अमेरिका की एक हेल्थकेयर एनालिटिक्स कंपनी के भारतीय ऑफिस में काम करने वाले करीब 900 मेडिकल कोडिंग प्रोफेशनल्स को अचानक नौकरी से निकाल दिया गया. संबंधित कंपनी का दफ्तर केरल में स्थित है. शुक्रवार सुबह लोग काम पर पहुंचे और पता चला कि उन्हें फायर किया जा चुका है. लोगों के साथ हुई इस घटना से भारी आक्रोश फैल गया और केरल सरकार को तुरंत दखल देना पड़ा.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोच्चि और कोझिकोड में कंपनी के ऑफिस में काम करने वाले इन कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या कॉन्ट्रैक्ट के तहत तय नोटिस पीरियड का पालन किए बिना नौकरी से निकाल दिया गया.
नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों ने कंपनी के दफ्तर के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया, जिसके बाद, स्थानीय कांग्रेस विधायक उमा थॉमस ने मैनेजमेंट के फैसले को चुनौती देने के लिए दखल दिया. इसके बाद, केरल श्रम विभाग ने इस मामले में दखल दिया, जिससे बड़े पैमाने पर की गई छंटनी की कानूनी वैधता की जांच की जा सके और इसका तुरंत समाधान निकाला जा सके.
कंपनी ने क्या फैसला किया?
थ्रिक्काकारा की MLA उमा थॉमस ने कर्मचारियों के प्रोटेस्ट के बाद दफ्तर पहुंचकर लेबर मिनिस्टर बिंदु कृष्णा से संपर्क किया. थॉमस ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने कोच्चि में कंपनी के प्रतिनिधियों से बात की और चिंता जताई कि अचानक नौकरी से निकाले जाने से कर्मचारियों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ेगा. उन्होंने कहा, "वे इस मामले पर बातचीत करने और लेबर ऑफिसर के निर्देशों के मुताबिक मुआवजा देने के लिए सहमत हो गए हैं."
विधायक ने कहा कि प्राथमिकता यह पक्का करना है कि कर्मचारी अपनी नौकरी पर बने रहें. उन्होंने कहा, "लेबर डिपार्टमेंट ने इसमें दखल दिया है. लेबर सेक्रेटरी 6 जुलाई को आएंगे और बातचीत करेंगे."
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लेबर डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने कोच्चि में कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की और नौकरी से निकालने के प्रोसेस को फिलहाल रोकने का फैसला किया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि नौकरी से निकालने के बारे में कोई भी अगला फैसला लेबर सेक्रेटरी की मैनेजमेंट के साथ मीटिंग के बाद ही लिया जाएगा. कंपनी के अधिकारियों ने इस मामले पर मीडिया के सवालों का कोई जवाब देने से इनकार कर दिया.