प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं में सुधार के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया है. इसे लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है. विपक्षी पार्टी ने इसे 'प्रधानमंत्री की बुरी तरह से खराब हो चुकी छवि को सुधारने की एक उच्च-स्तरीय कोशिश' करार दिया है.
दरअसल पीएम मोदी ने रविवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया था कि सरकार ने एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स बनाई है जिसकी अगुवाई इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि करेंगे. ये समिति NTA की परीक्षाओं में तकनीकी सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए सुझाव देगी.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार के इस फैसले पर तंज कसा. उन्होंने कहा, 'जून 2024 में NEET-UG सहित कई परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद मोदी सरकार ने डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमिटी बनाई थी.'
'दागदार छवि को सुधारने की एक हाई-पावर्ड...'
जयराम रमेश ने आगे कहा कि जुलाई 2026 में भी सरकार ने NEET-UG और दूसरी परीक्षाओं में फिर वही गलतियां दोहराई हैं और अब एक नई 'हाई पावर्ड टास्क फोर्स' का गठन कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक राधाकृष्णन कमिटी की 101 सिफारिशों को पूरी तरह से लागू भी नहीं किया है. 2024 से 2026 के बीच पेपर लीक की घटनाओं के दौरान NTA के लिए एक महानिदेशक तक नियुक्त नहीं किया गया.
कांग्रेस नेता ने लिखा, 'आखिरकार ये सब सिर्फ प्रधानमंत्री की अपूरणीय रूप से दागदार छवि को सुधारने की एक हाई-पावर्ड कोशिश भर है.'
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टास्क फोर्स में शामिल दिग्गज नाम
केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई इस टास्क फोर्स में कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है. नंदन नीलेकणि के अलावा इसमें इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, आईबी के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और रसद विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं. ये समिति परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और बुनियादी बदलावों पर अपनी राय देगी.