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टैक्स देकर मिडिल क्लास को क्या मिलता है? BJP से अलग होते ही शहजाद पूनावाला ने सरकार से पूछे चुभते सवाल

BJP छोड़ने के बाद शहजाद पूनावाला ने जनहित के कुछ ज्वलंत मुद्दे उठाए हैं और कहा है कि आखिर मिडिल क्लास को टैक्स देकर क्या मिलता है. उन्होंने कहा है कि हम अगर ग्लोबल दरों पर टैक्स देते हैं तो हमें ग्लोबल लेवल की सुविधाएं भी मिलनी चाहिए.

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शहजाद पूनावाल ने 17 अगस्त 2026 को बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है. (Photo: ITG)
शहजाद पूनावाल ने 17 अगस्त 2026 को बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है. (Photo: ITG)

बीजेपी के तेज-तर्रार प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला ने पार्टी छोड़ने के बाद देश की सभी सरकारों से चुभते हुए सवाल पूछे हैं. उन्होंने कहा भारत के मिडिल क्लास को दिन दहाड़े लूटा जा रहा है. क्या वो जितना टैक्स देता है उसी अनुपात में उसे सुविधाएं मिलती है? अपने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर शहजाद पूनावाला ने कहा है कि भारत का मिडिल क्लास एटीएम बन चुका है. 

देश के न्यूज चैनलों पर बीजेपी की नीतियों को डिफेंड करने वाले शहजाद पूनावाला ने कहा कि जब तक हमें वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं नहीं मिल जातीं, तब तक सैलरी पाने वाले मिडिल क्लास के लिए पर्सनल इनकम टैक्स खत्म करने का समय आ गया है. 

शहजाद पूनावाला ने 17 अगस्त 2026 को बीजेपी से इस्तीफा दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे की चिट्ठी को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है. पार्टी छोड़ने से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने मिडिल क्लास पर लगने वाले आयकर और देश में बुनियादी सुविधाओं जैसे-सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवा को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे. और एक्स पर एक वीडियो बनाकर सवाल पूछा था. 

हेल्थ और एजुकेशन सिस्टम पर तीखे सवाल

पूनावाला ने देश के स्कूलिंग सिस्टम और हेल्थ सिस्टम पर तीखे सवाल किए. उन्होंने कहा कि परिवारों को अक्सर अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए प्राइवेट स्कूलों  पर और माता-पिता के इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है. 

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उन्होंने कहा, "जब आपको अपने बच्चे को स्कूल भेजना होता है, तो वह हमेशा प्राइवेट स्कूल ही होता है. जब आपको अपने माता-पिता को अस्पताल भेजना होता है, तो वह हमेशा प्राइवेट अस्पताल ही होता है."

18 अगस्त को उन्होंने एक्स पर ट्वीट कर फिर से पूछा. 

एक-एक रुपये की जवाबदेही चाहिए

उन्होंने एक्स पर लिखा, "मिडिल क्लास सभी सरकारों से यह सवाल पूछ रहा है. अगर हम ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से टैक्स देते हैं, तो क्या हमें ग्लोबल स्टैंडर्ड की सुविधाएं मिलती हैं? जैसे कि हमारे सरकारी स्कूल, सड़कें, सांस लेने के लिए साफ हवा और पीने का साफ़ पानी? सरकारों को इसका जवाब देना चाहिए."

उन्होंने कहा कि पर्सनल इनकम टैक्स, GST, टोल, सेस, फ्यूल टैक्स, लोकल टैक्स. इतनी चीजें जनता चुकाती हैं. 

पूर्व बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि मुझे योगदान देने से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन इतना सब देने के बाद, मुझे बदले में क्या मिल रहा है?

उन्होंने कहा कि भारत का मिडिल क्लास शुरुआत के तौर पर सिंगापुर जैसी व्यवस्था क्यों नहीं पा सकता. कम टैक्स, बेहतर सड़कें, बेहतर ट्रांसपोर्ट, बेहतर सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर. भारत की जनता को किसी भी तरह से टैक्स वसूलने वाली हर अथॉरिटी की ओर से टैक्स के रूप में वसूले गए एक एक रुपये के लिए जवाबदेही चाहिए. 

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नौकरीपेशा लोगों के लिए कम हो टैक्स 

पूनावाला ने मिडिल क्लास खासकर सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स कम करने की मांग की. 

उन्होंने कहा, "मिडिल क्लास के लिए टैक्स कम करें. सैलरी पाने वाले लोगों को इतना ज़्यादा टैक्स नहीं देना चाहिए. उन्हें थोड़ी राहत मिलनी चाहिए."
 

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