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2 महीने में ही मनाली से दिल्ली लौट आया कंटेंट क्रिएटर, बताया पहाड़ों में रहने का असली सच,1 महीने में खर्च हुए इतने रुपये

दिल्ली का एक Gen Z कंटेंट क्रिएटर शहरों की भागदौड़ से दूर सुकून की तलाश में मनाली के सियाल गांव पहुंचा. मगर महज 2 महीने बाद ही वो वापस लौट आए हैं, 71 दिनों का उनका सफर कैसा रहा, इस बारे में उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया है. आइए उनकी इस जर्नी के बारे में जानते हैं.

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पहाड़ी गांव में 71 दिन कई चैलेंज सामने आए. (PHOTO: Instagram@a4ajayyyyy)
पहाड़ी गांव में 71 दिन कई चैलेंज सामने आए. (PHOTO: Instagram@a4ajayyyyy)

आजकल लोग समय मिलते ही पहाड़ों पर घूमने निकल जाते हैं, जहां का शांत वातावरण उनको बेहद सुकूनभरा लगता है. शहरों की बिजी लाइफ के आगे उनको गांवों की स्लो लाइफ काफी अट्रैक्ट करती है.यही कारण है कि अब लोग शहरों से ज्यादा पहाड़ों पर रहने का मन बना रहे हैं और उनके लिए यह किसी सपनों की दुनिया जैसा ही है. इसी को जानने के लिए दिल्ली के Gen Z कंटेंट क्रिएटर अजय शर्मा ने भी इस साल मई में मनाली के सियाल गांव का रुख किया. मगर महज दो महीने के अंदर ही उन्होंने दिल्ली वापस लौटने का फैसला कर लिया. 

अजय शर्मा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर कर यह जानकारी दी है कि पहाड़ों में रहने का उनका एक्सपेरिमेंट अब खत्म हो रहा है. इसके साथ ही उन्होंने पहाड़ों में रहने का अपना एक्सपीरियंस भी लोगों के साथ शेयर किया. आइए जानते हैं कि मनाली में अजय के यह दो महीने कैसे थे और उनको वहां पर कैसा फील हुआ. 

पहाड़ों पर मिला अलग ही सुकून

वीडियो में, अजय ने मनाली में बिताए अपने समय को याद किया। उन्होंने कहा कि लाइफस्टाइल में एक नॉर्मल से बदलाव के तौर पर शुरू हुआ उनका यह सफर उनकी लाइफ का सबसे यादगार एक्सपीरियंस में से एक बन गया है.जब शुरुआत में वह मनाली पहुंचे थे, तो वहां किसी को नहीं जानते थे. लेकिन समय के साथ, वहां के अनजान रास्ते जाने-पहचाने लगने लगे और पहाड़ घर जैसे लगने लगे.

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 उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी यादें बनाईं जिन्हें वे कभी नहीं भूल पाएंगे, और इसी वजह से वहां से विदा लेना उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा इमोशनल कर देना वाला पल था.

इतना आसान नहीं था दिल्ली शिफ्ट होना 

अजय ने बताया कि उनके लिए वापस दिल्ली शिफ्ट होना काफी मुश्किल था, वो यह सोच नहीं पा रहे थे कि सिर्फ 2 महीने एक किसी जगह रहने के बाद वहां से वापस आना उन पर इतना बुरा असर करेगा. हालांकि उनका मानना है कि किसी चैप्टर के बंद होने का मतलब किसी न्यू का खुलना होता है और वो अपने दिल्ली वापस आने को अपनी लाइफ का न्यू फेज मान रहे हैं.

अजय मनाली के पास सियाल गांव गए थे, वे उस सवाल के जवाब की तलाश में वहां गए थे कि  क्या पहाड़ों पर हमेशा रहने का अनुभव भी छोटी छुट्टियों के दौरान मिलने वाले अनुभव जितना ही खुशनुमा होता है?

 23 मई से वे वहां 2 अगस्त 2026 तक रहे. इस दौरान उन्होंने उस इलाके में लगभग 71 दिन बिताए और अपनी यात्रा को करीब 55 वीडियो के ज़रिए रिकॉर्ड किया. वहां रहने के दौरान, उन्होंने अपना डेली रूटीन, लाइफस्टाइल से जुड़े चैलेंज, स्थानीय अनुभवों और पहाड़ों से रिमोट वर्क करने की असलियत के बारे में बताया.

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मनाली के गांव में रहने का खर्चा

मनाली के सियाल गांव में अजय एक बेडरूम सेट में रहते थे, जिसका महीने का किराया 14 हजार था, इसमें वाई-फाई और बिजली का बिल शामिल था. पैसे बचाने के लिए वो घर पर ही अपने लिए खाना बनाते थे और ऐसे में उनके राशन में करीब 3500 रुपये महीना लगता था. हालांकि जब कभी उनको घर पर कुछ बनाने का मन नहीं करता था, तो वो बाहर से खाते थे. इससे उनके पूरे खर्चे में हफ्ते में 500 रुपये ज्यादा जुड़ जाते थे. उनका महीने का कुल 21 हजार रुपये खर्च होता था, जिसमें 1500 रुपये उनके जिम की फीस भी शामिल थी.

क्यों छोड़ना पड़ा मनाली? 
 
अजय जब मनाली गए थे, तो उनको लगा था कि वहां से काम करने का एक अलग ही मजा होगा. हालांकि उन्होंने कुछ पल एक्सपीरियंस भी किए, मगर वहां पर कुछ घूमने जाना और वहां रहने में काफी फर्क है और बहुत सारी चुनौतियां भी हैं, जिनके बारे में अजय ने बताया. 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by Ajay Sharma (@a4ajayyyyy)

इन मुश्किलों से हुआ सामना

  1. नेटवर्क का अचानक रुक जाना, जिसकी वजह से काम प्रभावित होता था.
  2. बारिश का अचानक से शुरू हो जाना, मानसून में सड़कें अक्सर खराब हालत में होती थीं.
  3. अकेले रहने का मतलब था कि उसे खाना बनाना और बाकी सब कुछ खुद ही संभालना पड़ता था.बारिश के दिनों में उनकी जिंदगी को काफी मुश्किल बना दिया था.
  4. कई पॉपुलर स्पॉट तक पहुंचने के लिए लंबी और खड़ी चढ़ाई वाली ट्रेकिंग की करनी पड़ती थी. पैदल चलना कई बार काफी थका देने वाला होता था. 
  5. ज्यादातर समय अकेले बिताने के कारण कभी-कभी वह खुद को अलग-थलग और अकेला महसूस करता था.
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