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दिल्ली-NCR में सांसों का 'आफतकाल', 9 इलाकों में AQI 400 के पार

सुबह 6 बजे के आंकड़ों के अनुसार, रोहिणी में सबसे अधिक 473 AQI दर्ज किया गया. इसके अलावा आरके पुरम में 441, अलीपुर और सोनिया विहार में 435-435, ओखला फेज-2 में 426, नॉर्थ कैंपस में 424, आईटीओ में 420 और नजफगढ़ में 412 AQI रहा.

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दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना हुआ मुश्किल (File photo)
दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना हुआ मुश्किल (File photo)

दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता लगातार खतरनाक स्तर पर बनी हुई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, आज (6 नवंबर 2026) सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 389 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है.  

 नोएडा में AQI 313 ('बेहद खराब' श्रेणी) और गुरुग्राम में ('बेहद खराब' श्रेणी) रहा. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुबह 7 बजे के आंकड़ों के मुताबिक, तीनों शहरों की हवा बेहद खराब बनी हुई है. दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच गया है. 

कई इलाके धुंध-स्मॉग की गहरी चादर में लिपटे नजर आए. विशेषज्ञों की मानं तो दिल्ली-एनसीआर में आने वाले दिनों में सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण और बढ़ने के भी पूरे आसार है.

 दिल्ली के प्रमुख इलाकों में AQI की स्थिति (सुबह 6:00 बजे)

  • रोहिणी: 473 (गंभीर)

  • पंजाबी बाग: 464 (गंभीर)

  • आरके पुरम: 441 (गंभीर)

  • अलीपुर: 435 (गंभीर)

  • सोनिया विहार: 435 (गंभीर)

  • ओखला फेज-2: 426 (गंभीर)

  • नार्थ कैंपस, डीयू: 424 (गंभीर)

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  • आईटीओ: 420 (गंभीर)

  • नजफगढ़: 412 (गंभीर)

  • पूसा: 393 (बेहद खराब)

  • चांदनी चौक: 386 (बेहद खराब)

  • आनंद विहार: 350 (बेहद खराब)

  • लोधी रोड: 306 (बेहद खराब)

AQI 400 पार होने पर शरीर पर क्या पड़ता है असर? खांसी से लेकर सांस फूलने तक दिखते हैं ये लक्षण
 

दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और गुरुग्राम में भी हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में बनी हुई है. सुबह के इन आंकड़ों से साफ है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों को फिलहाल प्रदूषण से राहत नहीं मिली है. 

आपको बता दें कि  CPCB के मुताबिक AQI 0 से 50 के बीच होने पर हवा 'अच्छी' मानी जाती है. 51 से 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच 'मध्यम', 201 से 300 के बीच 'खराब', 301 से 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में आती है.

एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंचने के बाद हवा बेहद जहरीली हो जाती है. इस खतरनाक प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों की बीमारी या अस्थमा से पीड़ित मरीजों पर ही नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ लोगों की सेहत पर भी तेजी से पड़ता है. प्रदूषण का स्तर इतना गंभीर होने पर शरीर में कई तरह की समस्याएं उभरने लगती हैं.

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कुछ लोगों को लगातार सूखी खांसी परेशान करती है, तो कई लोगों को गला सूखने या गले में खराश की शिकायत होती है. वहीं थोड़े से शारीरिक परिश्रम, जैसे सीढ़ियां चढ़ने पर भी सांस फूलने लगती है.

बचाव के लिए क्या करें?

लोगों को सलाह है कि सुबह और शाम की सैर करने से बचें. बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें. बाहर जाना पड़े तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें. घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें. अगर लगातार खांसी, सीने में जकड़न या सांस फूलने की परेशानी हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लें.

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