कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मंगलवार को बीजेपी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयान पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि पीएम का इस्तीफा दिलवा दो, हम सब इस्तीफा दे देंगे. असल में पीयूष गोयल ने कहा था कि 'अगर कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह दोषपूर्ण और 'वोट चोरी' मानती है, तो उसके छह राज्यों के मुख्यमंत्री इस्तीफा क्यों नहीं देते?'
मंगलवार को इसी बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने आजतक से बातचीत में कहा कि 'आप पीएम का इस्तीफा दिलवा दो.' मंगलवार शाम को इमरान मसूद राहुल गांधी की ओर से बुलाई हाई-टी मीटिंग में शामिल होने के लिए पहुंच रहे थे. इसी दौरान उन्होंने एक सवाल के जवाब में यह बात कही.
उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि पूरे देश में चुनाव दोबारा कराए जाएं. उन्होंने खुद के भी इस्तीफा देने की बात कही. उन्होंने कहा कि जब तक ये लूटतंत्र खत्म नहीं होगा और इस लूटतंत्र को हम उखाड़ नहीं फेकेंगे तब तक ये आंदोलन और सिलसिला जारी रहेगा.
पीयूष गोयल ने इससे पहले कांग्रेस पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि 'कांग्रेस का बचकाना व्यवहार पूरे देश ने देखा है. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने पहले मुख्य चुनाव आयु्क्त को कैबिनेट में शामिल किया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद्म भूषण, पद्म विभूषण से सम्मानित किया और राज्यपाल भी बनाया.
उन्होंने कहा, 'एक प्रकार से एम.एस. गिल जी का तो कभी सरकार में हैं, कभी इलेक्शन कमिश्नर बनते हैं, कभी पार्लियामेंट में पहुंच जाते हैं, कभी यूनियन कैबिनेट में जाते हैं. ये सौदेबाजी का ही प्रतीक लगता है.'
बता दें कि इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि अगर केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस सरकारें इस्तीफ़ा दे दें तो वह बैलेट पेपर से चुनाव लड़ने को तैयार हैं. उन्होंने दावा किया कि ये सरकारें भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में कथित "वोट चोरी" के ज़रिए बनी थीं.
गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पर वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) और कथित वोट चोरी के ख़िलाफ़ उनके अभियान को लेकर निशाना साधा. सरमा ने कहा, "अगर राहुल गांधी और कांग्रेस अपनी सरकारों के इस्तीफ़े के लिए तैयार हैं, तो मैं बैलेट पेपर से चुनाव लड़ने को तैयार हूं. केरल, कर्नाटक, झारखंड और तेलंगाना सरकारों को इस्तीफ़ा देना चाहिए क्योंकि ये सरकारें भी ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में 'वोट चोरी' के ज़रिए बनी थीं."