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फर्जी कर्मचारी, फर्जी PF खाते.. Nokia के दो कर्मचारियों ने डकारे 19 करोड़!

CBI ने नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के दो कर्मचारियों के खिलाफ 19.33 करोड़ रुपये के EPF घोटाले के आरोप में मामला दर्ज किया है. आरोप है कि साल 2023-24 के दौरान 94 फर्जी कर्मचारी खातों में रकम ट्रांसफर की गई. मामले का खुलासा EPFO की जांच और कंपनी की फोरेंसिक ऑडिट के बाद हुआ.

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नीट यूजी पेपर लीक (सांकेतिक तस्वीर)
नीट यूजी पेपर लीक (सांकेतिक तस्वीर)

केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के दो कर्मचारियों के खिलाफ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO से जुड़े 19.33 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में केस दर्ज किया है. आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी कर्मचारी खातों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की. CBI ने इस मामले में वैभव वर्मा और कमाराजू मुत्याला को आरोपी बनाया है. वैभव वर्मा कंपनी में पेरोल क्लस्टर लीड के पद पर थे, जबकि कमाराजू मुत्याला पेरोल मैनेजमेंट हेड के रूप में कार्यरत थे. इनके अलावा कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को भी एफआईआर में आरोपी बनाया गया है.

एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. जांच के अनुसार, वर्ष 2023 से 2024 के बीच आरोपियों ने कथित तौर पर 94 फर्जी कर्मचारी खातों में EPF की 19.33 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर कर दी. आरोप है कि ये सभी खाते वास्तविक कर्मचारियों के नहीं थे और इन्हें धोखाधड़ी के उद्देश्य से तैयार किया गया था.

94 फर्जी कर्मचारी खातों में ट्रांसफर की गई रकम

मामले की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है. नोकिया पहले कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध उपबंध अधिनियम, 1952 के तहत एक एक्जेम्प्टेड एस्टैब्लिशमेंट थी. जुलाई 2023 में कंपनी ने अपनी छूट वापस लेने के लिए आवेदन किया. EPFO से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी ने सभी पुराने सदस्यों की जमा राशि EPFO को ट्रांसफर कर दी और 1 सितंबर 2023 से वह अन-एक्जेम्प्टेड एस्टैब्लिशमेंट के रूप में काम करने लगी. इसी दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद EPFO की जोनल फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट कमेटी ने जांच शुरू की. जांच में 94 ऐसे लाभार्थी खाते मिले, जिन्हें वास्तविक नहीं माना गया.

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दूसरी तरफ, नोकिया ने भी अपने स्तर पर फोरेंसिक ऑडिट कराया. इस जांच में वैभव वर्मा और कमाराजू मुत्याला को उन अधिकारियों के रूप में चिन्हित किया गया, जिन्होंने कथित तौर पर इन ट्रांसफरों की प्रक्रिया को अंजाम दिया. फोरेंसिक जांच में कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी सामने आए. जांच के दौरान आरोपियों के लैपटॉप से हटाई गई सबमिशन फाइलें बरामद हुईं. इसके अलावा ऐसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी मिले, जिनमें कंपनी से जुड़े नहीं होने वाले लोगों का विवरण दर्ज था. जांच में फर्जी रोजगार सत्यापन और आधिकारिक लॉगिन का उपयोग कर नकली खातों के लिए KYC मंजूर किए जाने के भी प्रमाण मिलने का दावा किया गया है.

CBI ने भ्रष्टाचार, BNS और IT Act के तहत दर्ज किया केस

इन निष्कर्षों के बाद नोकिया ने दोनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया. कंपनी ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की और पूरे मामले की जानकारी EPFO को दी. इसके बाद EPFO की शिकायत के आधार पर CBI ने औपचारिक मामला दर्ज किया. मामले पर नोकिया के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी नियमों के पालन को गंभीरता से लेती है और अपने सभी कारोबारी कामकाज में नैतिकता तथा पारदर्शिता के उच्चतम मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है. हालांकि मामला जांच के अधीन होने के कारण कंपनी ने इसके तथ्यों पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया. फिलहाल CBI पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
 

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