
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने की बात कही है. हालांकि इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार के सामने शर्त भी रखी है. वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर दोनों नेताओं के अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात करने और अनशन खत्म करने की अपील के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान सरकार की ओर से उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया गया है.
वांगचुक ने अपने पत्र में मांग करते हुए कहा कि पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा होनी चाहिए. इसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार भी शामिल होना चाहिए.
उन्होंने 20 जुलाई 2026 को हुए 'चलो संसद' मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस की कथित ज्यादती और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के बावजूद प्रदर्शन बेहद शांतिपूर्ण रहा. पूरे देश और दुनिया ने प्रदर्शनकारियों का धैर्य और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की प्रतिबद्धता देखी है. वांगचुक ने उम्मीद जताई कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी मामलों, उत्पीड़न या बदले की कार्रवाई के जरिए लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनके विश्वास को और कमजोर नहीं किया जाएगा.

वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों की मुलाकात के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन खत्म करने की अपील की है. कुछ सांसद उनसे मिल भी चुके हैं, जबकि कुछ के बाद में मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि सांसदों ने उन्हें याद दिलाया कि देश की सेवा के लिए उन्हें अभी बहुत काम करना है.
उन्होंने कहा कि वह जीना चाहते हैं और अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम के बीच लौटना चाहते हैं, जिसने उनकी जिंदगी को दिशा दी है. लेकिन उन्होंने साफ किया कि वह उन युवाओं की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकते, जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था.
सोनम वांगचुक ने सरकार से स्पष्ट और बिना किसी शर्त के आश्वासन मांगा कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या बदले की कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि इन युवाओं का एकमात्र अपराध निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग के लिए आवाज उठाना है.
उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह आश्वासन देती है तो वह इस विश्वास के साथ अपना अनशन खत्म कर देंगे कि सरकार ने न सिर्फ उनकी अपील, बल्कि लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं को भी सुना है. हालांकि, ऐसा आश्वासन नहीं मिलने पर उन्होंने अनिश्चितकाल तक अनशन जारी रखने की बात कही. साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस बल के अत्यधिक इस्तेमाल को रोकने की उम्मीद जताई.
वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र का भविष्य इस बात से तय नहीं होता कि वह उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है, जो उससे सहमत हैं, बल्कि इससे तय होता है कि वह उन युवा नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है, जो साहस, उम्मीद और दृढ़ विश्वास के साथ अपनी आवाज उठाते हैं.