तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय ने परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया है. उन्होंने कहा कि 1971 के बाद की किसी भी जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ तो तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व स्थायी रूप से प्रभावित होगा. इसपर AIADMK के नेता ईपीएस ने बिल के बचाव में कहा कि परिसीमन में गलत कुछ नहीं है, लेकिन लोकसभा में तमिलनाडु का 7.18% हिस्सा किसी भी हालत में कम नहीं होना चाहिए.
विजय के प्रस्ताव में तीन मुख्य बातें रखी गईं. पहली, लोकसभा की कुल 543 सीटें स्थायी रूप से बरकरार रखी जाएं. दूसरी, राज्यों के बीच मौजूदा सीट बंटवारा स्थायी किया जाए. तीसरी, 2029 के लोकसभा चुनाव से मौजूदा 543 सीटों के आधार पर 33% महिला आरक्षण बिना देरी लागू किया जाए और आगे विधानसभा चुनावों में भी एक तिहाई सीट आरक्षण का लाभ दिया जाए.
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मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि पिछले 50 साल से तमिलनाडु समेत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसभा और विधानसभा की सीटें 1971 की जनगणना के आधार पर तय संख्या पर बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव उसी हिसाब से होते रहे हैं. उन्होंने कहा कि लाया गया संवैधानिक संशोधन विधेयक, जिसमें 50 साल पुरानी परिसीमन रोक हटाने, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने और लोकसभा सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था, फिलहाल पारित नहीं हो सका.
सीएम विजय ने कहा कि अगर यह विधेयक फिर लाया जाता है और 1971 के बाद की किसी भी जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है, तो आबादी पर प्रभावी नियंत्रण करने वाले दक्षिणी राज्यों, खासकर तमिलनाडु, को स्थायी नुकसान होगा.
तमिलनाडु के अधिकारों की स्थायी रक्षा का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि केंद्र सरकार ने भरोसा दिया है, इसलिए उसकी पहली जिम्मेदारी है कि जनसंख्या नियंत्रण, मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्वास्थ्य सेवा और जनकल्याण योजनाओं को ठीक से लागू करने वाले किसी भी राज्य को परिसीमन से नुकसान न हो. उन्होंने कहा कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटें, राज्यों के बीच मौजूदा सीट अनुपात और लोकसभा तथा राज्यसभा के बीच 2.2:1 का मौजूदा अनुपात स्थायी रूप से बनाए रखा जाए. उन्होंने सदन से कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, तमिलनाडु के अधिकारों की स्थायी रक्षा का प्रस्ताव है और इसे सर्वसम्मति से पारित किया जाए.
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परिसीमन पर क्या बोले AIADMK नेता ईपीएस?
दूसरी तरफ ईपीएस (एडप्पादी के. पलानीस्वामी) ने कहा कि परिसीमन में अपने आप में कुछ गलत नहीं है, लेकिन लोकसभा में तमिलनाडु का 7.18% हिस्सा किसी कीमत पर कम नहीं होना चाहिए. एआईएडीएमके ने परिसीमन विरोधी प्रस्ताव को खारिज किया, लेकिन लोकसभा और विधानसभा में 33% महिला आरक्षण का स्वागत किया. इस तरह चर्चा में एक तरफ परिसीमन पर मतभेद दिखे, तो दूसरी तरफ लोकसभा और विधानसभा में 33% महिला आरक्षण की मांग जोर से उठी.