्यराजन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए उस आश्वासन का हवाला दिया, जिसमें संसदीय प्रतिनिधित्व में एक समान 50 प्रतिशत की वृद्धि की बात कही गई थी.
उन्होंने कहा, "हमारे माननीय गृह मंत्री ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रतिनिधित्व में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी." इस हिसाब से, उन्होंने बताया कि तमिलनाडु की लोकसभा सीटों की संख्या 39 से बढ़कर 59 हो जाएगी, जबकि केरल की सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी.